आइपीएल के पिछले सत्र में कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) की टीम ने प्लेऑफ तक का सफर तय किया था जिसमें पीयूष चावला, कुलदीप यादव और सुनील नरेन की अहम भूमिका रही थी। एक बार फिर केकेआर की यह स्पिन तिकड़ी आगामी सत्र में कमाल करने की तैयारी में है। आइपीएल के 12वें संस्करण के लिए केकेआर की तैयारियों और रणनीतियों के बारे में पीयूष चावला से अभिषेक त्रिपाठी ने खास बातचीत की। पेश है उस बातचीत के प्रमुख अंश :

-नीलामी के बाद बनी केकेआर की नई टीम से नए सत्र में कैसी उम्मीदें रहेंगीं?

-देखिए, पिछले साल हमने जो टीम बनाई थी उसमें युवा और अनुभवी खिलाडि़यों का मिश्रण था। जिस संयोजन के साथ हमने टीम बनाई थी, उसकी वजह से टीम ने पिछले साल बहुत अच्छा प्रदर्शन भी किया और हम शीर्ष तीन टीमों में शुमार रहे। हम फाइनल भी खेल सकते थे लेकिन आइपीएल एक टी-20 क्रिकेट है जहां कुछेक गेंदों में खेल बदल जाता है। इस बार भी हमारी कुछ वैसी ही टीम है। हमने इस बार अपनी टीम में कुछ अच्छे तेज गेंदबाज जोड़े हैं जिसकी वजह से हमारी टीम का संयोजन अच्छा और मजबूत दिखाई दे रहा है।

-कहा जा रहा है कि विश्व कप को ध्यान में रखते हुए कई विदेशी खिलाड़ी बीच टूर्नामेंट को छोड़कर जा सकते हैं। क्या आपकी टीम ने ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए कोई प्लान बी बना रखा है ?

-अभी तो टूर्नामेंट शुरू होने जा रहा है। ऐसे में वह अभी बाद की बात है। उसके बारे में अभी ज्यादा सोचा नहीं है। हमारी टीम में जितने भी विदेशी खिलाड़ी हैं, उनमें से ज्यादातर टीम के साथ बने रहेंगे और बहुत कम हैं जो वापस जाएंगे। ऐसे में इसका हमें अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

-आपकी कप्तानी में कुलदीप उत्तर प्रदेश की टीम में खेल चुके हैं जो इस समय आपकी टीम में हैं। उनके अलावा नरेन भी केकेआर में शामिल हैं। आप तीनों के तालमेल के बारे में बताएं?

-हम तीनों का तालमेल बेहतरीन रहा है। पिछले सत्र में हम तीनों ने मिलकर 50 के आसपास विकेट हासिल किए थे। स्पिनर के हिसाब से आइपीएल में इतने विकेट हासिल करना बड़ी बात है। हमारे स्पिन विभाग का तालमेल बहुत संतुलित था जिसकी वजह से पिछले सत्र में हमारी टीम का प्रदर्शन निखरकर सामने आया। इस सत्र में भी हम कुछ वैसा ही कमाल करने की तैयारी में हैं। कुलदीप की बात करें तो मैं उसे काफी पहले से देख रहा हूं। जैसे-जैसे समय बीत रहा है वह ज्यादा अनुभवी होता जा रहा है। उसकी गेंदबाजी के कौशल में पहले से और पैनापन आता जा रहा है।

-अक्सर कहते हैं कि टीम में अगर दो या तीन अच्छे स्पिनर हों तो वे एक-दूसरे को अच्छी चुनौती देते हैं, लेकिन आप तीनों ने इस चुनौती को सकारात्मकता में कैसे बदला ?

-यह एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है। हमारी टीम के तीनों स्पिनर करीब-करीब हर मैच में एक साथ खेलते हैं। ऐसे में जो प्रतिस्पर्धा होती है वह एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है। टी-20 क्रिकेट ही नहीं, बल्कि किसी भी खेल में आपका हर दिन एक जैसा नहीं होता है। किसी दिन किसी एक का दिन खराब हो तो हम सुनिश्चित करते हैं कि बाकी के दो स्पिनरों या फिर दूसरे गेंदबाज उसकी भरपाई करें। अंत में जब आपका व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा होता है तो खुद-ब-खुद टीम का प्रदर्शन अच्छा हो जाता है।

-यूं तो आइपीएल को बल्लेबाजों का खेल कहते हैं, लेकिन नरेन जैसे गेंदबाजों से बल्लेबाज भी डरते हैं। आपने उनके साथ काफी समय बिताया है। नरेन के बारे में कुछ बताएं।

-सही बात है कि नरेन के चार ओवरों की गेंदबाजी के समय बल्लेबाज ज्यादा जोखिम नहीं उठाते हैं। इसका असर हमारी गेंदबाजी पर अच्छा होता है। जब उसके खिलाफ बल्लेबाज जोखिम नहीं उठाते तो वे मेरे या कुलदीप या फिर दूसरे तेज गेंदबाजों के खिलाफ जोखिम उठाने की कोशिश करते हैं। क्योंकि टी-20 एक छोटा प्रारूप है और अगर चार ओवर बिना रन के निकल गए तो उसका असर रन रेट पर पड़ता है। तब हम पर निर्भर करता है कि हम उस समय को एक मौके के रूप में लें। अगर हमने उसे मौके के रूप में लिया तो हमारे खिलाफ बल्लेबाज जोखिम उठाएगा और हमारे विकेट मिलने की संभावना ज्यादा हो जाएगी।

-पिछले साल दिनेश कार्तिक की अगुआई में आपकी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया। उनको केकेआर से कितना फायदा हुआ और क्या आप भी अपने लिए कुछ वैसे ही फायदे की उम्मीद कर रहे हैं?

-कार्तिक एक अनुभवी खिलाड़ी हैं। उन्होंने पहले भी अच्छा किया है और पिछले साल केकेआर के लिए और वापसी के बाद भारतीय टीम के लिए उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। जहां तक मेरी बात है तो मैं सिर्फ अभी प्रक्रिया पर ध्यान दे रहा हूं। मैं अभी नहीं सोच रहा कि आगे क्या होगा या फिर क्या होने वाला है। मैं जो अच्छा कर सकता हूं, बस वही कर सकता हूं। बाकी चीजों पर ध्यान देकर कोई फायदा नहीं। मैं दो कश्ती में सवार नहीं होना चाहता। जिन चीजों पर मेरा नियंत्रण नहीं है, उसके बारे में सोचकर कोई फायदा नहीं है।

-हाल में हुई ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद विश्व कप में भारत की संभावनाओं को कैसे देखते हैं ?

-इसमें कोई दो राय नहीं है कि हम सबसे प्रबल दावेदार हैं। अगर आप बल्लेबाजी और गेंदबाजी देखें तो हमारे पास ओवरऑल एक अच्छा टीम संयोजन है। किसी भी टीम के लिए अच्छा टीम संयोजन काफी मायने रखता है। ऐसे में मेरा मानना है कि हम एक प्रबल दावेदार हैं और भारतीय टीम कम से कम विश्व कप का फाइनल खेलेगी।

 

Posted By: Sanjay Savern

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