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रणजी ट्रॉफी का सीजन शुरू होने में बचे केवल 10 दिन, 'भगवान भरोसे' दिल्‍ली क्रिकेट टीम का सेलेक्‍शन; कैसे जीत पाएंगे खिताब?

By Lokesh SharmaEdited By: Abhishek Nigam
Published: Fri, 02 Oct 2026 06:00 AM (IST)

दिल्‍ली क्रिकेट टीम ने आखिरी बार 2007-08 में रणजी ट्रॉफी खिताब जीता था। इस बार टीम का चयन ही नहीं ...और पढ़ें

दिल्‍ली क्रिकेट टीम

दिल्‍ली क्रिकेट टीम

HighLights

  1. खिलाड़ियों का अभी तक फिटनेस (यो-यो) टेस्ट तक नहीं कराया गया

  2. 11 अक्टूबर को ईडन गार्डन में खेलना है दिल्ली को पहला मुकाबला

  3. नौ अक्टूबर को टीम होगी कोलकाता रवाना

लोकेश शर्मा, जागरण नई दिल्ली। रणजी ट्रॉफी का 2027-28 सीजन शुरु होने में केवल 10 दिन बाकी हैं, लेकिन दिल्ली क्रिकेट की तैयारियां अभी तक पटरी पर नहीं आई हैं। खिलाड़ियों के चयन से लेकर कैंप और फिटनेस टेस्ट तक तस्वीर साफ नहीं है।

ऐसे में दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के पदाधिकारी हर साल की तरह खिताब जीतने का सपना तो देख रहे हैं, लेकिन मैदान पर उतरने से पहले ही तैयारियों की पोल खुलती नजर आ रही है। टीम का चयन और खिलाड़ियों की फिटनेस (यो-यो टेस्ट) जांच तक पूरी नहीं हुई । खिलाड़ियों का चयन और आपसी तालमेल भगवान भरोसे नजर आ रहा है।

टीम की तैयारी पर असर

दिल्ली को 11 अक्टूबर से बंगाल के खिलाफ ईडन गार्डन में घरेलू रणजी मुकाबले से अभियान शुरू करना है और नौ अक्टूबर को टीम कोलकाता होगी रवाना। इसके बावजूद अभी तक टीम की घोषणा नहीं हुई है। खिलाड़ियों का यो-यो टेस्ट भी नहीं कराया गया है। चयन प्रक्रिया में देरी का सीधा असर टीम की तैयारी पर पड़ सकता है।

हर सत्र में डीडीसीए की ओर से खिताब जीतने के दावे किए जाते हैं, लेकिन चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और पसंदीदा खिलाड़ियों को लेकर उठने वाले सवाल इन दावों पर भारी पड़ते हैं।

सहवाग के बेटे का नाम शामिल

अंडर-19 वर्ग में हालांकि यो-यो टेस्ट कराया गया है। शुरुआत में 167 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। डीडीसीए के कुछ सदस्यों की ओर से इतनी बड़ी सूची पर आपत्ति जताए जाने के बाद इसे घटाकर 69 खिलाड़ियों तक कर दिया गया। इनमें 12 खिलाड़ी यो-यो टेस्ट में फेल हुए हैं। इनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग के बेटे वेदांत सहवाग का नाम भी शामिल है।

वहीं, अंडर-23 वर्ग में अंकित राजेश के दो बार यो-यो टेस्ट में फेल होने के बावजूद शॉर्टलिस्ट किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली क्रिकेट के लिए यह स्थिति नई नहीं है। वर्ष 2007-08 में गौतम गंभीर की कप्तानी में आखिरी बार दिल्ली ने रणजी खिताब जीता था।

डीडीसीए क्‍यों है खामोश?

इसके बाद लंबे समय में टीम केवल एक बार फाइनल तक पहुंच सकी और 2017-18 सत्र में विदर्भ से हार गई। ऐसे में यदि मैच से सिर्फ 10 दिन पहले तक चयन प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है, तो बेहतर परिणाम की उम्मीद पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस मामले में डीडीसीए के सचिव अशोक शर्मा से कॉल और मैसेज पर जानकारी मांगी गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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