नई दिल्ली, निखिल शर्मा। तीन अगस्त को अमेरिका में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए टी-20 मुकाबले से ही भारतीय टीम की अगले वर्ष ऑस्ट्रेलिया में होने वाले 2020 विश्व कप की तैयारियां शुरू हो गई थीं। टीम प्रबंधन ने एक अच्छा संयोजन बनाने के लिए युवाओं को आजमाना शुरू कर दिया था, इसमें से एक नाम तमिलनाडु के युवा ऑफ स्पिनर वाशिंगटन सुंदर का है। विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर सुंदर को पावरप्ले के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई गई। सुंदर प्रभाव छोड़ने में कामयाब नहीं रहे।

ऑलराउंडर बनाम गेंदबाज

हाल ही में भारतीय टीम प्रबंधन की तरफ से यह बयान दिये जाने लगे कि टी-20 विश्व कप से पहले ऐसी टीम तैयार की जाएगी जिसमें ज्यादा से ज्यादा ऑलराउंडर हैं। फिलहाल टीम के मुख्य ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या चोटिल हैं। इस दौरान विराट कोहली ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर में खुद की कप्तानी में खेलने वाले वाशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे को काफी मौके दिए हैं।

हालांकि, पिछले 17 टी-20 में पांच बार ही सुंदर को बल्लेबाजी का मौका मिला। यही नहीं शिवम दुबे को बल्लेबाजी का मौका देने के लिए पिछले मैच में विराट ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कराई। ऑलराउंडर खिलाने की नीति के कारण भारत के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक कुलदीप यादव को बाहर बैठाया जा रहा है। कुलदीप के नहीं खेलने की कमी गेंदबाजी विभाग में साफ दिखाई दे रही है। वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछली हार का कारण भी यही रहा।

सुंदर ही क्यों

वाशिंगटन सुंदर ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में तमिलनाडु के लिए ओपनिंग कभी की है लेकिन भारतीय टीम को ऐसे ताबड़तोड़ ऑलराउंडर की जरूरत है जो छठे या सातवें नंबर पर उतरकर हर गेंद पर चौके-छक्के लगा सके। ऑफ स्पिनर सुंदर ने पिछले दो मैचों में एक विकेट लिया हैं और उनका टी-20 फॉर्मेट का बल्लेबाजी करियर भी कुछ खास नहीं रहा है।

सुंदर ने अब तक 17 टी-20 मुकाबले खेले हैं, जिसमें से 12 बार तो उनकी बल्लेबाजी ही नहीं आई। उन्हें रवींद्र जडेजा से भी नीचे आठवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतारा गया। ऐसे में तो अगर कुलदीप यादव जैसे विशेषज्ञ स्पिनर को मौका दिया जाता तो ज्यादा बेहतर होता। कम से कम वह विकेट तो लेते क्योंकि सुंदर पिछले 10 मैचों में सिर्फ पांच विकेट ले पाए हैं।

कुलदीप को मौका क्यों नहीं?

विश्व कप तक कुलदीप यादव और युजवेंद्रा सिंह चहल की जोड़ी ने भारतीय टीम को कई मैच जिताए। दोनों ने मिलकर विदेशी सरजमीं पर भी अच्छा प्रदर्शन किया। दोनों की जुगलबंदी टीम के काम आ रही थी, लेकिन विश्व कप के बाद ही यह जोड़ी विराट कोहली ने तोड़ दी। यही कारण है कि टी-20 में भारतीय गेंदबाजी बिखरी-बिखरी सी नजर आ रही है।

क्रुणाल पांड्या, सुंदर आदि को मौका देने के लिए कुलदीप को कई सीरीज में टीम में भी नहीं चुना गया। वेस्टइंडीज के खिलाफ वर्तमान सीरीज में उन्होंने टीम में वापसी की लेकिन पिछले दो मैचों की अंतिम एकादश में उन्हें जगह दी गई। उनकी कलाई की स्पिन बल्लेबाजों को गच्चा खिलाने में कामयाब रहती है। फटाफट क्रिकेट में यह देखने को भी मिला है कि अंगुलियों के स्पिनरों से ज्यादा कलाई के स्पिनर कामयाब होते हैं।

सुंदर से अच्छे तो अश्विन

अगर सुंदर को ही पावरप्ले में इस्तेमाल करने की बात है तो फिर उनसे अच्छे तो रविचंद्रन अश्विन हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव है और वह अपने दिमाग से बल्लेबाजों को फंसाने में कामयाब भी रहे हैं। सुंदर का जहां गेंदबाजी औसत 27.46 है, तो वहीं अनुभवी गेंदबाज अश्विन का गेंदबाजी औसत 22.94 का है। ऐसे में सुंदर को खिलाने की रणनीति फिट बैठती दिखाई नहीं दे रही है।

Posted By: Vikash Gaur

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