वीवीएस लक्ष्मण का कॉलम। विराट कोहली और भुवनेश्वर कुमार बार-बार अनुभव को दोहरा रहे हैं और दोनों ने दूसरे वनडे के मुश्किल विकेट पर सांमजस्य बैठाया। यह युवाओं के लिए एक अच्छी सीख है। जैसा कि वह अब लंबे समय से आदर्श हैं, कोहली सच में अपने 42वें शतक तक पहुंचने के लिए काबिलेतारीफ थे। जितना मैं उन्हें देखता हूं, उतना ही ज्यादा मैं उनके इरादे और तीव्रता को पाने की योग्यता की प्रशंसा करता हूं।

जब आप लंबे समय तक खेलते हो, जैसा कि विराट कर रहे हैं तो यह मुमकिन होता है कि कई बार आप अपना फोकस खो देते हो। यहीं विराट खास हैं। जब भी वह देश के लिए खेलते हैं, वह हमेशा तैयार रहते हैं और उनका इरादा जितना बाउंड्री लगाने में पक्का दिखता है, उतना ही डिफेंस में भी दिखता है। जैसा कि वह स्ट्राइक बदलते हैं, जैसे वह पहला रन तेजी से दौड़ते हैं और वह सिर्फ अपने ही नहीं अपने साथी के रन पर भी इतना ही तेज दौड़ते हैं।

उनके बारे में एक चीज बहुत अच्छी है कि वह पिच को बहुत जल्दी भांप लेते हैं और उसी के मुताबिक अपना खेल खेलते हैं। उनके पास पिच की गति के अनुरूप अपने बल्ले की स्विंग की गति को बढ़ाने का तोहफा है। यह आसान नहीं है, क्योंकि बल्ले की स्विंग स्वभाविक होती है। वह सहज ज्ञान के मास्टर हैं और उनका इस तरह से सांमजस्य बैठाना ही उनके तीनों प्रारूपों में सफलता का कारण है।

श्रेयस अय्यर ने भी एक बेहतरीन पारी खेली। किसी के लिए भी राष्ट्रीय टीम में वापसी आसान नहीं होती है, लेकिन उन्होंने इंडिया-ए के लिए बड़े रन किए। इससे उन्हें विराट संग लंबे समय तक बल्लेबाजी करने में मदद मिली और इससे उन्हें बड़ा आत्मविश्वास भी मिला होगा। हालांकि उनके मन के अंदर टीम में लंबे समय तक टिकने की बातें चल रही होंगी।

भुवी हमेशा की तरह चालाक दिखे, उन्होंने दोबारा विकेट के अनुरूप गेंदबाजी की और अपनी विविधताओं को बढ़ाया। एक चुनौतीपूर्ण विकेट पर अच्छे लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज को जरूरत थी कि उनके अनुभवी बल्लेबाज लय बनाए, लेकिन एक बार दोबारा क्रिस गेल लय के लिए जूझते दिखे, वैसे ही जैसे भारतीय पारी की शुरुआत में रोहित शर्मा के साथ हुआ।

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Posted By: Vikash Gaur

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