(जेफ थॉमसन का कॉलम)

 आइसीसी विश्व कप के फाइनल में अंपायरों द्वारा की गई गलतियों को आगामी वर्षो तक याद किया जाएगा। कितनी शर्म की बात है। कुमार धर्मसेना और मराइस इरास्मस, दो ऐसे अंपायर हैं, जिन्हें उनके गलत फैसलों के लिए क्रिकेट जगत में याद किया जाएगा और मुझे यकीन है कि उन्हें भी अपनी उपलब्धियों पर बहुत गर्व नहीं होगा।

मैंने अपने पहले के लेख में इंग्लिश टीम के विश्व कप जीतने की भविष्यवाणी की थी। मैं इंग्लैंड की टीम से कुछ दूर नहीं ले जा रहा हूं। हालांकि आइसीसी के नियमों के कारण चौकों-छक्कों के आधार पर टीम को विजेता घोषित कर दिया गया। यह न्यूजीलैंड था जिसने इस तरह से हार स्वीकार कर ली, लेकिन यही चीज इंग्लैंड के साथ होती तो उसकी मीडिया बेईमानी पर बवाल मचा देती और कईयों की उन्हें सहानुभूति भी मिल जाती और मैं इस पर शर्त भी लगा सकता हूं। लेकिन कीवी टीम ने मैदान पर कोई शिकायत नहीं की और कभी कोई असंतोष नहीं दिखाया। और यही कारण है कि केन विलियमसन और उनकी टीम को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने एक बार फिर से इस खेल को जेंटलमैन साबित कर दिया। आप ट्रॉफी नहीं जीत पाए, लेकिन आपने कुछ बड़ा हासिल किया है और वह सभी का सम्मान है।

बहुत पहले से ही मैं कहता रहा हूं कि भारत को अपने मध्य क्रम के बल्लेबाजी संकट का हल निकालना चाहिए। विश्व कप के दौरान भी भारत ने अपने नंबर चार के स्थान के लिए संघर्ष किया। भारत शिखर धवन की जगह को नहीं भर सकता। राहुल को शिखर की जगह भरने के लिए ऊपर भेजा गया था, लेकिन राहुल उनकी तरह शानदार बल्लेबाजी नहीं कर पाए। इससे रोहित पर भी दबाव आ गया। जब रोहित विफल रहे तो राहुल को जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, लेकिन राहुल असफल रहे। वह नंबर चार के रूप में बेहतर थे। याद रखें, जब जेसन रॉय अपनी चोट से वापस आए तो इंग्लिश टीम बदली हुई नजर आई थी और बेयरस्टो को अपना स्वाभाविक खेल खेलने में मदद भी मिली।

भारत को श्रेयस अय्यर, शुभमन गिल, मनीष पांडे जैसे युवाओं को संवारना चाहिए और आने वाली वेस्टइंडीज दौरे में नंबर दो, नंबर चार, नंबर पांच पर लगातार मौका देना चाहिए। भारत के लिए सैनी और दीपक चाहर भी गेंदबाजी करने के लिए उत्सुक हैं। सबसे बड़ा सवाल कि एमएस धौनी को लेकर है कि क्या वह संन्यास लेने वाले हैं? मुझे लगता है कि कोई भी खेल से बड़ा नहीं है। यह सच है कि धौनी की जगह को आसानी से भरा नहीं जा सकता क्योंकि उनके जैसे खिलाड़ी शायद ही कभी मिलते हैं लेकिन यह भी सच है कि हम समय के सामने असहाय हैं। धौनी से पहले दिग्गज आए और गए और उनके बाद भी कई दिग्गज आएंगे इसलिए मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट में एक परिवर्तन का दौर है।

Posted By: Sanjay Savern