लीड्स, अभिषेक त्रिपाठी। महेंद्र सिंह धौनी अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर हैं और इस लंबे सफर में जिसने भी उनका साथ दिया वह उनको किसी ना किसी अंदाज में तोहफा दे रहे हैं। वह अभ्यास के दौरान मैदान में पत्रकारों के साथ सेल्फी खिंचवा रहे हैं, तो प्रशंसकों को जमकर ऑटोग्राफ दे रहे हैं। यही नहीं, इस विश्व कप में उन्होंने हर उस कंपनी के लोगो का फ्री में इस्तेमाल किया, जिसने उनको अभी तक खेल का सामान उपलब्ध कराया।

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर धौनी अपने बल्ले और दस्ताने में किसी कंपनी का लोगो लगाकर प्रचार करने के लिए अमूमन सात से आठ करोड़ रुपये प्रति वर्ष लेते हैं, लेकिन इस विश्व कप में उन्होंने किसी भी कंपनी से करार नहीं किया, बल्कि उन्होंने फैसला किया कि अब तक जितने भी लोगों ने उनकी मदद की है उनको वह अपनी तरफ से तोहफा देंगे। धौनी इस टूर्नामेंट में कभी पैरा मिलेट्री फोर्स के लोगो ‘बलिदान’ के साथ उतरे तो कभी उन्होंने एसजी, एसएस और बीएएस कंपनियों के लोगो लगाकर बल्लेबाजी व विकेटकीपिंग की। बलिदान लोगो लगाकर वह उस सेना को सम्मान देना चाहते थे, जिसने उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल का मानद पद दिया है। हालांकि, इसके कारण उन्हें विवाद का सामना भी करना पड़ा और आइसीसी ने उन्हें अपने विकेटकीपिंग दस्ताने में इसका प्रयोग करने से मना कर दिया।

धौनी के दोस्त अरुण पांडेय ने दैनिक जागरण से कहा कि एक खिलाड़ी की खेल के सामान के साथ जो साझेदारी होती है, वह बेहद अहम है। यह दिल की साझेदारी होती है। क्रिकेटर के लिए यह मनोवैज्ञानिक तौर पर भी महत्वपूर्ण होता है। आपने देखा होगा कि जब कोई खिलाड़ी 100 के करीब होता है या जीत के लिए जा रहा होता है तो वह विशेष बल्ला मंगाता है। ऐसा ही कुछ धौनी के साथ रहा है। जहां तक अलग-अलग लोगो के इस्तेमाल की बात है तो उनका करार काफी समय से स्पार्टन के साथ था, लेकिन उन्होंने पैसे नहीं दिए। हम लोग सोच रहे थे कि यह मामला सुलझ जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्पार्टन के हटने के बाद कूकाबुरा सहित कई कंपनियों के प्रस्ताव हमारे पास आए, लेकिन बाद में माही ने तय किया कि वह इस विश्व कप में कुछ अलग करेंगे। आज भले ही खेलों का सामान बनाने वाली कंपनी कह दे कि वह माही को 50 सा 100 बल्ले भेज देगी, लेकिन शुरुआती दौर में, जिसने मदद की वह काफी अहम है। उस समय कोई एक बल्ला भी बड़ी मुश्किल से देता था, इसलिए माही ने तय किया कि वह उन सबको तोहफा देंगे, जिन्होंने उनको शुरुआती दौर में मदद की।

उनके इस कदम का एक मंतव्य और भी है। माही चाहते हैं कि खेलों का सामान बनाने वाली कंपनियां आगे भी इसी तरह नई प्रतिभाओं का समर्थन करती रहें। कल को क्या पता कि किसी किसी सुदूर क्षेत्र से एक और धौनी व विराट मिल जाए। खिलाड़ी के लिए एक बल्ला, 50 करोड़ से ज्यादा मायने रखता है। माही ऐसे ही हैं। अगर आप 50 करोड़ दे दो तो वह यह ना करें और कभी वह फ्री में भी ऐसा कर सकते हैं।

माही के एक और करीबी से जब बलिदान बैच के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस लोगो के जरिये वह सेना का प्रचार नहीं कर रहे थे, बल्कि वह अपनी तरफ से सेना को शुक्रिया अदा कर रहे थे। खेलों का सामान बनाने वाली कंपनी एसजी के मार्केटिंग डायरेक्टर पारस आनंद से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विश्व कप से पहले हमारी उनसे बात हुई थी। हम इस विश्व कप के लिए उनके साथ करार करना चाहते थे, लेकिन वह लंबे समय का करार चाह रहे थे। हालांकि, बाद में उनकी तरफ से हमें संदेश आया कि वह इस विश्व कप में किसी के साथ करार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वह अपनी मर्जी से संबंधित कंपनियों के लोगो लगाकर सबको तोहफा देंगे। उन्होंने ऐसा किया भी। वह कई बार एसजी के बल्ले व दस्ताने के साथ मैदान में उतरे।

पारस ने कहा कि खासतौर पर पिछले चार साल में धौनी सहित कई भारतीय खिलाड़ियों को हमने बल्ले दिए जो उन्हें काफी पसंद भी आए। धौनी की तरफ से यह तोहफा मिलने पर हम काफी खुश हैं। वहीं, एसएस कंपनी के मालिक जतिन सरीन ने कहा कि धौनी ने काफी समय तक हमारे बल्ले का इस्तेमाल किया है। 2011 विश्व कप के फाइनल में उन्होंने हमारे बल्ले से ही छक्का मारा था। हम खुश हैं कि उनके क्रिकेट के सफर में हम उनके साथी बने।

Posted By: Digpal Singh

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