अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति के बीसीसीआइ और राज्य क्रिकेट संघों को लेकर आ रहे नए-नए फरमानों से तंग आकर अब राज्य संघों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। दैनिक जागरण ने एक दिन पहले ही बताया था कि सोमवार को आए सीओए के नए निर्देशों के खिलाफ 18 राज्य संघों के सदस्यों ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक की थी। अब बुधवार को सौराष्ट्र क्रिकेट संघ (एससीए) ने एससीए के चुनाव अधिकारी वेरेश सिन्हा को पत्र लिखकर साफ-साफ कहा है कि वह 26 सितंबर को होने वाले अपने चुनावों में इन निर्देशों का पालन नहीं करेगा।

एससीए के संयुक्त सचिव मधुकर वोराह ने लिखा है कि 26 सितंबर को होने वाले राज्यों के चुनाव को लेकर हमने 11 तारीख को नोटिस जारी किया था। सीओए की तरफ से 16 सितंबर को चुनाव को लेकर भेजे गए निर्देशों का हम पालन नहीं करेंगे। नोटिस की तारीख से ही हमारी चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। यह प्रक्रिया 27 अगस्त और छह सितंबर को सीओए द्वारा भेजे गए निर्देशों के आधार पर ही पूरी की गई। अब हमारे लिए यह संभव नहीं है कि हम सोमवार को भेजे गए नए निर्देशों का पालन कर सकें। हमारी एसोसिएशन नोटिस की तारीख तक लागू नियमों के मुताबिक ही चुनाव कराएगी।

मालूम हो कि सीओए ने राज्य संघों और बीसीसीआइ के चुनाव को लेकर सोमवार को नया फरमान जारी किया था। इसके 10 स्पष्टीकरणों में से पांचवां स्पष्टीकरण कहता है कि यदि कोई व्यक्ति छह साल बोर्ड के पदाधिकारी और तीन साल बीसीसीआइ की कार्यकारी समिति के रूप में कुल नौ साल बिता लेता है तो वह बीसीसीआइ का चुनाव लड़ने योग्य नहीं है। छठा स्पष्टीकरण कहता है कि यदि किसी व्यक्ति ने लगातार बीसीसीआइ में पदाधिकारी के रूप में तीन साल और तीन साल किसी राज्य संघ की वर्किंग कमेटी के सदस्य के रूप में बिताए हैं तो उसे तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरना पड़ेगा।

आठवां स्पष्टीकरण कहता है कि यदि व्यक्ति ने नौ साल (पदाधिकारी और समिति सदस्य) राज्य संघ में पूरे किए हैं तो वह व्यक्ति राज्य संघ में पदाधिकारी और निदेशक के पद पर चुनाव लड़ने की श्रेणी में नहीं आता है। बोर्ड और राज्य संघों के पदाधिकारियों का कहना है कि सीओए जानबूझकर चुनाव लटकाना चाहते हैं या किसी व्यक्ति विशेष को बीसीसीआइ अध्यक्ष पद पर बैठाने के लिए रोज नए-नए नियम लागू कर रहे हैं। बीसीसीआइ के राज्य क्रिकेट संघों को अपने चुनाव 28 सितंबर तक संपन्न करवाने हैं। इसमें से कई राज्य संघ चुनाव करवा चुके हैं जबकि बीसीसीआइ का चुनाव 22 अक्टूबर को प्रस्तावित है।

चुनाव को लेकर संदेह के बादल : बोर्ड के सूत्रों के अनुसार अगर कार्य समिति में बिताए समय को भी कार्यकाल में जोड़ा जाएगा तो अधिकांश सदस्य मतदान के पात्र अपने 80 प्रतिशत से अधिक सदस्यों को गंवा देंगे। इसमें बंगाल क्रिकेट संघ के प्रमुख सौरव गांगुली और गुजरात क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव जय शाह जैसे अधिकारी भी शामिल होंगे। छह साल के कार्यकाल नियम के अनुसार सौरव और शाह के 10 महीने बचे हैं लेकिन कार्य समिति के कार्यकाल के कारण वह तुरंत प्रभाव से बाहर हो जाएंगे। क्या सीओए वास्तव में चुनाव कराने की इच्छा रखता है या इसमें विलंब करना चाहता है? इसके बाद 10 से अधिक राज्य इकाइयों ने न्याय मित्र पीएस नरसिम्हा से संपर्क किया है और इस मुद्दे पर उनसे हस्तक्षेप करने और निर्देश देने को कहा है।

कम से कम 25 राज्य इकाइयां पहले ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर चुकी हैं और इस नए निर्देश का पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। बोर्ड के एक पदाधिकारी ने कहा कि करीब 10 राज्य इकाइयों ने न्यायमित्र से संपर्क किया है और वे तुरंत हल चाहती हैं क्योंकि हम चुनाव कराना चाहते हैं लेकिन अगर कार्यसमिति के कार्यकाल को शामिल किया गया तो हमें नई मतदाता सूची तैयार करनी होगी। सीओए का यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की शुरुआती सिफारिशों में शामिल नहीं था।

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Posted By: Sanjay Savern

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