मुंबई, प्रेट्र: रविवार को दो घंटे 45 मिनट तक चली बीसीसीआइ की विशेष आम सभा (एसजीएम) में बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और विवादों के घेरे में रहे एन श्रीनिवासन भी मौजूद थे। बीसीसीआइ का लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए समिति गठित करने का फैसला खासतौर से पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के ‘यथास्थिति’ को बरकरार रखने की कोशिश को नाकाम करने के लिए किया गया, क्योंकि वह एसजीएम में प्रस्ताव अपनाने को सहमत नहीं थे।

मान कर भी नहीं मान श्रीनि!

पता चला है कि श्रीनिवासन पहले सिफारिशों को अपनाने के संबंध में प्रस्ताव लाने पर सहमत हो गए थे। इस हिसाब से पश्चिम क्षेत्र की इकाई के अध्यक्ष, जो कि वकील भी हैं, ने प्रस्ताव तैयार कर दिया था। लेकिन, सुबह श्रीनिवासन ने यूटर्न ले लिया और कहा कि उन्हें कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं है। एसजीएम में मौजूद एक राज्य इकाई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह आश्चर्यजनक था कि श्रीनि ने रविवार की रात प्रस्ताव अपनाने पर सहमति जताई थी। इस प्रस्ताव में एक राज्य एक मत, 70 साल की आयुसीमा, तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड और तीन के बजाय पांच सदस्यीय चयन समिति जैसे विवादस्पद मुद्दे शामिल थे। लेकिन, आज सुबह वह आए और उन्होंने कहा कि वह किसी भी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे।

पत्रकार पर भड़के श्रीनिवासन

श्रीनिवासन से जब एक पत्रकार ने यह पूछा कि उन्होंने किस हैसियत से एसजीएम में हिस्सा लिया है, तो वह अपना आपा खो बैठे। ऐसे में भड़कते हुए श्रीनि से पत्रकार से उलटा सवाल पूछा, ‘आप कहां से आए हो, किस चैनल से हो। बधाई देता हूं, तुमने मुङो चुप करा दिया।’ जब पत्रकार ने वही सवाल दोहराया तो श्रीनि ने कहा, ‘पहले अपनी हैसियत बनाओ जो मुझसे सवाल कर सको।’ मालूम हो कि श्रीनिवासन तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए) के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए थे। हालांकि, लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक वह टीएनसीए या बीसीसीआइ के पदाधिकारी बनने के अयोग्य हैं।

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Posted By: Pradeep Sehgal