(गावस्कर का कॉलम)

भारत पर जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया है, जहां उसका मुकाबला सहमेजबान न्यूजीलैंड से होगा। यह लगातार दूसरी बार है जब विश्व कप के दो मेजबान देश फाइनल में आमने-सामने होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यूजीलैंड 'बड़े भाई' ऑस्ट्रेलिया को हराने में सफल होगा। 2011 विश्व कप में भारत के खिलाफ श्रीलंका हालांकि ऐसा नहीं कर सका था।

ऑस्ट्रेलिया की तुलना में भारत के लिए टॉस हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। माइकल क्लार्क ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। फाइनल में जगह पक्की करने के लिए भारत को इस मैच में कंगारू टीम को 300 रन के अंदर रोकना चाहिए था। मिशेल जॉनसन का तेजी से बल्लेबाजी करते हुए नौ गेंद पर 27 रन बनाना भारत के लिए महंगा साबित हो गया। जॉनसन के इस अहम योगदान से ऑस्ट्रेलिया मजबूत स्थिति में पहुंच गया और यह स्कोर विश्व कप के सेमीफाइनल मैच में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम कभी हासिल नहीं कर सकी है। जॉनसन से पहले स्टीवन स्मिथ और इस विश्व कप में अब तक फ्लाप रहे एरोन फिंच ने समझदारी से बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम को मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। दोनों बल्लेबाजों की बदौलत भारत मैच में जल्दी विकेट हासिल नहीं कर सका। इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप के उद्घाटन मैच में शतक को छोड़कर फिंच ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी अर्धशतक तक नहीं लगाया था। स्मिथ के शतक पूरा करने के बाद फिंच ने तेज से रन बटोरे। जॉनसन के बल्लेबाजी के लिए पिच पर आने से पहले हालांकि ऑस्ट्रेलिया का यह स्कोर नाकाफी माना जा रहा था।

दूसरी ओर, भारतीय टीम को सलामी बल्लेबाजों से शतकीय साझेदारी की जरूरत थी और धवन के धैर्य खोने से पहले ऐसा होते भी दिख रहा था। धवन ने जो शॉट खेला शायद उस वक्त उसकी जरूरत नहीं थी। फिर कोहली, जिन पर बहुत कुछ निर्भर था, ने बिना क्रीज पर ज्यादा वक्त बिताए और बाउंस से वाकिफ हुए पुल शॉट खेलने की गलती की। यह खराब शॉट था। रहाणे और धौनी के बीच साझेदारी हुई, लेकिन यह काफी नहीं थी। रहाणे ने एक बार फिर निराशाजनक शॉट खेलते हुए विकेटकीपर के हाथों में गेंद थमा दिया। धौनी इसके बाद समझ गए कि अब सब कुछ उनके ऊपर आकर टिक गया है। सिडनी में इससे पहले टेस्ट मैच में रैना अच्छा नहीं कर पाए थे और कभी-कभार ऐसी बातें दिमाग में ठहर जाती हैं।

आखिर में बेहतर टीम जीती, लेकिन भारत ने अपना मौका हवा में उड़ा दिया। यह टीम युवा थी और इनके पास ज्यादा अनुभव नहीं था, जैसा की पिछली बार खिताब जीतने वाली टीम के पास था। टूर्नामेंट में टीम का प्रदर्शन सराहनीय प्रदर्शन रहा, लेकिन अंतिम परिणाम निराशाजनक रहा।

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Posted By: sanjay savern

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