यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों की एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग विषय पर दिया प्रशिक्षण, सिखाया, कैसे पहचानें अपराधी
पावर प्रजेन्टेशन के माध्यम से विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। संस्थाओं के साथ समन्वित रूप से कार्य करने पर जोर दिया। पुलिस ...और पढ़ें

रायपुर, डिजिटल डेस्क। पुलिस अधिकारियों को मानव दुर्व्यापार विषय पर संवेदीकृत करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण दिया गया। नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में जिलों में गठित एन्टी ह्यूमेन ट्रेफिकिंग यूनिट के नोडल अधिकारी और इस युनिट से जुड़े पुलिस अधिकारी शामिल हुए। यह आयोजन पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा के निर्देशन पर किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं मानव दुर्व्यापार विषय के अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. पी.एम. नायर ने इस विषय पर अपना व्यापक व्याख्यान दिया।
पावर प्रजेन्टेशन के माध्यम से विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया
एक ओर जहॉं उन्होंने मानव तस्करी एवं मानव दुर्व्यापार में अंतर के बारे में प्रतिभागियों को समझाया वहीं मानव दुर्व्यापार के पीड़ित एवं अपराधियों की सही पहचान स्थापित करने के पहलुओं को काफी बारिकी से बताया। अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने देश के कई बड़े शहरों का उदाहरण प्रस्तुत कर उन राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर चलाये गये रेस्क्यू ऑपरेशन से मुक्त कराये गये बच्चों, महिलाओं की केस स्टडी की भी जानकारी दी। डॉ. नायर ने पावर प्रजेन्टेशन के माध्यम से इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया।
संस्थाओं के साथ समन्वित रूप से कार्य करने पर जोर दिया
प्रशिक्षण के शुभारंभ अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, प्रशासन श्री हिमांशु गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि मानव दुर्व्यापार एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या है, इसे रोकने के लिये पुलिस को संवेदीकृत किया जाना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में विगत वर्षों में मानव तस्करी के अपराधों में लगातार गिरावट देखने को मिली है। साथ ही इस अपराध से प्रभावित लोगों में से लगभग शत्-प्रतिशत पीड़ितों का मुक्त कराने में छत्तीसगढ़ पुलिस ने सफलता अर्जित की है। उन्होंने अन्य राज्यों से रेस्क्यू किये गये मानव दुर्व्यापार के पीड़ितों का पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए समस्त हितधारक संस्थाओं के साथ समन्वित रूप से कार्य करने पर जोर दिया।
पुलिस अधिकारी ऐसे प्रकरणों की विवेचना संवेदनशीलता से करें
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, योजना, प्रबंध प्रदीप गुप्ता ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानव दुर्व्यापार अन्य अपराधों से हटकर है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति अनेक प्रकार से शोषित होते हैं, इसलिए पुलिस अधिकारियों को ऐसे प्रकरणों की विवेचना संवेदनशीलता करने के साथ ही संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए उनके तत्काल पुनर्वास की व्यवस्था किया जाना चाहिए।
विद्यमान कानून एवं प्रक्रिया बारे प्रतिभागियों को जानकारी दी
अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस मुख्यालय के पुलिस महानिरीक्षक एस.सी. द्विवेदी एवं डॉ. संजीव शुक्ला ने भी प्रदेशभर से आये पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए मानव दुर्व्यापार के बारे में उनका ज्ञानवर्धन किया। दूसरे सत्र में हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक परवेश राजपूत द्वारा मानव दुर्व्यापार के लिए विद्यमान कानून एवं प्रक्रिया के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी गई।
मनो-सामाजिक प्रभाव पर एनजीओ की भूमिका का विस्तार वर्णन
महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त संचालक क्रिस्टिना लाल तथा श्रम विभाग के उपायुक्त डी.पी. तिवारी द्वारा मानव तस्करी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए चलाये जा रहे विभिन्न शासकीय योजनाओं के बारे में प्रतिभागियों को बताया गया। साथ ही बस्तर सामाजिक जन विकास समिति के संस्थापक सुशील पाण्डेय ने मानव तस्करी के पीड़ितों की रेस्क्यू एवं रेस्क्यू पश्चात उनके पुनर्वास तथा पीड़ितों पर पड़ने वाले मनो-सामाजिक प्रभाव पर एनजीओ की भूमिका का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया।
एनजीओ के प्रतिनिधियों सहित कुल 180 प्रतिभागियों ने भाग लिया
प्रशिक्षण में राज्य के एन्टी ह्यूमेन ट्रेफिकिंग यूनिट के नोडल अधिकारी एवं इस इकाई में पदस्थ पुलिस अधिकारियों के अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा यूनिसेफ एवं एनजीओ के प्रतिनिधियों सहित कुल 180 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक ओ.पी. पाल, उप पुलिस महानिरीक्षक आर.एन. दास, विनीत खन्ना, हिमानी खन्ना एवं मिलना कुर्रे विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पुलिस अधीक्षक,सीआईडी एम.एन. पाण्डेय ने किया।
