नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) को 23 तारीख को सौरव गांगुली के तौर पर नया अध्यक्ष और जय शाह के तौर पर नया सचिव मिलेगा। इसी के साथ ही वर्तमान कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) भी बोर्ड से हट जाएगी। खन्ना को लगता है कि जय शाह और सौरव गांगुली की जोड़ी भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगी। अभिषेक त्रिपाठी ने बीसीसीआइ के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना से बातचीत की। पेश है मुख्य अंश-

-आप बीसीसीआइ अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल को कैसे देखते हैं?

-मैं इसको काफी संतोषजनक कार्यकाल कह सकता हूं। हालांकि हमारे ऊपर काफी बंदिशें थीं और हम लोग सीओए की देखरेख में और उनके आदेशानुसार काम कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने हमें जनवरी 2017 में नियुक्त किया था। उसी महीने सीओए की भी नियुक्ति हुई थी। ऐसे में मेरा मानना है कि मेरा जितने भी दायित्व थे, वो मैंने ईमानदारी से निभाए।

-नया बीसीसीआइ आ रहा है जिसके अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह बनने जा रहे हैं। आप इस नई टीम को कैसे देखते हैं और आपके हिसाब से उनके सामने कैसी चुनौतियां होंगी ?

-सबसे पहले मैं सौरव गांगुली, जय शाह और बाकी नए पदाधिकारियों को बधाई देना चाहता हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि ये सभी भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाईयों तक ले जाएंगे। इनके साथ सबसे अच्छी बात यह है कि ये सभी अनुभवी हैं। सौरव काफी अनुभवी हैं। वह पूर्व भारतीय कप्तान हैं और बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं। ऐसे ही जय शाह भी गुजरात क्रिकेट के लिए अच्छा काम कर रहे हैं और वहां एक खूबसूरत स्टेडियम भी उन्हीं की देख रेख में बन रहा है। बाकी भावी पदाधिकारी भी अपने-अपने संघों में काफी सक्रिय रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इस नई टीम को अपने अधिकार और दायित्व पता हैं जिसके नतीजे जल्दी ही आपको देखने को मिलेंगे।

-हालांकि लोढ़ा समिति की सिफारिशों के हिसाब से तो गांगुली और शाह के पास 10 से 12 महीने का ही समय है। क्या आपको लगता है कि इन्हें और ज्यादा समय मिल पाएगा?

-किसी भी जिम्मेदार और काबिल प्रशासक के लिए कुछ महीने भी काफी होते हैं। मुझे उम्मीद है कि इसका भी कोई ना कोई रास्ता निकलेगा।

-कहा जा रहा है कि आइसीसी में बीसीसीआइ की पकड़ ढीली हुई है। अब इस नई टीम के लिए ऐसी चुनौतियों को कैसे देखते हैं ?

-सौरव गांगुली प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आइसीसी से जुड़े रहे हैं। इन सारे मसलों की उन्हें बखूबी जानकारी है। मुझे उम्मीद है कि वह और उनकी टीम इन नई चुनौतियों को स्वीकार करेगी और आइसीसी के समक्ष भारतीय पक्ष को मजबूत करेगी और भारतीय हितों का ख्याल रखा जाएगा।

-आपके कार्यकाल के दौरान सीओए की ओर से पदाधिकारियों को काफी दबाव में काम करना पड़ा। उस दबाव को संभालना आपकी टीम के लिए कितना मुश्किल रहा ?

-कुछ मौकों पर दबाव को झेलना बेहद मुश्किल रहा है लेकिन वक्त के साथ सब कुछ आगे बढ़ता गया और अब कोई गिला शिकवा नहीं है।

-तो क्या समझा जाए कि आप सीओए के कामकाज से खुश हैं ?

-नहीं, मैं सीओए के कामकाज से खुश नहीं हूं लेकिन बाधाएं आती हैं, रास्ते निकलते हैं और इंसान इन रास्तों और बाधाओं को पार करके आगे बढ़ता है। मैं किसी की बुराई नहीं करना चाहता लेकिन अब हमें आगे के बारे में सोचने की जरूरत है।

-संघों से जुड़े मुद्दे रहे हों या फिर क्रिकेट की बेहतरी के लिए ऐसा कोई भी काम जो आप इस नई टीम से करवाना चाहते हों?

-देखिए घरेलू क्रिकेट के लिए गांगुली ने अपनी नियुक्ति से पहले ही बयान दिया है कि वह इसको बेहतर करने के लिए कदम उठाएंगे। मुझे नहीं लगता कि घरेलू क्रिकेट की समझदारी उनसे बेहतर किसी को होगी। उनकी पूरी टीम इस मुददे पर आने वाले समय में बैठेगी और विचार विमर्श करेगी। ये टीम क्रिकेट संघों की सभी न्यायसंगत मांगों को पूरा करेगी।

-तो क्या अब आपका अगला फोकस डीडीसीए होगा ?

-बिलकुल, मैं डीडीसीए का उपाध्यक्ष रहा और अभी भी सदस्य हूं। अगर मैं बीसीसीआइ अध्यक्ष बना तो उसके पीछे डीडीसीए और उसके सदस्य ही हैं। अगर मैं डीडीसीए से चुनकर नहीं जाता तो बीसीसीआइ का उपाध्यक्ष नहीं बनता और सुप्रीम कोर्ट मुझे कार्यवाहक अध्यक्ष नहीं बनाती। मैंने अपने पद पर रहते दिल्ली के खिलाडि़यों, कोच, सहायक स्टाफ की बेहतरी के लिए काम किया और आगे भी करता रहूंगा।

Posted By: Vikash Gaur

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