'एक मैच से करियर तय नहीं होता', ऑकलैंड में गदर मचाने के बाद अंशुल कंबोज ने आलोचकों को दिया करारा जवाब
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआती असफलताओं के बावजूद अंशुल कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में शानदार प्रदर्शन किया और 'प्लेयर ऑफ द मैच' बने।

अंशुल कंबोज

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआती विफलता कई बार प्रतिभा पर सवाल खड़े कर देती है, लेकिन अंशुल कंबोज ने हार मानने के बजाय अपनी गेंदबाजी को धार देने पर ध्यान दिया। न्यूजीलैंड के विरुद्ध पहले वनडे में हरियाणा के इस तेज गेंदबाज ने दिखा दिया कि भारतीय टीम प्रबंधन का उन पर भरोसा क्यों कायम है।
ऑकलैंड के ईडन पार्क में अपना दूसरा ही वनडे खेल रहे कंबोज ने 10 ओवर में महज 22 रन देकर दो विकेट झटके और उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, गेंद को सीम से मूव कराने की क्षमता और बढ़ी हुई रफ्तार ने कीवी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
अपनी रणनीति पर अड़े रहे अंशुल कंबोज
कंबोज की इस कामयाबी के पीछे उनकी मेहनत के साथ बेहतर योजना भी रही। मोहम्मद सिराज की जगह टीम में शामिल किए गए अंशुल ने रविवार को नेट्स पर विराट कोहली और रोहित शर्मा को गेंदबाजी की और अगले दिन आराम किया। मैदान पर इसका असर साफ दिखाई दिया। उन्होंने शुरुआत से ही एक ही लेंथ पर लगातार गेंदबाजी की और बल्लेबाजों के आक्रामक प्रयासों के बावजूद अपनी रणनीति नहीं बदली।
कंबोज ने की कसी हुई गेंदबाजी
कंबोज ने पहले स्पेल में पांच ओवर में केवल 12 रन दिए। उनकी कसी हुई गेंदबाजी ने न्यूजीलैंड पर दबाव बनाया, जिसका फायदा दूसरे छोर से अर्शदीप सिंह और गुरनूर बराड़ ने उठाया। बाद में दूसरे स्पेल में कंबोज ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और 140 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास गेंदबाजी करते हुए मिचेल सैंटनर और नाथन स्मिथ को लगातार दो ओवरों में पवेलियन भेज दिया। इस प्रदर्शन ने न्यूजीलैंड की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई।
एक मैच करियर नहीं तय करता है: अंशुल कंबोज
मैच के बाद कंबोज ने कहा कि एक मुकाबले से किसी खिलाड़ी का करियर तय नहीं होता। उन्होंने कहा, मैं पहले भी वही चीजें कर रहा था। मैनचेस्टर टेस्ट के बाद अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली। मैं बाहर की बातों पर ध्यान नहीं देता और अपनी गेंदबाजी पर लगातार काम करता हूं। उन्होंने यह भी माना कि अच्छी तैयारी से आत्मविश्वास बढ़ता है और मैच के दौरान अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना आसान हो जाता है।
कंबोज की खराब शुरुआत
दरअसल, अंशुल के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत उम्मीदों के अनुसार नहीं रही थी। पिछले साल मैनचेस्टर में इंग्लैंड के विरुद्ध टेस्ट पदार्पण करने वाले अंशुल ने 18 ओवर गेंदबाजी की और केवल एक विकेट ले पाए। इसके बाद जब टीम के साथ दोबारा जुड़े तो उनकी बढ़ी हुई रफ्तार से टीम प्रबंधन प्रभावित हुआ और उन्हें फिर मौका देने के पक्ष में दिखा। इसके बाद उन्होंने पिछले महीने गुवाहाटी वनडे में पदार्पण किया, लेकिन फिर काफी महंगे साबित हुए थे और नौ ओवर में 82 रन लुटाए थे।
शुभमन गिल ने कंबोज पर जताया था भरोसा
इसके बावजूद टीम प्रबंधन और कप्तान शुभमन गिल ने उनका साथ नहीं छोड़ा। गिल ने साफ कहा था कि कंबोज और आकिब नबी टीम की योजनाओं का हिस्सा बने रहेंगे। कप्तान के इस भरोसे और अपनी मेहनत का जवाब कंबोज ने आकलैंड में गेंद से दिया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम को तेज गेंदबाजी में एक उपयोगी विकल्प भी दिया है।
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