गावस्कर का कॉलम

भारत ने जिस ढंग से आयरलैंड को रौंदा, उससे टेस्ट क्रिकेट की नई टीम और स्थापित टीम के बीच की खाई का अंदाजा लग गया। आयरलैंड के अधिकतर खिलाड़ी इंग्लिश काउंटी चैंपियनशिप में खेलते हैं। हालांकि इसका स्तर अभी भी 70 के दशक जैसा ही है, लेकिन उन्हें बहुत सारे मैच खेलने का मौका मिलता है। ऐसे में उनसे दो टी-20 मैचों में च्यादा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी।

इंग्लैंड के साथ मुकाबला निश्चित तौर पर पूरी तरह से अलग होगा। उनकी टीम आयरलैंड की तुलना में ज्यादा बेहतर हैं और उनके खिलाड़ी दुनियाभर में टी-20 खेलते हैं। दो साल पहले आइसीसी टी-0 विश्व कप इंग्लैंड उपविजेता भी रही थी। वेस्टइंडीज के कार्लोस ब्रेथवेट के चार लगातार छक्कों की वजह से उन्हें फाइनल में हार झेलनी पड़ी थी।

भारत के लिए कुछ समस्या हैं, बुमराह टी-20 सीरीज से बाहर हो चुके हैं। भुवनेश्वर के साथ मिलकर वह एक शानदार जोड़ी बनाते हैं, चाहे पारी की शुरुआत करनी हो या फिर अंतिम ओवरों में गेंदबाजी करनी हो। उनके विकल्प माने जा रहे उमेश यादव ने आइपीएल में शानदार गेंदबाजी की थी और आयरलैंड के खिलाफ भी गति से गेंदबाजी की। दो युवा स्पिनर युजवेंद्रा सिंह चहल और कुलदीप यादव एक बार फिर से अहम साबित होंगे और अगर वे बीच के ओवरों में रनों की रफ्तार पर लगाम लगा सकते हैं, तो इंग्लैंड को कम स्कोर पर रोका जा सकता है।

भारत का मजबूत पक्ष उसकी बल्लेबाजी है और जिस ढंग से धवन, शर्मा और राहुल बल्लेबाजी कर रहे हैं, उससे कोहली के लिए बल्लेबाजी क्रम चुनना मुश्किल होगा। रैना की बायें हाथ की बल्लेबाजी ने मध्य क्रम में विविधता जोड़ी है। ऐसे में मनीष पांडे को बाहर बैठना पड़ सकता है। धौनी और पांड्या ने आयरलैंड के खिलाफ आसानी से छक्के लगाए और ये दोनों निचले क्रम में बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। भारत को उम्मीद होगी कि ये दोनों स्कोर को विपक्षी टीम की पहुंच से बाहर ले जाने में मदद करेंगे।

भारत की एकमात्र चिंता कैच नहीं पकड़ पाना है और अगर वह इस कमी को पूरा कर लेते हैं, तो इंग्लैंड का यह दौरा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सुनहरा पन्ने के रूप में जुड़ सकता है।

क्रिकेट की खबरों के लिए यहां क्लिक करें

By Sanjay Savern