सुनील गावस्कर का कॉलम:

सनराइजर्स हैदराबाद इस समय अद्भुत फॉर्म में है। वे छोटे स्कोर का बचाव कर रहे हैं और दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ मैच में उन्होंने दिखा दिया कि वे लक्ष्य का पीछा करके भी मैच जीत सकते हैं। यह किसी भी तरह से विशाल लक्ष्य नहीं था, क्योंकि उन्हें आठ रन प्रति ओवर से थोड़ा ज्यादा के रन रेट से रन बनाने थे। मगर सनराइजर्स ने दिखा दिया कि अगर रनरेट ज्यादा भी हो तो भी वे मैच जीत सकते हैं। उनके कप्तान केन विलियमसन गोंद की तरह पूरी टीम को एक साथ जोड़े हुए हैं। पिछले सत्र में वह काफी मैच नहीं खेल सके थे क्योंकि सिर्फ चार विदेशी खिलाड़ी ही मैच में खेल सकते हैं और उस समय टीम के कप्तान डेविड वार्नर बल्लेबाजी के लिए पहली पसंद थे। इस साल वार्नर नहीं हैं और कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी को अच्छे से संभालते हुए न्यूजीलैंड के इस कप्तान ने अपने खेल के स्तर को काफी ऊंचा उठा लिया है। साथ ही उन्होंने यह साबित कर दिया है कि बल्लेबाज सिर्फ आक्रामक शॉट खेलकर ही रन नहीं बनाता है और उसके खेल में निरंतरता होनी भी जरूरी है। विलियमसन की एक और खास बात है कि वह मुश्किल स्थितियों में भी बेहद शांत रहते हैं। वह इस मामले में महेंद्र सिंह धौनी की तरह हैं, जो खुद कूल रहकर पूरी टीम को कूल रखते हैं।

हालांकि, उनका क्वालीफाई करना अब लगभग पक्का ही है, लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए हर मैच जीतना होगा। चेन्नई के खिलाफ खराब स्कोर बनाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं क्योंकि इससे उनका रनरेट भी प्रभावित होगा। एक बार फिर से उनके फील्डरों ने निराश किया और आसान से कैच टपकाए। इसके चलते चेन्नई ने एक ओवर पहले ही मैच जीत लिया। जिस ढंग की गेंदबाजी उनके पास है, उसे देखते हुए उन्हें हर मैच में कम से कम 180 रन बनाने चाहिए। पिछले साल उनकी गेंदबाजी बहुत अच्छी नहीं थी। इस साल उमेश यादव और चहल अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बचाने के लिए अच्छा स्कोर नहीं मिल रहा है। सनराइजर्स जीत के सिलसिले को बरकरार रखना चाहेगी। देखना होगा कि क्या बेंगलूर के लड़के उनके लिए स्पीड ब्रेकर बन पाते हैं। 

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By Sanjay Savern