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 लखनऊ, ऋषि मिश्र। वह 19 जनवरी, 1994 की सर्द-धुंधली सुबह थी। सुबह के 11:00 बजने वाले थे लेकिन, कोहरे और बादलों की ओट से सूर्य देव ने दर्शन नहीं दिये थे। 15 मिनट ही बीते थे कि अचानक आसमान खुला और उजाला छा गया। केडी सिंह बाबू स्टेडियम की हरी घास धूप की रोशनी में खिल उठी। हजारों लोगों के शोर के बीच क्रिकेट का भगवान सचिन तेंदुलकर पिच पर पहुंचे और उनके सामने थे तेज गेंदबाज पी. विक्रमसिंघे। भारत और श्रीलंका के बीच इस श्रृंखला के पहले टेस्ट का ये दूसरा दिन था। पहले ही ओवर की चार गेंदों को सचिन ने सीमा रेखा के बाहर पहुंचाया और दर्शक जोश में सचिन के दीवाने हो गए।

लखनऊ की धरती पर 1952 के बाद ये दूसरा टेस्ट क्रिकेट मैच खेला जा रहा था। यह मैच लखनऊ में खेला गया आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच भी साबित हुआ। मैच 18 से 22 जनवरी, 1994 के बीच खेला गया था। इसमें न केवल नवजोत सिद्धू और सचिन तेंदुलकर ने शानदार शतक जमाए थे, बल्कि अनिल कुंबले ने दोनों पारियों में 11 विकेट लेकर चार दिन के भीतर भारतीय जीत की इबारत भी लिख दी थी।

भारत ने पहले बल्लेबाजी की थी और दो दिन तक विकेट पर टिक कर 511 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसमें सिद्धू ने नौ चौकों और आठ छक्कों की मदद से 124 और सचिन तेंदुलकर ने 22 चौके लगाते हुए 142 रन बनाए थे। संजय मांजरेकर 61 के अलावा कपिल देव ने 42 और नयन मोगिया ने 44 रन की पारी खेली थी। 

जवाब में श्रीलंका रोशन महानामा और दलीप समरवीरा की पहले विकेट के लिए 120 रन की साझेदारी के बाद श्रीलंका की टीम 218 रन के स्कोर पर आउट हो गई। दूसरी पारी में भारत ने फालोआन खिलाया और इस बार श्रीलंका 174 रन पर आउट हुई और मैच चौथे ही दिन एक पारी और 119 रन से हार गई।

सिद्धू ने बनाया रिकार्ड अब तक कायम

नवजोत सिंह सिद्धू ने उस मुकाबले किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा सबसे अधिक छक्के मारने का रिकार्ड बनाया था। क्रिकेट प्रेमियों को ये मैच नवजोत सिंह सिद्धू के छक्कों के लिए याद है। उन्होंने कुल आठ छक्के मारे थे, जो अब तक भारतीय बल्लेबाज का रिकार्ड है। इनमें से सात उन्होंने मुरलीधरन के पर मारे थे।

पिछले साल हार्दिक पांड्या ने श्रीलंका के ही खिलाफ पाल्लेकल में सात छक्के मारे थे। पूर्व क्रिकेटर मुकेश अग्रवाल बताते हैं कि बहुत ही शानदार मैच था। भारत ने हर क्षेत्र में बेहतरीन खेल दिखाया था।

कुंबले के सामने नहीं टिक सके थे लंकाई

अनिल कुंबले ने पहली पारी में चार और दूसरी में सात विकेट झटके थे। कुंबले के सामने कोई भी लंकाई संभल कर नहीं खेल सका और एक एक कर के आउट होते गए। राजेश चौहान और वेंकटपति राजू ने भी बेहतरीन गेंदबाजी की थी।

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Posted By: Lakshya Sharma

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