नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर में काफी प्रतिभा थी लेकिन अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाने की वजह से उन्होंने अपना नुकसान करवा लिया। पूर्व मुख्य चयनकर्ता दिलिप वेंगसारकर का मानना है कि गंभीर का गुस्सा उनके करियर में बड़ी रुकावट बना।

जब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने एक के बाद एक संन्यास लिया तो भारतीय टेस्ट टीम में खाली स्थान बना था लेकिन फैंस को इससे इतना डर नहीं लगा था क्योंकि उनको पता था गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग अगली पीढ़ी को संभालेंगे। दुर्भाग्य की बात रही कि द्रविड़, लक्ष्मण और सचिन के जाने के तुरंत ही भारत ने दोनों ओपनरों को भी खो दिया। मुरली विजय और शिखर धवन ने उनकी जगह ले ली थी।

पूर्व मुख्य चयनकर्ता दिलिप वेंगसरकर जिन्होंने सहवाग का बेहतरीन दौर और गंभीर के उदय को देखा है टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया कि गंभीर ने जितना खेला उससे कहीं ज्यादा खेल सकते थे। उनके करियर के लंबा ना होने के पीछे की वजह गुस्सा था।

"कहीं कम आंके जाने वाल खिलाड़ी, उनके अंदर कहीं ज्यादा प्रतिभा थी लेकिन अपने गुस्से और भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। मुझे लगता है कि जिस तरह की क्षमता उनके अंदर थी उनको भारत के लिए और भी ज्यादा समय तक खेलना चाहिए था।" 

साल 2003 में गंभीर ने बांग्लादेश के खिलाफ डेब्यू किया था और 2016 में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। इसके बाद साल 2018 में उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा कर दी।

गंभीर ने भारत की तरफ से महज 54 टेस्ट मैच खेले जिसमें 4154 रन बनाए जिसमें 9 शतकीय पारी शामिल थी। टेस्ट में उनका औसत 41.95 का रहा। साल 2009 में गंभीर को आईसीसी का सबसे बेहतरीन टेस्ट खिलाड़ी चुना गया था। इस साल उन्होंने 84.60 की औसत से 8 टेस्ट में 1269 रन बनाए थे उन्होंने पांच लगातार शतक और चार अर्धशतकीय पारी खेली थी।

साल 2007 में जब भारत जब पहली बार टी20 विश्व चैंपियन बना तो फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ गंभीर ने 54 गेंद पर 75 रन बनाए थे। वहीं साल 2011 में जब भारत ने 28 साल बार विश्व कप का खिताब जीता था तो फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने 97 रन की पारी खेली थी।

 

Posted By: Viplove Kumar

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