नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के पदाधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त क्रिकेट प्रशासक समिति (सीओए) के बीच विवाद बढ़ता चला जा रहा है। बीसीसीआइ के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने शुक्रवार को सात पन्नों का ईमेल लिखकर सीओए को ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना का आरोप लगाते हुए घेरा है।

सीओए ने गुरुवार को ही निर्देश जारी करते हुए बीसीसीआइ के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी के कामकाजी अधिकारों पर रोक लगा दी थी। अमिताभ ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है। चौधरी ने सीओए को ईमेल करके कई सवाल खड़े किए हैं जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी जिक्र किया है।

चौधरी ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सीओए को बीसीसीआइ के कामकाज का सुपरविजन करने को कहा था। उन्होंने इसमें यह भी लिखा है कि पिछले आठ महीने में आपने एक बार भी लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जबकि आप वे काम कर रहे हैं जिसके लिए आपकी नियुक्ति नहीं हुई थी।

24 घंटे में ही किया उल्लंघन

उन्होंने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी पिछले साल 30 जनवरी के आदेश के मुताबिक फरवरी में होने वाली आइसीसी की बैठक में बीसीसीआइ के दो पदाधिकारियों और सीओए के एक सदस्य को भेजने को कहा गया था। इसके लिए बीसीसीआइ से अमिताभ चौधरी और अनिरुद्ध चौधरी जबकि सीओए की ओर से विक्रम लिमाये का नाम प्रस्तावित था लेकिन 24 घंटे में ही सीओए ने उसे नकार दिया।

चौधरी ने अपने ईमेल में बताया है कि कैसे 31 जनवरी 2017 को सीओए द्वारा बीसीसीआइ की देखरेख का कार्यभार संभालने के 24 घंटों के अंदर सुप्रीम कोर्ट के फैसला का उल्लंघन किया गया। इस ईमेल में 31 जुलाई 2017 को आइसीसी को बीसीसीआइ के सीईओ द्वारा भेजे गए ईमेल का भी जिक्र है। इस बैठक में भाग लेने के लिए लिमाये के साथ बीसीसीआइ के सीईओ राहुल जौहरी गए थे। अमिताभ ने लिखा है कि सीओए को माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने की छूट नहीं दी थी।

कोर्ट ने साफ किया था कि बीसीसीआइ के सदस्य ही आइसीसी की बैठक में भाग लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में सीओए और बीसीसीआइ की जिम्मेदारियों को साफ करते हुए कहा था कि सीओए के पास परिभाषित और सीमित भू्मिका है जबकि बीसीसीआइ एक संस्थान के तौर पर अपने कामकाज तीन पदाधिकारियों के साथ जारी रखे। चौधरी इस मामले में भी सीओए को घेरने से नहीं चूके।

सुधारों पर कुछ नहीं किया 

अमिताभ ने इस मेल में आगे लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24 जुलाई 2017 को दिए गए आदेशों और सुधारों पर अमल करने पर बोर्ड के 13 पूर्ण सदस्यों ने सहमति जता दी थी। दूसरे सदस्यों को भी ईमेल के जरिये इसे अपनाने के लिए सूचना दे दी गई है जिनके जल्द ही इसे अपनाने की उम्मीद है। मुझे ऐसा लग रहा है कि 21 अप्रैल 2017 को मुंबई में सीओए के साथ हुई बातचीत के बाद मामला बिगड़ा है जहां मैंने आपके दृष्टिकोण पर एतराज जताया था। वह इस ईमेल के जरिए बीसीसीआइ में सुधार लागू नहीं हो पाने के लिए भी सीओए को घेरते दिखे हैं।

नियुक्तियों और कार्यशैली पर सवाल

अमिताभ ने सीओए की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि कुछ बैठकों के अलावा सीओए ने मीटिंग में बीसीसीआइ के पदाधिकारियों को बुलाया ही नहीं जबकि सीओए को सुपरविजन करना था। बीसीसीआइ की आम सभा को जो काम करने थे वह सीओए करने लगा। बीसीसीआइ स्टाफ की तनख्वाह में बदलाव, समय से पहले स्टाफ की वेतनवृद्धि करना, खिलाड़ियों के करार के लिए नया वर्ग बनाना, खिलाड़ियों का करार फाइनल करना, मीडिया राइट्स की नीलामी के तरीके को बदलना पूरी तरह से बीसीसीआइ की आम सभा का काम था जिसे आपने किया। पदाधिकारियों को बिना बताए और प्रक्रिया को ताक पर रखकर कई नियुक्तियां हुईं। बीसीसीआइ में जिस जीएम मार्केटिंग का पद ही नहीं है, उस पर भी नियुक्ति की जा रही है।’

Posted By: Pradeep Sehgal