कोलकाता। भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने अपने ही अंदाज में इशारों-इशारों में टीम इंडिया के नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और भारतीय चयनकर्ताओं पर निशाने साधते हुए उन पर सवाल उठा डाले हैं। गांगुली ने इसके लिए जिस खिलाड़ी को जरिया बनाया वो हैं हरभजन सिंह। दादा ने ऐसा क्या कहा आइए जानते हैं।

यह किसी से छुपा नहीं है कि गांगुली हमेशा से ही स्पिनर हरभजन सिंह के समर्थन में खड़े रहे हैं और अब जब भज्जी लंबे समय से टीम से बाहर हैं तो भला दादा कैसे शांत रहते। दादा ने धौनी व चयनकर्ताओं पर निशाने साधते हुए साफ तौर पर कहा कि चयनकर्ता धौनी की पसंद के आगे कुछ सोचते ही नहीं हैं। गांगुली ने कहा, 'मेरा मानना है कि भज्जी दोनों प्रारूपों में राष्ट्रीय टीम में वापसी कर सकते हैं। मुझे लगता है कि चयनकर्ता इस (भज्जी के सेलेक्शन) बारे में ज्यादा सोचते ही नहीं हैं और खासतौर पर जब कप्तान के पसंदीदा खिलाड़ी आसपास मौजूद हों।'

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गांगुली ने टीम इंडिया में भज्जी व प्रज्ञान ओझा जैसे स्पिनरों की जगह अमित मिश्रा को टीम में चुनने पर सवाल खड़े किए और कप्तान व चयनकर्ताओं को आड़े हाथों लिया। गांगुली ने कहा, 'वो (अमित मिश्रा) हवा में काफी धीमी गेंदें फेंकता है जिससे बल्लेबाजों को उसकी गेंदें पढ़ने में आसानी होती है। आप याद कर सकते हैं कि कैसे (शेन) वॉटसन ने पिछले साल अक्टूबर में नागपुर मैच में उनकी (मिश्रा) की गेंदों को निशाना बनाया था। अमित की फील्डिंग भी कुछ खास नहीं है। मुझे नहीं लगता कि वो (मिश्रा) टीम में कुछ ज्यादा फर्क पैदा कर सकेंगे क्योंकि वहां (एशिया कप) सारी टीमें उपमहाद्वीप की ही हैं और सपाट विकेट पर वो स्पिनर्स को आसानी से खेलना जानते हैं। मुझे हैरानी है इस बात से कि कैसे भज्जी और ओझा को टीम से बाहर रखा हुआ है।' हरभजन सिंह ने आखिरी टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मार्च 2013 में खेला था जबकि आखिरी वनडे मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ 11 जून 2011 को खेला था। इस बार के रणजी सत्र में भज्जी ने छह मैच खेले जिस दौरान उन्होंने 26.60 की औसत से 23 विकेट झटके और कुछ मौकों पर अपने बल्ले से भी जलवा बिखेरा।

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