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'खिलाड़ी कोई मशीन नहीं', BCCI के सीओई पर उठे सवाल तो वीवीएस लक्ष्मण का फूटा गुस्सा

Published: Sun, 09 Aug 2026 06:46 PM (IST)

वीवीएस लक्ष्मण ने बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का बचाव करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की चोट से उबरने की धीमी प्रक्रिया के लिए इसे जिम्मेदार ठहराना गलत है।

वीवीएस लक्ष्मण

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पीटीआई, बेंगलुरु। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का पुरजोर तरीके से बचाव करते हुए इसके प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार को कहा कि खिलाड़ियों की चोट से उबरने की धीमी प्रक्रिया के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर कोई मशीन नहीं हैं, जिनकी फिटनेस हर बार तय समयसीमा के भीतर लौट आए।

लक्ष्मण ने यह भी स्पष्ट किया कि सीओई और टीम प्रबंधन के बीच बेहतरीन और निर्बाध समन्वय है। फिलहाल तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर और शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी. साई सुदर्शन अपनी-अपनी चोटों से उबरने के लिए सीओई में हैं।

वीवीएस लक्ष्मण ने समझाया चोट से उबरने की प्रक्रिया

लक्ष्मण ने सीओई में मीडिया से बातचीत में कहा कि सीओई सिर्फ चोट से उबरने और फिटनेस हासिल करने का केंद्र नहीं है। क्रिकेटरों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी भूमिका इससे कहीं बड़ी है। इसलिए हम चोटों के मामले में दोष शब्द का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते। ऐसा करने पर किसी एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि पुरुष और महिला, दोनों टीमों के सीओई, टीम प्रबंधन और एसएसएम स्टाफ के बीच शानदार तालमेल है। इसलिए बिना रूकावट के संवाद लगातार होता रहता है। लक्ष्मण ने कहा कि कड़े फिटनेस मानकों और मानव शरीर की प्रकृति को देखते हुए किसी खिलाड़ी का एक निश्चित समयसीमा में पूरी तरह फिट हो जाना हमेशा संभव नहीं होता।

खिलाड़ी कोई मशीन नहीं है: लक्ष्मण

उन्होंने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि दिशानिर्देश और समयसीमा हमारी अपेक्षाओं के आधार पर तय की जाती हैं। लेकिन यह मानव शरीर है, मशीन नहीं कि हर बार तय समयसीमा के भीतर ही रिकवरी हो जाए। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी की प्रगति की लगातार निगरानी की जाती है और उसके अनुसार प्रशिक्षण का भार बढ़ाया जाता है। चोट के उबरने से लेकर फिट घोषित होने और खिलाड़ी के सीओई छोड़ने तक यही प्रक्रिया जारी रहती है।

लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चयनकर्ता सीओई से खिलाड़ियों की फिटनेस स्थिति की रिपोर्ट मांगते हैं। इसके बाद रिपोर्ट चयन समिति के अध्यक्ष और दोनों टीमों के मुख्य कोच और बीसीसीआई को भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक तारांकित निशान रहता है, जिसका अर्थ है फिटनेस के अधीन। इसलिए श्रीलंका के विरुद्ध टीम के लिए उनका चयन फिटनेस क्लीयरेंस मिलने की शर्त पर होना था। लक्ष्मण के मुताबिक, सीओई में खिलाड़ियों का आकलन कर उन्हें एक चरण से दूसरे चरण में आगे बढ़ाया जाता है। उनकी प्रगति धीमी होती है तो चयन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कोच को इसकी जानकारी दी जाती है।

सैकिया ने स्पष्ट किया टीम चयन की प्रक्रिया

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी सीरीज से पहले टीम चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर टीम के रवाना होने से कम से कम तीन से चार सप्ताह पहले चयन बैठक होती है। सैकिया ने कहा कि उस समय हमें खिलाड़ी की फिटनेस की वास्तविक स्थिति का पता नहीं होता।

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इसलिए उसके नाम के आगे फिटनेस के अधीन का उल्लेख किया जाता है, क्योंकि वह खिलाड़ी उस समय चोट की उबरने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यक्रम से गुजर रहा होता है। उन्होंने कहा कि अगर खिलाड़ी 21 या 28 दिनों की उस अवधि में फिट हो जाता है तो उसे टीम में शामिल किया जा सकता है। इसीलिए ऐसे खिलाड़ी को सीधे तौर पर चयन से बाहर नहीं किया जाता है।