नईदुनिया, इंदौर। India vs Bangladesh first test match: बांग्लादेश की टीम विश्व क्रिकेट में तुलनात्मक रूप से कमजोर मानी जाती है, खासकर टेस्ट मैचों में। वैसे भी दुनिया में टेस्ट मैचों के प्रशंसक कम होते जा रहे हैं। मगर इंदौर में गुरुवार को नजारा कुछ और ही था। भारत और बांग्लादेश के बीच टेस्ट मैच के पहले दिन दर्शकों में जोश ऐसा था कि होलकर स्टेडियम के पास से गुजरने वालों को बाहर तक आवाजें सुनाई दे रही थीं।

बीते दिनों भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने सलाह दी थी कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की तरह भारत में भी पांच टेस्ट स्थलों का चयन कर वहीं मैच कराने चाहिए। अनुराग ठाकुर के बीसीसीआइ अध्यक्ष बनने के बाद छोटे स्थलों को भी टेस्ट सेंटर बनाने का फैसला हुआ था। तभी इंदौर सहित रांची, धर्मशाला, राजकोट जैसे शहरों को टेस्ट सेंटर का दर्जा मिला था।

शहर में जब भी कोई क्रिकेट मैच होता है, हर रास्ता मानो होलकर स्टेडियम की ओर जाता नजर आता है। यहां हर मैच को त्योहार की तरह मनाने की परंपरा सी है। रास्तों पर बाजार सजा था। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक, चेहरों पर तिरंगा बनवा रहे थे, भारतीय क्रिकेटरों के नाम लिखी टी-शर्ट खरीद रहे थे। गुरुवार को इंदौर के खेलप्रेमी पूरे उत्साह से स्टेडियम में मौजूद थे। हमेशा की तरह स्टेडियम खचाखच भले ही न भरा हो, लेकिन दूसरे शहरों में हुए मैचों की तुलना में भीड़ बहुत ज्यादा थी।

स्टेडियम में करीब साढ़े 11 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। इतनी भीड़ बीते दिनों बड़े शहरों में हुए टी-20 मैचों में भी नजर नहीं आई थी। इंदौरी दर्शकों का उत्साह ऐसा था कि हर गेंद के साथ शोर स्टेडियम के साथ बाहर तक गूंज रहा था। नजारा टी-20 मैच की तरह था। इसके साथ इंदौरी प्रशंसकों ने छोटे सेंटरों पर टेस्ट कराने का दावा और भी मजबूत कर दिया।

शुक्रवार के लगभग पूरे टिकट बिके : एमपीसीए सूत्रों के अनुसार शुक्रवार के सभी टिकट बिक चुके हैं। ऑन लाइन बिक्री में 13 हजार टिकट बिक चुके हैं, जबकि ऑफ लाइन बिक्री के तहत दिन विशेष के टिकट बिक रहे हैं। शुक्रवार को विराट की बल्लेबाजी देखने के लिए प्रशंसकों में भारी उत्साह है।

इस टेस्ट को लेकर टीम से स्पिनर आर अश्विन ने कहा कि 'इंदौर की जनता से पहले भी हर मैच में हमें जोरदार समर्थन मिला है। यहां हुए पिछले टेस्ट में भी सभी दिन हाउसफुल थे। यहां के लोग खेल को पसंद करते हैं। यहां इतने ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेले जाते और लोग हर लम्हें का लुत्फ उठाते हैं। भारत एक बड़ा देश है। जैसे हम बाहर जाते हैं तो हमें पता होता है कि हमें कहां खेलना है।

अधिकतर देशों में यह तय है कि टेस्ट कहां खेले जाने हैं, तो हमें वहां कि परिस्थितियां पता होती हैं कि पिच कैसी खेलेगी, रणनीति क्या होगी। ज्यादातर देशों में यह होता है, यदि भारत में भी ऐसा होता है तो अपवाद नहीं होगा। भारत में कई क्षेत्रों से खिलाड़ी आ रहे हैं और खेल के फैलाव के साथ ही हमारे देश में यह हर जगह खेला जा रहा है, जो एक अच्छी बात है। अलग-अलग जगह पर खेलने से खिलाडि़यों की मदद होगी, लेकिन ऐसा करना चाहिए या नहीं यह बोर्ड को तय करना है।'

Posted By: Sanjay Savern

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