नई दिल्ली, सुनील गावस्कर। जब ऐसा लगने लगा था कि इस बार इंग्लैंड में भारत का दबदबा रहने वाला है, तभी युवा तेज गेंदबाज सैम कुर्रन ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया और इंग्लैंड ने पहला टेस्ट मैच 31 रनों से जीत लिया। यह काफी करीबी मुकाबला रहा और इसकी वजह भारतीय कप्तान विराट कोहली की शानदार पारी थी। निचले क्रम के बल्लेबाजों को साथ खड़े होकर जिस ढंग से उन्होंने भारत को 13 रनों की बढ़त दिलाई, वह शानदार था। 

 महान खिलाड़ी अन्य की तुलना में ज्यादा जल्दी मानसिक तौर पर बदलाव कर लेते हैं और कोहली हर गेंद के साथ ऐसा करते रहे। शुरुआत में जब गेंद स्विंग हो रही थी, वे कई बार चूके भी, लेकिन उन्होंने अपनी बैक लिफ्ट को कम किया, बल्ले की गति को घटाया और कई शॉट्स को खेलने से खुद को रोका।

दुर्भाग्य से अन्य खिलाड़ी अपनी मानसिकता में यह बदलाव नहीं कर पाए। अगर यह खबर सही है कि धवन को टीम से बाहर बैठाया गया है, तो इसमें कोई हैरानी नहीं है, क्योंकि जब भी टीम मैच हारती है, तो सबसे पहले गाज उन्हीं पर गिरती है।

फिर चाहे हारे हुए मैच में उन्होंने उन खिलाडि़यों से ज्यादा रन बनाएं हों, जो टीम में अपनी जगह बचाने में कामयाब हो गए। अगर उन पर इतना ही कम विश्वास है, तो आखिर विदेशी दौरों पर उन्हें चुना ही क्यों जाता है? इसके लिए धवन खुद भी जिम्मेदार हैं, वह जब अच्छी बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो भी गलत शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा देते हैं जबकि दोहरा शतक या उससे ज्यादा के स्कोर से ही टीम प्रबंधन का विश्वास उन पर बनेगा। तभी उन्हें कुछ अतिरिक्त मौके भी मिलेंगे।

पहले मैच में यह बात साफ हो गई है कि अगर पिच बल्लेबाजी के लिए स्वर्ग नहीं हुई, तो मैच कम स्कोर वाले ही रहेंगे। ऐसे में टीम के लिए एक अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ खेलना अहम है। पुजारा वापसी करेंगे, लेकिन कार्तिक, अश्विन और पांड्या स्विंग होती गेंद के सामने संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में छठे बल्लेबाज को लेकर टीम क्या कर सकती है। मगर पुजारा को शामिल करने के लिए किसी एक फेवरेट को बाहर करना होगा और यह कहना आसान है। 

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Posted By: Lakshya Sharma

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