अभिषेक त्रिपाठी, जोहानिसबर्ग। बिना अभ्यास मैच के ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उतरकर शुरुआती दो मुकाबले हारने वाली भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री में ही तैयारियों को लेकर एक राय नहीं है। केपटाउन में पहला टेस्ट हारने के बाद भारतीय कप्तान ने कहा था कि हमारी तैयारियां पूरी थीं और उसको लेकर कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सोमवार को मुख्य कोच रवि शास्त्री ने कहा कि यहां दो सप्ताह पहले आकर तैयारियां करनी चाहिए थीं। हालांकि, इससे पहले जब भी भारतीय कप्तान से पूछा गया कि टीम ने अभ्यास मैच नहीं किया, क्या टीम को और जल्दी यहां आना चाहिए था तो उन्होंने हमेशा इससे इन्कार किया।

 

भारत की तैयारियों में खामियां शुरुआत से थी जिसे अभी तक नजरअंदाज किया जा रहा था। दो हार के बाद शास्त्री इसे कुबूल करने के लिए मजबूर हो गए। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका में पहला टेस्ट मैच पांच जनवरी से खेलना था और टीम यहां 29 दिसंबर को पहुंची थी। टीम ने कोई अभ्यास मैच नहीं खेला। वहीं, ऑस्ट्रेलिया टीम को यहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक मार्च से चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है और वह 12 दिन पहले ही यहां पहुंच जाएगी। वह 22 फरवरी से तीन दिन का अभ्यास मैच भी खेलेगी।

 

शास्त्री से जब पूछा गया कि क्या टीम को तैयारियों के लिए 10 दिन पहले यहां आना चाहिए था तो उन्होंने कहा कि कार्यक्रम ही कुछ ऐसा था, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि भविष्य में कार्यक्रम तैयार होते समय हम इस बात का ध्यान रखेंगे। टेस्ट विशेषज्ञ बल्लेबाजों को पहले यहां भेजने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह भी एक सोच थी, लेकिन वह परवान नहीं चढ़ी। वनडे टीम श्रीलंका के खिलाफ सीरीज खेल रही थी, ऐसे में दोनों अलग-अलग हो जाते। कौन बाकी चीजों को यहां आकर देखता। यह सब चीजें दिमाग में थीं, लेकिन मैं यही कहूंगा कि अगर हम दो सप्ताह पहले आते तो ज्यादा अच्छा होता। हालांकि, यह कोई बहाना नहीं है। 

 

हम दोनों मैच जीत सकते थे

शास्त्री से जब टीम के मूड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम दोनों मैच जीत सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। हालांकि, जब आपको लगता है कि आप जीत सकते हैं तो आपको आगे बढऩा चाहिए। जब ऐसा नहीं लगता तो आप आगे नहीं बढ़ते। भारत में अच्छे प्रदर्शन के बाद विदेशी सरजमीं पर वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि घर में हम खेलने के आदी हैं। वहां पर वापसी जैसी स्थिति ही नहीं आती, यहां पर परिस्थितियां अलग हैं। जिस पिच पर हम खेल रहे हैं वह दोनों ही टीमों के लिए एक जैसी है। हमारा फोकस 20 विकेट लेने पर है जो हमने पिछले दोनों मैचों में किया। इससे हमारे पास दोनों मैच जीतने के मौके थे। हां, अगर हमारा शीर्ष क्रम रन बनाता तो हम उन्हें जीत सकते थे। अजिंक्य रहाणे की जगह शुरुआती दो टेस्ट में रोहित शर्मा को चुनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर अजिंक्य पहला टेस्ट खेलते और रन नहीं बना पाते तो आप फिर पूछ रहे होते कि रोहित को क्यों नहीं खिलाया। रोहित अच्छा नहीं खेल पाए तो रहाणे को न खिलाने पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा ही तेज गेंदबाजों को लेकर है। जब आपके पास विकल्प होते हैं तो टीम प्रबंधन उस पर विचार करता है और फिर उस पर अडिग रहता है। 

 

नंबर वन टीम का प्रदर्शन 

जब शास्त्री से पूछा गया कि क्या यह नंबर वन टीम का प्रदर्शन है तो उन्होंने कहा कि दोनों मैचों में हमारा समय भी आया। हम तब नंबर वन की तरह खेले जब हमने मेजबानों को 130 रनों पर आउट किया। विदेशी परिस्थितियों में जब विराट की पारी की बदौलत हम उनके करीब पहुंचे और 30 रनों पर ही उनके दो विकेट झटक लिए तब टीम ने नंबर वन की तरह प्रदर्शन किया। बहुत सी टीमें जब भारत आती हैं तो इसका आधा भी नहीं कर पाती हैं। वीरेंद्र सहवाग ने कहा था कि अगर विराट खराब प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें खुद को भी अंतिम एकादश से हटा लेना चाहिए। इस पर शास्त्री ने कहा कि सब अपना-अपना काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का अलग काम है और टीम का अलग। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता। 

 

गेंदबाजों ने किया अच्छा प्रदर्शन

उन्होंने कहा कि किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि हमारे गेंदबाज इस तरह खतरनाक साबित होंगे जिस तरह उन्होंने यहां किया है। उन्होंने जिस तरह दोनों मैचों में 20-20 विकेट लिए हैं वह मेरे लिए इस दौरे की बेहद सकारात्मक चीज है। 

 

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Posted By: Sanjay Savern

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