(गावस्कर का कॉलम)

कोलकाता में क्रिकेटर अंकित केसरी की असमय मृत्यु से एक बार फिर जरूरत महसूस होने लगी है कि प्रशासन खेल के मैदानों में आपातकालीन सर्विस और एंबुलेंस की व्यवस्था कराए। कम से कम इतनी व्यवस्था तो की ही जा सकती है। बीसीसीआइ अपने संघों को क्रिकेट के लिए मोटी धनराशि देती है। इसलिए मैदानों में इस तरह की मेडिकल सुविधा होनी ही चाहिए। बड़े मैचों में यह सेवा उपलब्ध होती है, लेकिन छोटे मैदानों में जहां आउटफील्ड सही नहीं होती और पिच पर भी असमान उछाल रहता है, तो चिकित्सीय सुविधा आसपास होनी ही चाहिए।

केसरी की मौत से एक और चीज जो मुझे महसूस हुई कि हमारे देश में ऐसे कोच नहीं हैं, जो युवाओं को मैदान में आपस में टकराने से बचने की तकनीक समझाएं। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मैंने भारतीय खिलाडि़यों को कैच लेने के चक्कर में आपस में टकराते हुए देखा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि युवावस्था में उन्हें यह नहीं सिखाया जाता कि फील्डर को अपने कैच के लिए आवाज लगानी होती है। यह सही है कि स्टेडियम में दर्शकों का शोर बहुत होता है और एक-दूसरे की आवाज सुनना मुश्किल होता है, लेकिन खिलाड़ी के हावभाव बता देते हैं कि वह कैच के लिए जाने वाला है और वह दूसरे खिलाड़ी को सावधान कर सकता है।

भारत पर भले ही आइपीएल का बुखार चढ़ा हुआ है, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला जा रहा है। बांग्लादेश ने पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में क्लीन स्वीप किया। तमीम इकबाल ने पहले दोनों मैचों में शतक जड़ा और इसके बाद तीसरे मैच में अर्धशतक भी जड़ा। मुशफिकुर रहीम के साथ वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तान को हालांकि थोड़ा धैर्य से काम लेना होगा, क्योंकि नई टीम को खड़ा होने में थोड़ा समय लगता है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए तमीम को इस बार सिएट इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द वीक चुना जाता है।

क्रिकेट की खबरों के लिए यहां क्लिक करें

खेल की खबरों के लिए यहां क्लिक करें

Posted By: sanjay savern

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप