नई दिल्ली,  जागरण न्यूज नेटवर्क। आइसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के अंक प्रणाली में हुए बदलाव का भारतीय क्रिकेट टीम पर खराब असर पड़ सकता है। पहले की प्रणाली की माने तो पूरे नहीं हो सके मैच में दोनों टीम अंक बांटती थी, लेकिन अब नए अंक प्रणाली में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल सबसे ज्यादा मैच खेले जानी टीम का होगा। यही वजह है कि अब टीम इंडिया अंक तालिका में दूसरे नंबर पर आ गई है।

जब से टेस्ट चैंपियनशिप का सर्किल शुरू हुआ है, भारतीय टीम ने चार में से तीन टेस्ट सीरीज जीती हैं। टीम 360 अंक लेकर शीर्ष पर थी, जबकि उन्हें अभी दो टेस्ट सीरीज और खेलनी थी, लेकिन अब टीम इंडिया नियम बदलने के बाद अगले वर्ष जून में होने वाले टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश करने से चूक सकती है।

भारत को चार टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में और चार टेस्ट इंग्लैंड के खिलाफ भारत में खेलने है। अगर भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में सीरीज नहीं जीतती है तो उनके फाइनल में पहुंचने की संभावना कम हो जाएगी। जबकि अब से पहले तक भारतीय टीम फाइनल खेलने के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में थी।

भारत और बीसीसीआइ का समर्थन करने वालों ने कहा कि आगे क्या होगा यह कहना मुश्किल है, लेकिन दो वर्ष की सर्किल के बीच में ही नियमों का बदलाव करना गलत है। भारतीय क्रिकेट से जुड़े लोग अपने ही लोगों को इसका दोष दे रहे हैं, जिन्होंने कमेटी और बोर्ड का हिस्सा रहते इन बदलावों को हरी झंडी दी।

पूर्व भारतीय कप्तान और कोच अनिल कुंबले आइसीसी क्रिकेट समिति के चेयरमैन हैं। समिति ने ही इस बदलाव का प्रस्ताव रखा था। वहीं पूर्व भारतीय कप्तान और राष्टीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के निदेशक राहुल द्रविड़ भी इस समिति के सदस्य हैं। पूर्व भारतीय कप्तान और अब बीसीसीआइ अध्यक्ष सौरव गांगुली आइसीसी बोर्ड में भारत के प्रतिनिधित्वकर्ता हैं, जिन्होंने इन बदलावों का प्रस्ताव रखा।

भारतीय क्रिकेट से जुड़े लोगों ने कहा कि चैंपियनशिप के बीच में नियम बदलने की क्या जरूरत थी? नियमों को बदलने की चाहे जो वजह रही हो, आप टूर्नामेंट के बीच में नियम कैसे बदल सकते हो या क्यों नहीं अगले टूर्नामेंट में इन नियमों को लागू किया जाता। आइसीसी को या तो इंतजार करना चाहिए था या अगले सíकल में यह नया नियम लाया जाता या टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल को स्थगित कर दिया जाता। इससे कोविड-19 की वजह से जो टेस्ट सीरीज नहीं हुई, उन्हें होने का मौका मिल जाता।

वहीं, समिति से जुड़ें लोगों ने कहा कि फाइनल का कार्यक्रम बदला नहीं जा सकता था क्योंकि अगर यह होता तो अगली दो चैंपियनशिप का कार्यक्रम भी इससे प्रभावित हो जाता। अगर यही मामला है कि कार्यक्रम बदला नहीं जा सकता था तो नियम अब बदलने की क्या जरूरत थी? इन बदलावों पर नजर रखने वालों ने कहा कि अगर कोई टीम दो वर्ष की सर्किल में अपनी रणनीतियों पर काम कर रही होती है, तो कैसे वह अपने दिमाग में ला सकती हैं कि एक साल बाद महामारी होगी जिससे अंक प्रणाली पूरी तरह से बदल जाएगी और यह उनकी टीम के विरूद्ध जा सकता है।

रिकॉर्ड में, कोरोना के कारण चार से ज्यादा द्विपक्षीय सीरीज प्रभावित नहीं हुई है और सूत्रों ने कहा कि इन सीरीज को दोबारा से कराया जा सकता था। बीसीसीआइ से जुड़े सूत्र ने कहा कि हमने उनसे कहा था कि यह गलत है बीच में नियम नहीं बदले जा सकते हैं। कोरोना की वजह से कितनी सीरीज प्रभावित हुई हैं? तीन? चार? और कौन सी टीम है जो इससे प्रभावित हो गई? साधारण तौर पर, बात यह है कि आइसीसी बोर्ड को इन नए नियम को मंजूरी देने में कोई समस्य नहीं थी, यही सच है, लेकिन क्रिकेट समिति को तो इस बारे में सोचना चाहिए था। आइसीसी बोर्ड ने सही प्रक्रिया अपनाई है, लेकिन जो इन बदलावों का समर्थन नहीं करते, उनका कहना है कि एक भारतीय के नेतृत्व वाली क्रिकेट समिति ने इस पर ज्यादा विचार नहीं किया।

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