नई दिल्ली, जेएनएन। भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए साउथ अफ्रीका ने मुंबई के दिग्गज अमोल मजूमदार को बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया है। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी अमोल कभी टीम इंडिया में जगह नहीं बना पाए। ऐसे कई क्रिकेटर हैं जिन्होंने क्रिकेट के मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा तो मनवाया लेकिन चयनकर्ताओं की फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके।

आपके सामने हम एक ऐसा प्लेइंग इलेवन रखने जा रहे हैं, जिसमे वो धुरंधर शामिल हैं जिन्होंने भले ही टीम इंडिया के लिए नहीं खेला लेकिन घरेलू क्रिकेट में जमकर धमाल मचाया। चाहे शतक हो या फिर विकेट चकटकाना इन खिलाड़ियों का कोई मुकाबला नहीं।

कप्तान अमोल मजूमदार

टीम की कप्तानी अमोल मजूमदार के हाथों में दी गई है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 30 शतक और 60 अर्धशतक बनाने वाले अमोल के नाम 171 मैचों में 11167 रन दर्ज हैं। 48 के शानदार औसत से रन बनाने के बाद भी अमोल कभी टीम इंडिया में जगह नहीं बना पाए।

श्रीधर और शिवारामाकृष्णन ओपनर

इस टीम की ओपनिंग का जिम्मा एम वी श्रीधर और विद्युत शिवरामाकृष्णन के हाथों में दी गई है। घरेलू क्रिकेट में बतौर ओपनर इन दोनों ही बल्लेबाजों ने अपना गहरी छाप छोड़ी। हैदराबाद की तरफ से खेलने वाले श्रीधर के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कुल 21 शतक हैं। श्रीधर उन गिने चुने ओपनर्स में शुमार हैं जिनके नाम घरेलू क्रिकेट में तीहरा शतक लगाने का कारनामा दर्ज है। वी वी शिवरामाकृष्णन ने तमिलनाडू और बिहार की तरफ से रणजी क्रिकेट में भाग लिया। उनके नाम फर्स्टक्लास क्रिकेट में 6 हजार से ज्यादा रन हैं।

मिडिल आर्डर में भास्कर, बुंदेला और कोटक

कृष्णन भास्कर पिल्लई मिडिल ऑर्डर के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में हुआ करते थे। दिल्ली की तरफ से खेलने वाले भास्कर का औसत 50 से उपर का है और उन्होंने 18 शतक के साथ 95 मुकाबले खेलकर 5443 रन बनाए लेकिन भारत की तरफ से उनको कभी खेलने का मौका नहीं मिल पाया।

मध्य प्रदेश की तरफ से खेलने वाले देवेंद्र बुंदेला ऐसे भारतीय क्रिकेटर रहे जिनके नाम 10 हजार से ज्यादा फर्स्टक्लास रन के साथ 50 से ज्यादा विकेट भी थे। लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी टीम इंडिया में जगह नहीं बनाने पाने के बाद साल 2017 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

सितांशु कोटक भारत के क्रिकेट में सबसे नामचीन चेहरा है। सौराष्ट्र के लिए कप्तानी कर चुके सितांशु की कोचिंग में टीम ने लगातार दो बार रणजी ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। दो दशक तक घरेलू क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाने वाले सितांशु ने 8061 रन बनाने के अलावा 70 विकेट भी हासिल किए हैं।

भाऊसाहेब बाबासाहेब निम्बालकर पर विकेटकीपर की जिम्मेदारी

बीबी निम्बालकर के नाम से पहचाने जाने वाले इस खिलाड़ी का पूरा नाम भाऊसाहेब बाबासाहेब निम्बालकर था। साल 1948-49 ने रणजी सीजन में सबसे ज्यादा 443 रन निम्बालकर नाम पर दर्ज हैं। महराष्ट्र क्रिकेट को दो दशक से ज्यादा देने वाले इस विकेटकीपर का औसर फर्स्टक्लास मं 47.9 का रहा ।

हरि गिदवानी, रजिंदर गोयल की फिरकी

बिहार और दिल्ली की तरफ से फर्स्टक्लास क्रिकेट खेलते हुए हरि ने अपनी लेग स्पिन से बड़े बड़े बल्लेबाजों को चकमा दिया। रजिंदर गोलय की स्पिन का जादू भी घरेलू क्रिकेट में जमकर दिखा था। हरियाणा की तरफ से खेलने वाले इस फिरकी उस्ताद ने कुल 750 विकेट हासिल किए थे। बिशन सिंह बेदी टीम इंडिया में लगातार धमाल मचाते रहे और गोयल को इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिल पाया।

सलगांवकर और बोस की तेज गेंदबाजी जोड़ी

मुंबई की तरफ से 70 के दशक में तेज गेंजबाजी से सबसे प्रभावित करने वाले पांडुरंगा सलगांवकर टीम इंडिया में जगह बनाने से चूक गए थे। 26 की औसत से 214 विकेट हासिल करने वाले सलगांवकर को इंग्लैंड के खिलाफ 1974 में टीम में जगह मिलते-मिलते रह गई थी।

बांग्ला के तेज गेंदबाज राणादेब बोस का नाम भी घरेलू क्रिकेट में काफी अदब से लिया जाता है। 317 विकेट हासिल करने वाले इस गेंदबाज ने कई धुरंधरों को घरेलू क्रिकेट में घुटने टेकने पर मजबूर किया था। 2007 में इंग्लैंड दौरे पर उनको चुना गया था लेकिन वह इंटरनेशनल डेब्यू नहीं कर पाए।  

Edited By: Viplove Kumar