(गावस्कर का कॉलम)

टेस्ट मैच के कार्यक्रम में परिवर्तन का असर यह हुआ कि भारत को सीरीज का पहला मैच उस पिच पर खेलने को मिला, जिसे ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी के लिए सबसे अच्छी कहा जाता है। पहले दिन ही यह स्पष्ट हो गया था कि पिच में ज्यादा उछाल नहीं है और गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आ रही है। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से तीन बल्लेबाजों ने शतक जड़े, खास बात यह है कि तीनों बल्लेबाज न्यू साउथ वेल्स से थे, जहां से फिलिप ह्यूज भी थे।

भारतीय बल्लेबाजों को जॉनसन, सिडल और हैरिस की खतरनाक तिकड़ी का सामना करना था। धवन की प्रतिक्रिया आक्रामक थी। ऐसा लगा कि वह इसी विपक्षी टीम के खिलाफ मोहाली में खेले अपने पदार्पण टेस्ट में लगाए गए सबसे तेज शतक को दोहराने की कोशिश कर रहे थे। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां गेंद मोहाली की तुलना में कुछ ज्यादा मूव कर रही थी और यही उनके आउट होने की वजह भी बनी।

मुरली विजय ने प्रभावित करना जारी रखा और पुजारा भी एक अच्छी पारी खेलने में कामयाब रहे। कोहली की ही तरह पुजारा का भी इंग्लैंड दौरा किसी भुला देने वाले सपने से कम नहीं रहा था। उनकी पारी से यह साफ हो गया कि बीच की अवधि में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी पर कड़ी मेहनत की। खेलते वक्त बल्ला उनके शरीर के बहुत करीब रह रहा था और जब भी फॉरवर्ड होकर खेल रहे थे तो उनके शरीर का झुकाव भी अधिक था। शतक नहीं बना पाने से वह भी थोड़े निराश होंगे। पहली ही गेंद जोरदार तरीके से हेलमेट पर लगने के बाद भी कोहली नहीं घबराए और शानदार शतक जड़ा। इसके साथ उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई खेमे में यह संदेश भी भेज दिया कि भारतीय टीम अपने कदम पीछे नहीं करने वाली है। रहाणे भी थोड़े निराश होंगे। वह भी एक अच्छे अर्धशतक को शतक में तब्दील नहीं कर सके। अब अगर रोहित शर्मा ने अपना संयम बनाए रखा तो वह साबित कर सकते हैं कि वनडे क्रिकेट के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट में भी वह लंबी पारी खेलने का माद्दा हैं। यह वास्तव में एक मजबूत जवाब है और भारत को ज्यादा से ज्यादा देर तक बल्लेबाजी करने की कोशिश करनी चाहिए। इससे शेष सीरीज में एक मनोवैज्ञानिक बढ़त के साथ मैदान पर उतरने का मौका भारत को मिलेगा।

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Posted By: sanjay savern

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