भारतीय टीम इस समय इंग्लैंड में है और उसे पहले टेस्ट में पराजय का सामना करना पड़ा। पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 0-1 से पिछड़ने के बाद विराट कोहली की कप्तानी और टीम पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि विराट ने पहले टेस्ट में एक शतक और एक अर्धशतक के दम पर 200 रन बनाए। एमआरएफ पेस फाउंडेशन के कार्यक्रम के तहत लाहिली स्टेडियम में हरियाणा के खिलाडि़यों को तेज गेंदबाजी के गुर सिखाने आए ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा से अभिषेक त्रिपाठी ने इन्हीं मुद्दों पर विशेष बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश-

-विराट को दुनिया का महान बल्लेबाज कहा जा रहा है। अगर आप उनके सामने गेंदबाजी करते तो आपकी योजना क्या होती?

-ये कठिन है। वह विश्व स्तरीय बल्लेबाज हैं। उनकी कमजोरी ढूंढ़ना आसान नहीं है। मैं उनके खिलाफ वही करता जो मैं सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा के खिलाफ करता था। उनके खिलाफ सही एरिया में अच्छी गेंदबाजी करना ही अहम होगा। उन्हें ज्यादा रन नहीं देता और दबाव बनाता। विराट रन बनाना पसंद करते हैं और दिमागी तौर पर मजबूत है। उन्हें चैलेंज लेना पसंद हैं। अगर गेंदबाज लगातार एक ही एरिया पर अच्छी गेंदबाजी करके बल्लेबाज पर दबाव बनाता है तो विकेट लेना आसान हो जाता है।

-2014 में विराट इंग्लैंड में 150 रन भी नहीं बना पाए थे लेकिन एजबेस्टन में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। भारतीय कप्तान में क्या बदलाव देख रहे हैं?

-मैंने पहले टेस्ट में उनकी पारी नहीं देखी इसलिए बता नहीं सकता कि उन्होंने वाकई में कैसे खेला। इतना तय है कि उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा है। अगर दूसरी या तीसरी स्लिप पर उनका कैच नहीं छूटा होता तो बहुत फर्क पड़ जाता। भाग्य ने उनका साथ दिया। पिछले दौरे पर उन्हें एंडरसन की स्विंग खेलने में काफी दिक्कत हुई थी। अब पिच कुछ सूखी नजर आ रह हैं और विराट ने भी काफी अनुभव हासिल किया है। आप सर्वश्रेष्ठ तभी बनते हैं जब इतिहास से सीखते हैं।

-भारत को दूसरा टेस्ट मैच लॉ‌र्ड्स में खेलना है। यहां का स्लोप और इतिहास शानदार है। क्या सलाह देंगे?

-लॉर्‌र्ड्स बहुत विशेष है। वह क्रिकेट का घर है। वहां स्लोप पूरे मैदान में दिखाई देता है। इंग्लैंड का दौरा करने वाली हर टीम वहां पर बेहतर करके जीतना चाहती है। मेरे हिसाब से वहां पर ऑफ साइड स्टंप के कुछ बाहर गेंद रखकर बल्लेबाजों को परेशान किया जा सकता है। ऐसे में बल्लेबाज को समझ में नही आएगा कि गेंद को खेलें या छोड़ें। लॉ‌र्ड्स में गेंदबाजों को नेचुरल वेरियेशन मिलता है। इंग्लिश कंडीशन में ड्यूक गेंद से सही एरिया पर गेंद फेंकने में अलग ही मजा है। लॉ‌र्ड्स में अगर मेंबर्स एंड से गेंदबाजी करते हैं तो स्लोप बायें से दायें होता है जब मीडिया एंड से गेंदबाजी करते हैं तो ये दायें से बायें रहता है। मुझे लगता है कि इशांत को मेंबर्स एंड से गेंदबाजी करनी चाहिए जिससे गेंद बाहर से अंदर की तरफ आएगी। इशांत वेसे भी इन स्विंग करने में माहिर हैं।

-क्या इशांत अपना रोल सही से निभा पाए हैं?

-अगर आप भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में एक ही लेंथ से गेंदबाजी करते हो तो आप सफल नहीं हो सकते। इंग्लैंड में गेंद स्विंग लेती है और आपको उसे थोड़ा आगे टिप्पा खिलाना होगा। ऐसे में ससेक्स के लिए खेलने से उन्हें फायदा मिला है। जब इशांत ने शुरुआत की थी, तो अपनी तेजी से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। वह अब शायद उसी तेजी से गेंदबाजी नहीं कर रहा है, लेकिन अब वह अधिक अनुभवी गेंदबाज है जिसका अपनी गेंदों पर अच्छा नियंत्रण है। एजबेस्टन टेस्ट में दिखा कि इशांत ने परिस्थितियों से बेहतर सामंजस्य बिठाना शुरू कर दिया है। उपमहाद्वीप के विकेटों पर ज्यादा खेलने के कारण संभवत: इशांत का रिकॉर्ड प्रभावशाली नहीं है। उन्होंने 83 टेस्ट मैचों में केवल 244 विकेट निकाले हैं। मुझे लगता है कि भारत में अधिकतर पिचों पर खेलना आसान नहीं है। संभवत: उन्हें अधिक स्पेल करने का मौका नहीं मिला। उन्हें एक अग्रणी गेंदबाज के बजाय कामगार की तरह अधिक उपयोग किया गया। मुझे लगता है कि उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वह किस भूमिका में फिट बैठते हैं।

-बाकी चार टेस्ट मैचों में भारतीय गेंदबाजों को कैसी गेंदबाजी करनी चाहिए?

-आपको सीम के सहारे गेंद को पिच कराना होगा और पिच से मिलने वाले मूवमेंट से मदद मिलेगी। मेरा मुख्य हथियार उछाल और थोड़ा सीम मूवमेंट थे। मेरे मामले में वॉर्न, ब्रेट ली और जेसन गिलेस्पी दूसरे छोर से गेंदबाजी करके दबाव बनाते थे।

-आपने अपने करियर के अधिकतर समय अपनी तेजी को कैसे बरकरार रखा?

-मेरा गेंदबाजी एक्शन बहुत आसान और तनावरहित था। मैं बहुत आक्रामक नहीं था। मेरी हड्डियां काफी मजबूत हैं। यह वंशानुगत है। इसके अलावा जब मैं गेंदबाजी करता था तो उसके बाद खुद को तरोताजा करने के लिए जिम में हल्की एक्सरसाइज करता था और अगले दिन सुबह तैराकी करता था। इससे मुझे काफी मदद मिलती थी। तेज गेंदबाज की जिंदगी काफी कठिन और तनावपूर्ण होती है। कुछ लोग इसे अच्छी तरीके से लेते हैं तो कुछ ऐसा नहीं कर पाते हैं।

Posted By: Sanjay Savern