आतंकी हमले, हिंसा और हड़तालों के बीच निखरे आकिब नबी डार, अब टीम इंडिया के लिए बल्लेबाजों की उड़ाएंगे गिल्लियां
बारामुला के आकिब नबी डार ने कश्मीर के चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाई है। ...और पढ़ें

आकिब नबी डार

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, बारामुला। कश्मीर के बारामुला जिले के छोटे से गांव शेरी का आकिब नबी भारतीय क्रिकेट में चमक बिखरने को तैयार है, लेकिन इसके पीछे हर क्रिकेटर की तरह उनकी क्रिकेट के प्रति दीवानगी भी संघर्ष भरी है। यह उस जुझारु लड़के की कहानी है जिसने बचपन में कर्फ्यू, हड़ताल और आतंकी हिंसा के बीच घर के आंगन में एक कुर्सी को विकेट मानकर घंटों गेंदबाजी की।
आकिब के लिए क्रिकेट के रास्ते पर चलना कभी भी आसान नहीं था। कई बार तो उसे मैच खेलने के लिए जूते तक दोस्तों से लेने पड़े। पिता गुलाम नबी डार चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन आकिब के दिलो-दिमाग में सिर्फ क्रिकेट बसा था। उनका सुबह से शाम तक का वक्त केवल गेंद और बल्ले के बीच गुजरता था। कश्मीर के हालात ठीक नहीं होने के कारण परिवार भी उसके भविष्य को लेकर चिंतित रहता।
खिड़की से कूदकर क्रिकेट खेलने जाते थे आकिब
पिता से कभी डांट तो कभी पिटाई तो कई बार कमरे में बंद कर दिया जाता, लेकिन वह खिड़की से कूदकर टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने चले जाते। एक बार जब वह पहली बार क्रिकेट खेलने श्रीनगर से जम्मू पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि तेज गेंदबाजों को स्पाइक्स वाले जूते पहनने होते हैं, जो उनके पास नहीं थे।
जूते के लिए दोस्तों से उधार लिए पैसे
दोस्तों से जूते उधार लेकर आकिब ने मैच खेला। धीरे-धीरे पिता भी जानने लगे कि बेटा अपना भविष्य खेल में संवारना चाहता है इसलिए उन्हें झुकना पड़ा। आकिब के जीवन की सबसे भावुक और प्रेरणादायक यादें उन दिनों की हैं जब बारामुला में लंबा कर्फ्यू लगा रहता था। खेल के मैदान पूरी तरह बंद थे, लेकिन उस युवा के सपने नहीं रुके।
उनके पिता ने उनके अभ्यास के लिए घर के छोटे से आंगन में ही अस्थायी नेट लगवा दिया और मैदान न मिलने पर एक पुरानी कुर्सी को ही बल्लेबाज मानकर आकिब घंटों लगातार गेंदबाजी करते रहते थे। ढलती शाम तक वह लाइन और लेंथ को निखारने में जुटे रहते थे। बेहतर सुविधाओं की तलाश में उन्हें कई बार रोज 60 किलोमीटर का सफर तय करके श्रीनगर तक अभ्यास करने जाना पड़ता था।
आकिब ने 2015 में खेला अंडर-19 टीम
आज कश्मीर में उन्हें बारामुला एक्सप्रेस और नार्थ कश्मीर एक्सप्रेस के नाम से जाना जाने लगा। आकिब की इस अथक मेहनत का असर साल 2015 में पहली बार देखने को मिला, जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर की अंडर-19 टीम से अपना पदार्पण किया। भारतीय टेस्ट टीम में चयन होने पर आकिब ने कहा, "टेस्ट टीम में चयन होना सपना सच होने जैसा है। मुझ पर दिखाए गए भरोसे को सही साबित करने और भारत का झंडा बुलंद रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। सफलता का श्रेय जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को जाता है।"
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