नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली अपनी आक्रमक शैली के लिए आज भी फेमस हैं। कप्तानी के मामले में अगर किसी भारतीय खिलाड़ी में सबसे ज्यादा आक्रमकता थी तो वे सौरव गांगुली ही थे, लेकिन अब ऐसी शैली के लिए विराट कोहली जाने जाते हैं, लेकिन जो इस तरह की चीजें शुरू करता है उसका अपना रुतबा होता है। यही वजह है कि सौरव गांगुली उस समय आक्रमक थे, जब दुनिया की बाकी टीमें भारत को कमजोर समझती थीं।

2000 के दशक में भारतीय टीम को नया कप्तान मिला था। उसी दौर में भारतीय टीम ने विदेशी सरजमीं पर भी जीतना शुरू कर दिया था। इसका श्रेय सौरव गांगुली को जाता है, क्योंकि उन्होंने एक-एक खिलाड़ी में ऐसा आत्मविश्वास पैदा किया था, जो विदेशी टीमों के छ्क्के छुड़ाने के लिए काफी था। ऐसा ही एक मैच आज ही के दिन यानी 13 जुलाई 2002 को लॉर्ड्स के मैदान पर खेला गया था, जिसे अब 18 साल हो गए हैं।

दरअसल, इस दिन भारत और मेजबान इंग्लैंड के बीच नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल खेला गया था। नेटवेस्ट ट्रॉफी का ये फाइनल इसलिए भी रोमांचक था, क्योंकि इसमें इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 300 से ज्यादा रन बनाए थे। मेजबान टीम के दो खिलाड़ियों ने शतक भी जड़े थे, लेकिन भारतीय टीम के किसी भी खिलाड़ी ने शतक नहीं जड़ा था, बावजूद इसके भारतीय टीम ने बाजी मारकर नेटवेस्ट ट्रॉफी का फाइनल जीता था।

इंग्लैंड की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 5 विकेट खोकर 325 रन बनाए थे। ओपनर मार्कस ट्रेसकोटिक ने 100 गेंदों में 109 रन और कप्तान नासेर हुसैन ने 128 गेंदों में 115 रन बनाए थे। भारत की तरफ से जहीर खान को 3 विकेट मिले थे। वहीं, 326 रन के पहाड़ जैसे स्कोर का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के लिए सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग ने पारी की शुरुआत की। दोनों ही ओपनरों ने तेजी से रन बनाए।

सहवाग और दादा ने मिलकर पहले विकेट के लिए 106 रन जोड़े, लेकिन सौरव गांगुली 43 गेंदों में ताबड़तोड़ 60 रन की पारी खेलकर आउट हो गए। इसके बाद सहवाग भी 45 रन के निजी स्कोर पर चलते बने। इसके बाद दिनेश मोंगिया और सचिन तेंदुलकर के बीच साझेदारी पनप रही थी कि मोंगिया आउट हो गए। मोंगिया के बाद द्रविड़ का विकेट भी गिर गया, लेकिन 146 रन के कुल स्कोर पर जब सचिन 14 रन बनाकर आउट हुए तो सभी की उम्मीदें टूट गईं।

आधे से कम रन बने थे और टीम के 5 बड़े बल्लेबाज पवेलियन लौट गए थे। इसके बाद बाएं हाथ के बल्लेबाज युवराज सिंह और दाएं हाथ के बल्लेबाज मोहम्मद कैफ के बीच साझेदारी बननी शुरू हुई। दोनों ने पहले टीम के स्कोर को 200 के पार भेजा और फिर टीम 250 भी पार कर गई, लेकिन 69 रन के निजी स्कोर पर युवी आउट हो गए। बाद में हरभजन और कैफ ने पारी को आगे बढ़ाया, लेकिन भज्जी भी चलते बने। भज्जी के बाद अनिल कुंबले भी आउट हो गए।

47.5 ओवर में 314 के स्कोर पर टीम के 8 विकेट गिर गए थे। बल्लेबाज के तौर पर सिर्फ कैफ बचे हुए थे। कैफ ने एक छोर संभाले रखा और धीमे-धीमे स्कोर के करीब चले गए। 49वें ओवर की आखिरी गेंद पर उन्होंने चौका जड़ा और मैच को भारत की जीत के करीब पहुंचा दिया। बाकी का काम जैसे-तैसे 2 रन लेकर जहीर खान ने पूरा कर दिया। ये मैच और खिताब भारतीय टीम जीत गई थी और उधर लॉर्ड्स की बालकनी में खड़े होकर कप्तान गांगुली ने टीशर्ट लहरा दी।

माना जाता है कि दादा यानी सौरव गांगुली ने अपनी टीशर्ट उतारकर हवा में इसलिए लहराई थी, क्योंकि उसी साल मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाड़ी एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने वनडे मैच में मिली जीत का जश्न अपनी जर्सी को हवा में लहराकर मनाया था। इंग्लैंड ने उस सीरीज को 3-3 से बराबर किया था, जिसके बाद फ्लिंटॉफ टीशर्ट लहराकर मैदान पर घूमे थे, जिसका जवाब उन्हीं के घर में आक्रमक दादा ने दिया था।

Posted By: Vikash Gaur

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