कोलकाता, पीटीआइ। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर मनोज प्रभाकर ने शनिवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम के अंतिम एकादश के चयन को लेकर कड़ी आलोचना की है और कहा कि सीमित ओवर की फॉर्म को देखकर टेस्ट टीम का चयन करना शर्म की बात है।

भारत ने पहले दो टेस्ट में उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया था और उनकी जगह वनडे की फॉर्म हवाला देकर विराट कोहली ने रोहित शर्मा को जगह दी। वहीं, पहले टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद भुवनेश्वर को दूसरे टेस्ट में अंतिम एकादश में जगह नहीं दी गई और उनकी जगह इशांत शर्मा को शामिल कर लिया गया।

प्रभाकर ने कहा, ‘टी-20 और वनडे पर आधारित टेस्ट टीम का ऐसा चयन शर्म की बात है। टेस्ट खेलने का अलग ही तरीका है। क्या आप टेस्ट मैच में ऋषभ पंत को ले सकते हैं। नहीं। रहाणे को शामिल करना चाहिए था। वह कैसे कह सकते हैं कि भुवनेश्वर सेंचुरियन की विकेट पर गेंदबाजी नहीं कर सकता। आपने हवा में बहुत कम गेंदबाजों को गेंद स्विंग कराते हुए देखा है और भुवनेश्वर ऐसा कर सकते हैं। बाकी के गेंदबाज विकेट पर स्विंग कर सकते हैं। ऐसे में अगर आपके पास भुवनेश्वर जैसा गेंदबाज है, तो नई गेंद के साथ उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता।’

भारत के लिए 1990 के दशक में अलग-अलग समय पर गेंदबाज और बल्लेबाजी की भूमिका निभाने वाले प्रभाकर ने कहा, ‘दक्षिण अफ्रीका में पहले 20 ओवरों में अगर टीम अच्छी बल्लेबाजी और गेंदबाजी नहीं कर सकती, तो हम मेजबान टीम से नहीं जीत सकते। सबसे अहम चीज है कि आप किस तरह गेंद का सामना करते हैं। अगर आप सामने से आ रही गेंद का सामना नहीं कर सकते, तो आप पिच पर टिक नहीं सकते। गेंद को जाने देना भी सीखना जरूरी है। मैं भी सलामी बल्लेबाज रहा हूं और जब मैं संघर्ष कर सकता हूं, तो वे क्यों नहीं कर सकते?

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Posted By: Pradeep Sehgal