(गावस्कर का कॉलम)

आइपीएल शुरू हो चुका है और क्रिकेट प्रेमियों के अगले कुछ हफ्तों की शाम पहले की तरह साधारण नहीं रहेगी। कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए टूर्नामेंट के पहले मैच ने ही अच्छा प्लेटफॉर्म खड़ा कर दिया। हालांकि गत चैंपियन टीम ने नौ गेंद शेष रहते ही मैच जीत लिया, लेकिन जिस स्तर का क्रिकेट खेला गया, उससे यह भरोसा हो गया है कि हमें आगे अच्छा प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

सभी टीमों ने अपने संयोजन और संतुलन को सही रखने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास किए हैं और सभी ने पिछले साल की कमियां भी दूर करने की कोशिश की है। हालांकि क्रिकेट में कभी भी कुछ भी हो सकता है और सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज भी विफल हो सकते हैं। अच्छे से अच्छा गेंदबाज भी चौके-छक्के खा बैठता है और महान फील्डर भी कैच टपका देते हैं। कुछ अनजान भारतीय खिलाडिय़ों को मोटा कांट्रेक्ट इसलिए मिला है, क्योंकि टीम में भारतीय खिलाडिय़ों को रखना बेहद जरूरी है। अंतिम एकादश में चार से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी नहीं रखे जा सकते। इसमें कोई शक नहीं है कि विदेशी खिलाड़ी मैच का रुख बदलने वाले हैं, इसके बावजूद भारतीय खिलाडिय़ों की निरंतरता पर ही टीम की प्रगति निर्भर करेगी।

पिछले साल की उप विजेता टीम किंग्स इलेवन पंजाब ने बेहद समझदारी के साथ भारतीय युवाओं में निवेश किया और वे सही साबित हुए, क्योंकि इन्हीं खिलाडिय़ों के प्रदर्शन के बल पर वे पिछले साल फाइनल में पहुंचे। सबसे ज्यादा अहम एक मैच के स्टार की बजाय घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वालों पर निगाह रखना है। वे नियमित तौर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि उनकी क्रिकेट मजबूत तकनीक पर निर्भर है और इस तरह के खिलाड़ी टीम को ज्यादा मजबूती दे सकते हैं।

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Posted By: sanjay savern

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