अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। कुछ महीने पहले जो लोग करियर के आखिरी पड़ाव पर भारतीय टीम की सेवा कर रहे महेंद्र सिंह धौनी को संन्यास लेने की सलाह दे रहे थे वह अब उनके संभावित उत्तराधिकारी रिषभ पंत की आलोचना करते हुए नहीं थक रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खत्म हुई पांच मैचों की वनडे सीरीज के आखिरी दो मुकाबलों ने टीम इंडिया की कमजोरियों को तो खोलकर रख दिया है लेकिन साथ ही इस सीरीज से एक बार फिर से भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की उपयोगिता साबित हो गई।

महेंद्र सिंह धौनी स्टंप के पीछे हमेशा मजबूत रहते हैं, यही नहीं वह कप्तानी में विराट कोहली को बहुत मदद करते हैं जबकि आखिरी दो मैच में उनके आराम करने के कारण पंत को मौका मिला और उन्होंने बेहद खराब कीपिंग की। यही नहीं उनकी बल्लेबाजी भी बेकार रही। बाकी कप्तानी में विराट की मदद करने का तो सवाल ही नहीं उठता। अंतिम दो मैचों में कोहली के पास नाजुक परिस्थितियों में सहयोग के लिए धौनी का क्रिकेटीय दिमाग नहीं था।

हाल ही में पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने कहा था कि धौनी के बिना विराट आधे कप्तान होते हैं। बीसीसीआइ के एक अधिकारी ने कहा कि विराट तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान हैं जबकि धौनी सिर्फ सीमित ओवरों का क्रिकेट खेल रहे हैं। आपको अंतर साफ दिखाई देता होगा। टेस्ट के मुकाबले सीमित ओवरों में टीम इंडिया कम गलत फैसले लेती है, उसके पीछे धौनी का सहयोग शामिल है इसलिए इस पूर्व कप्तान का विश्व कप में अहम योगदान होगा। आपने देखा होगा वनडे व टी-20 में जब आखिरी ओवरों में विराट बाउंड्री के पास फील्डिंग करते हैं तो उन्हें गेंदबाज की चिंता नहीं होती है क्योंकि उन्हें पता होता है धौनी संभाल लेंगे। वह फील्डिंग भी सेट कर लेंगे और गेंदबाजों को यह भी बता देंगे कि उन्हें कहां गेंद फेंकनी है और क्या करना है।

धौनी भले ही अब मैच फिनिशर की जगह पारी बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हों लेकिन उनकी कप्तानी की कला भारत के लिए सबसे मददगार है। निश्चित तौर पर विश्व कप जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में कोहली और टीम इंडिया को इसका फायदा मिलेगा। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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