चेन्नई। तीन साल से भारतीय क्रिकेट से परित्यक्त चल रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के पूर्व आयुक्त ललित मोदी पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) की बुधवार को हुई आमसभा की विशेष बैठक (एसजीएम) में यह फैसला लिया गया। बीसीसीआइ की अनुशासन समिति ने मोदी को अनुशासनहीनता और कदाचार के आठ आरोपों का दोषी करार दिया है।

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मोदी और बीसीसीआइ के बीच दिन भर चली कानूनी रस्साकशी के बाद बोर्ड की एसजीएम बमुश्किल आधा घंटा चली, जिसमें विवादों से घिरे 49 वर्षीय मोदी पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। मोदी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अपनेखिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए होने वाली इस बैठक पर रोक लगाने की अपील की थी लेकिन न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया।

बोर्ड ने एक बयान में कहा, 'बीसीसीआइ ने आमसभा की विशेष बैठक में मोदी को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर अपनी अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर विचार किया। मोदी को गंभीर अनियमितताओं और अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया लिहाजा बोर्ड अपने नियम और कानून की धारा 32 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मोदी को बीसीसीआइ से निष्कासित करता है। उन्हें प्रशासक के तौर पर अपने सारे अधिकारों और विशेषाधिकारों से हाथ धोना होगा। वह बोर्ड के किसी सदस्य या सहयोगी सदस्य या किसी समिति में किसी पद पर काबिज नहीं हो सकते।'

आइपीएल के जनक मोदी ने अपने बचाव की आखिरी कोशिश में बीसीसीआइ के सदस्यों को पत्र लिखकर मामला न्यायालय के विचाराधीन होने तक कोई फैसला नहीं लेने का अनुरोध किया था। बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, 'किसी भी सदस्य ने बैठक में मोदी का समर्थन नहीं किया और सदन ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया।'

बोर्ड की अनुशासन समिति के सदस्यों अरुण जेटली और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जुलाई में 134 पेज की रिपोर्ट जमा की थी जिसमें मोदी को आठ आरोपों का दोषी पाया था जिसमें पैसे की अनियमितताएं, अनुशासनहीनता और बीसीसीआइं के हितों के उलट कार्रवाई शामिल है। बुधवार की बैठक दिल्ली हाई कोर्ट के मंगलवार के फैसले के बाद ही संभव हो सकी, जिसमें अदालत ने बैठक पर रोक लगाने के निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया था।

फिलहाल लंदन में रह रहे मोदी के खिलाफ आरोपों पर सुनवाई जुलाई, 2010 में शुरू हुई थी और अनुशासन समिति ने दो साल में कई दौर की सुनवाई की जिसमें से एक में भी मोदी प्रत्यक्ष रूप से मौजूद नहीं थे। मोदी को 25 अप्रैल, 2010 को बोर्ड के संविधान के नियम 32(4) के तहत निलंबित कर दिया गया था। मुंबई में आइपीएल फाइनल के तुरंत बाद यह फैसला लिया गया था। बोर्ड ने उन्हें तीन कारण बताओ नोटिस भी जारी किए थे जिनमें से उन्होंने सभी का जवाब दिया। पूरे समय मोदी ट्विटर और टीवी चैनलों पर खुद को बेकसूर बताते रहे, लेकिन बीसीसीआइ की समिति के सामने प्रत्यक्ष रूप से पेश नहीं हुए।

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