नई दिल्ली, पीटीआइ। अजिंक्य रहाणे ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज के आखिरी तीन मुकाबलों में भारतीय टीम के कप्तान की जिम्मेदारी निभाई। नियमित कप्तान विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रहाणे ने टीम को तीन में से दो मैचों में जीत दिलाई और सीरीज पर भी कब्जा जमाया। उन्होंने कहा कि एक कप्तान उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी टीम होती है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज जीतने का श्रेय पूरी टीम को जाता है।

भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड टेस्ट में बुरी तरह से हारी थी। दूसरी पारी में पूरी टीम महज 36 रन पर ढेर हो गई थी। इसके बाद रहाणे ने टीम की कमान संभाली और मेलबर्न में शानदार शतक जमाते हुए टीम के जीत की नींव रखी। सिडनी में मैच ड्रॉ हुआ जबकि ब्रिसबेन में 329 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल कर भारत ने इतिहास रच दिया।

रहाणे ने बताया कि उनको कभी भी टीम में अपने जगह को लेकर डर नहीं रहा। पीटीआइ से बात करते हुए उन्होंने कहा, "ईमानदारी से कह रहा हूं, मुझे तो ऐसा कभी भी नहीं लगा कि मेरी जगह इस टीम में खतरे में है। कप्तान और टीम मैनेजमेंट दोनों को ही हमेशा से मेरे उपर पूरा भरोसा था। हां, कुछ सीरीज के दौरान कभी ऐसा हो जाता है कि एक खिलाड़ी लय में नहीं हो, लेकिन इससे ऐसा तो नहीं है कि उस खिलाड़ी का क्लास चला गया। फॉर्म में लौटने के लिए एक खिलाड़ी को कुछ नहीं बस एक अच्छी पारी की जरूरत होती है।"

रहाणे ने बताया कि कप्तान कोहली ने उनका हमेशा ही साथ दिया है, "जब मैं खराब दौर से गुजर रहा था तो कप्तान ने मेरा हौसला बढ़ाया। आपको यह बात हमेशा ही जानकर सहज महसूस कराती है कि कप्तान का समर्थन आपको हासिल है। इसके बाद आप बिना किसी चिंता के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने पर ध्यान लगाते हैं।"

"मैं उनकी कप्तानी का सम्मान करता हूं और यही कहना चाहूंगा कि हर एक आदमी की कप्तानी अलग होती है। एक कप्तान उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी टीम होती है। जब आप एक मैच या सीरीज जीत लेते हैं तो यह हमेशा ही एक सामुहिक प्रयास होता है ना कि किसी एक आदमी का योगदान। यह तो बस टीम के खिलाड़ी ही होते हैं जो आपको एक अच्छा कप्तान बनाते हैं। इस सीरीज का पूरा श्रेय हमारी टीम को ही जाता है।"  

Ind-vs-End

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप