नई दिल्ली, जागरण विशेष। प्रियम गर्ग का नाम भारतीय क्रिकेट के गलियारों में गूंज रहा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से निकलकर अब उनके बल्ले की गूंज भारतीय जूनियर टीम तक पहुंच चुकी है। महज 12 प्रथम श्रेणी मैचों में दो शतक और पांच अर्धशतक सहित एक दोहरा शतक जड़ चुके प्रियम को फटाफट क्रिकेट से ज्यादा टेस्ट क्रिकेट पसंद है। इस महीने ही वह 19 वर्ष के होंगे। अगर उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो जल्द ही वह विराट कोहली की टीम का हिस्सा हो सकते हैं। भारत की जूनियर टीम के दायें हाथ के बल्लेबाज प्रियम गर्ग से अभिषेक त्रिपाठी ने खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:

अब तक के अपने क्रिकेट के सफर को आप कैसे देखते हैं ?

-मैंने अपने करियर में बहुत मेहनत की है। मेरे परिवार, मेरे दोस्तों, मेरे कोचों ने अब तक बहुत मदद की है। इन सभी का मेरे करियर में अहम योगदान है और अभी भी ये सभी मेरा साथ देते हैं।

इतनी कम उम्र में आपने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत की जूनियर टीम में जगह बनाई। इससे दबाव महसूस करते हैं या मौके के रूप में लेते हैं?

-निश्चित रूप से यह मेरे लिए एक मौका ही है। हर मैच को मैं एक मौके की तरह देखता हूं और कोशिश करता हूं कि अपनी टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करूं और उसे जीत दिलाऊं।

-आइपीएल या टेस्ट में से किसे चुनेंगे? आपका लक्ष्य क्या है ?

-मेरी निजी सोच है कि मैं भारत का टेस्ट में प्रतिनिधित्व करूं। मैं आइपीएल भी खेलना चाहता हूं लेकिन मेरा लक्ष्य भारत की तरफ से टेस्ट खेलना है। टेस्ट ही असली क्रिकेट है और यही मेरी पहली प्राथमिकता है।

-आपने भारत की तरफ से जूनियर क्रिकेट खेलते हुए राहुल द्रविड़ के साथ अच्छा समय बिताया है। उनके मार्गदर्शन में आपको क्या-क्या सीखने को मिला है?

-राहुल सर के साथ मैंने जितना भी समय बिताया, उसमें बहुत कुछ सीखा। हर चीज को लेकर वह काफी सकारात्मक रहते हैं। साथ ही वह अपने जीवन और क्रिकेट को लेकर काफी अनुशासित रहते हैं। मेरे हिसाब से एक खिलाड़ी के लिए अनुशासित रहना बहुत जरूरी है। उनकी वजह से मेरे खेल में काफी सुधार हुआ। उनकी जिंदगी खुद एक अध्याय है।

-क्रिकेट से आपका जुड़ाव कैसे हुआ? क्या आपके परिवार में से किसी ने आपको क्रिकेट खेलने के लिए प्रभावित किया ?

-मुझे बचपन से ही क्रिकेट से लगाव रहा है। मेरे परिवार में कोई क्रिकेट नहीं खेला। मैं अपने परिवार में पहला क्रिकेटर हूं। मैंने मेरठ में ही क्रिकेट की एबीसीडी सीखी। वहां के भामाशाह पार्क (विक्टोरिया पार्क) में मैंने संजय रस्तोगी सर के पास क्रिकेट खेलना शुरू किया। करीब 10 साल से क्रिकेट खेल रहा हूं।

-शुरुआत में आपको किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा?

-देखिए मुश्किलें तो मेरे सामने भी आईं लेकिन मेरे करीबियों ने मुझे टूटने नहीं दिया। 2011 में भी मेरे सामने एक कठिन दौर आया था, जब मेरी मां गुजर गई थीं। उस समय मेरी उम्र महज 11 साल की थी। उस घटना ने मुझे काफी हद तक तोड़ दिया था। हालांकि मेरी बहनों, भाई, पापा, मामा, दोस्तों और कोच ने मेरी बहुत मदद की। इन सभी की वजह से ही आज मैं यहां तक पहुंचा हूं।

-अब आपका जीवन काफी व्यस्त हो गया होगा। ऐसे में क्रिकेट, पढ़ाई और दूसरी चीजों के बीच आप कैसे तालमेल बैठाते हैं?

-बीच में मेरी पढ़ाई बंद हो गई थी लेकिन अब दोबारा मैंने पढ़ाई शुरू की है। सच बताऊं तो मुझे दूसरे लड़कों की तरह घूमने या कुछ और करने के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता। मुझे अभ्यास करने और मैच खेलने के अलावा कुछ और करने का समय ही नहीं मिलता है। मेरा फोकस सिर्फ क्रिकेट है।

-क्या कभी आपको ऐसा लगता है कि आपने अपने बचपन का आनंद ठीक से नहीं लिया ?

-ऐसा नहीं है। मुझे शुरू से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। ऐसे में मुझे कभी किसी और चीज के बारे में सोचने की जरूरत नहीं पड़ी।

-आप किसे अपना आर्दश मानते हैं?

-मैं बचपन से ही सचिन तेंदुलकर के खेल को बहुत पसंद करता था। उनके खेल को देख-देखकर ही मैं बड़ा हुआ हूं और उनकी तरह बल्लेबाजी करने की कोशिश करता हूं। मैं उनसे काफी प्रभावित हूं।

ये है प्रियम गर्ग का ट्रैक रिकॉर्ड  

प्रियम गर्ग ने साल 2018 में गोवा के खिलाफ रणजी पदार्पण में किया था, जिसमें उन्होंने शतक जड़ा था। अंडर-19 में भारत की कप्तानी करते हुए इंग्लैंड में वनडे ट्रॉफी का खिताब भी जीता। यहां आखिरी गेंद पर प्रियम गर्ग ने छक्का लगाकर अपना शतक पूरा किया था। इसके अलावा भारत दौरे पर आई अंडर-23 बांग्लादेश टीम के खिलाफ की भारतीय अंडर-23 टीम की कप्तानी भी प्रियम गर्ग ने ही की। 

Posted By: Vikash Gaur

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