अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) की अध्यक्षता वाली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) की नई टीम के सामने भ्रष्टाचार के मामले आने लगे हैं और अब देखना यह है कि यह नई टीम उस पर कार्रवाई करती है या विनोद राय के नेतृत्व वाली प्रशासकों की समिति (सीओए) की तरह ही यह सब होने देती है। बीसीसीआइ के एक अधिकारी ने मयंक पारिख पर सीओए के दोहरे रवैये के बाद राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोचों की नियुक्तियां पर सवाल खड़े किए हैं।

अधिकारी ने गांगुली को पत्र लिखा है कि सभी को पता था कि राहुल द्रविड़ एनसीए के प्रमुख बनने जा रहे हैं और उसको ध्यान में रखकर शंकर बासू (भारतीय टीम के पूर्व स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच) के नजदीकी व्यक्तियों की एनसीए में स्ट्रेंथ एवं कंडिशनिंग कोचों के तौर पर नियुक्तियां को लेकर धक्का-मुक्की की गई। द्रविड़ के प्रमुख बनने के बाद बासू या फिर बीसीसीआइ में मौजूद दूसरे प्रभावशाली लोगों के लिए अपने पसंदीदा व्यक्तियों को एनसीए में नियुक्त करना मुश्किल होता।

बीसीसीआइ ने स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच के पदों के विज्ञापन में एक से अधिक बदलाव कर अपनी पसंद के उम्मीदवारों को सूचीबद्ध किया था। विराट कोहली के करीबी और अब उनकी कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच बासू के करीबी लोगों को एनसीए में नियुक्त किया जा सके इसके लिए पहले आयु सीमा में बदलाव किया गया, फिर केवल भारतीय नागरिकों के लिए यह आवेदन रखा गया। यहां सवाल यह है कि बीसीसीआइ की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन डालने से पहले क्यों नहीं इसको लेकर पहले से तैयारियां की गई।

यह स्पष्ट रूप से बताता है कि उम्मीदवार पहले से ही तय कर लिए गए थे और एनसीए के पदों के लिए होने वाली साक्षात्कार प्रक्रिया केवल आंखों में धूल झोंकने के लिए आयोजित की गई। जिनके पास 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया था और बासू के नजदीकी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई थी। सभी चार उम्मीदवारों, हर्ष, विद्या सागर, नरेश रामदोस और रामकृष्ण के बासु से नजदीकी संबंध रहे हैं। सभी चार का कुल अनुभव रणजी टीमों के लिए काम करने वाले स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच के दूसरे प्रतिभागियों की तुलना में बहुत कम था लेकिन बाकी लोगों ने आवेदन नहीं किया क्योंकि उन्हें परिणाम पता था।

अधिकारी ने कहा कि बीसीसीआइ ने नियुक्ति प्रक्रिया के लिए रणदीप मोइत्रा और निशा वर्मा को नियुक्त किया था और ये दोनों लंबे समय से क्रिकेट से नहीं जुड़े हुए हैं। निशा वर्मा ने खुद इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें क्रिकेट या क्रिकेटरों के साथ काम करने का कोई अनुभव नहीं था। स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच के साक्षात्कार के समय एनसीए से कोई भी मौजूद नहीं था।

इस पत्र में आगे लिखा है कि 23 अक्टूबर को सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली बीसीसीआइ ने पदभार ग्रहण कर लिया है। बोर्ड के वर्तमान पदाधिकारियों को निश्चित रूप से यह सवाल पूछना चाहिए कि मोइत्रा और वर्मा की नियुक्ति पर फैसला किसने किया। स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच की नियुक्तियों पर ही नहीं बल्कि फरवरी 2017 के बाद से हुई तमाम नियुक्तियों की जांच की जाने की जरूरत है। यदि पदाधिकारियों का वर्तमान समूह इस मुद्दे को हल करने में विफल रहता है, तो क्रिकेट के चहेते देश में लोगों का गांगुली और उनकी टीम के ऊपर से भरोसा उठ जाएगा। साथ ही अधिकारी ने इस पत्र में एनसीए के सीओओ तूफान घोष के भारतीय टीम प्रबंधन से मुलाकात के लिए ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करने पर सवाल उठाए हैं।

इस पत्र में लिखा है कि तूफान नियुक्ति के बाद किसकी अनुमति से ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर गए? इस पत्र में आरोप लगाए गए हैं कि जानकारी के अनुसार तूफान की टीम प्रबंधन से मुलाकात हुई ही नहीं। क्या टीम प्रबंधन को एनसीए के सीओओ की यात्रा के उद्देश्य के बारे में पता था। क्या टीम प्रबंधन बैठक के लिए तैयार था और क्या वह बैठक हुई थी? यदि हां, तो बैठक का परिणाम क्या था? यदि नहीं, तो उसकी यात्रा पर होने वाले भारी खर्च को कैसे जायज ठहराया जा सकता है? जब ऑस्ट्रेलिया दौरे से भारतीय टीम वापस स्वदेश आने वाली थी ऐसे में एनसीए के सीओओ को जल्दबाजी में टीम प्रबंधन से बैठक करने के लिए ऑस्ट्रेलिया भेजने का क्या मकसद था? गांगुली को इन सब चीजों की जांच करानी चाहिए।

Posted By: Sanjay Savern

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