नई दिल्ली, जेएनएन। वर्ल्ड कप 2019 के फाइनल मैच में मार्टिन गप्टिल के थ्रो पर गेंद बेन स्टोक्स के बल्ले से टकराकर बाउंड्री के बाहर चली थी थी और कुमार धर्मसेना ने इस पर छह रन दे दिए थे। इसके बाद उनकी जमकर आलोचना की गई थी। अब आईसीसी ने उनके इस फैसले के बचाव में उतर आई है। आईसीसी के मुताबिक धर्मसेना द्वारा लिया गया ये फैसला सही प्रक्रिया के तहत लिया गया था। 

आईसीसी के जेनरल मैनेजर ज्यॉफ एलार्डिस ने एक इंटरव्यू में कहा कि सबने मिलकर ये फैसला किया था। उन्होंने कहा कि ये फैसला मैदान पर मौजूद अंपायर्स को करना था कि दोनों बल्लेबाज गेंद फेंके जाने से पहले एक दूसरे को पार कर चुके हैं या नहीं। उस दौरान जो भी हुआ वो फैसला मैदानी अंपायरों ने मिलकर लिया था। मैं कह सकता हूं कि इसके लिए सही प्रक्रिया का पालन किया गया था। उन्होंने कहा कि जब मैदान पर मौजूद अंपायर इस पर फैसला कर रहे थे तब वो आईसीसी के नियमों से अच्छी तरह से वाकिफ थे। इस तरह का फैसला थर्ड अंपायर या फिर रेफरी के पास नहीं जाता है। मैच रेफरी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है जब मैदान पर मौजूद अंपायर खुद कोई फैसला कर रहा होता है। 

गौरतलब है कि वर्ल्ड कप का फाइनल मैच पहले बराबरी पर खत्म हो गया था और फिर सुपर ओवर खेला गया। इस नियम के बारे में एलार्डिस ने कहा कि सबकी सहमित से वर्ल्ड कप फाइनल का विजेता तय होना चाहिए। सुपर ओवर का नियम भी पुराना है जो इससे पहले यानी 2011, 2015 और 2019 विश्व कप में लागू किया गया जिसके कि विनर का फैसला किया जा सके। आपको बता दें कि धर्मसेना के इस फैसले पर पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने कहा था कि उस जगह इंग्लैंड को 6 की जगह 5 रन ही मिलना चाहिए था क्योंकि गप्टिल के थ्रो करने से पहले दोनों बल्लेबाज एक-दूसरे को क्रॉस नहीं कर पाए थे। इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी। 

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Posted By: Sanjay Savern

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