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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CG News: मतांतरण रोकने को छत्तीसगढ़ में कानून को और सख्त बनाने की तैयारी, भाजपा ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

By Jagran News Edited By: Jeet Kumar
Published: Tue, 30 Jan 2024 05:00 AM (IST)

छत्तीसगढ़ में नवगठित भाजपा सरकार मतांतरण रोकने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम-2006 के प्रविधानों को सख्त बनाने की ...और पढ़ें

मतांतरण रोकने को छत्तीसगढ़ में कानून को और सख्त बनाने की तैयारी
मतांतरण रोकने को छत्तीसगढ़ में कानून को और सख्त बनाने की तैयारी

 राज्य ब्यूरो, रायपुर। छत्तीसगढ़ में नवगठित भाजपा सरकार मतांतरण रोकने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम-2006 के प्रविधानों को सख्त बनाने की तैयारी कर रही है। सरकार के विधि विभाग ने अन्य राज्यों में लागू मतांतरण विरोधी कानून का अध्ययन शुरू कर दिया है। विधि विभाग के सूत्रों के अनुसार संशोधित कानून में 10 साल तक की सजा का प्रविधान भी शामिल किया जा सकता है। मौजूदा अधिनियमत में मतांतरण के दोषी पाए लोगों को तीन साल की जेल की सजा और 20 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रविधान है।

संविधान में कोई स्पष्ट अनुच्छेद नहीं

संविधान में मतांतरण रोकने के लिए स्पष्ट अनुच्छेद उल्लेखित नहीं है। अनुच्छेद 25 से लेकर 28 के बीच धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लेख है, जिसमें देश के हर व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता हैं। इससे पहले राजनीतिक दलों, धार्मिक समुदायों व सामाजिक संगठनों ने संविधान संशोधन व राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की गई थी। इन सब के बीच राज्यों ने अपने-अपने कानून लागू किए हैं।

मतांतरण का दंड पाकर भी कांग्रेस के दिल में ठंडक नहीं: भाजपा

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता केदारनाथ गुप्ता ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा छत्तीसगढ़ में मतांतरण पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मतांतरण का दंड पाकर भी कांग्रेस के दिल में ठंडक नहीं पहुंची। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के राज में हुए पाप का हिसाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उनसे ही मांगें। बैज तब कहां थे जब छत्तीसगढ़ में बस्तर अंचल में आदिवासियों पर मतांतरण को लेकर भूपेश बघेल सरकार का दमन चक्र चल रहा था। दीपक तब कहां थे जब सरगुजा में आदिवासियों को जन्माष्टमी मनाने से रोका जा रहा था। वह तब कहां थे जब कांग्रेस की तत्कालीन भूपेश सरकार पूरे प्रदेश में मतांतरण के पक्ष में तांडव करते हुए रासुका लगा रही थी।

किस राज्य में कौन सा कानून

ओडिशा: मतांतरण पर कानून बनाने वाला पहला राज्य, जहां वर्ष 1967 में कानून लागू हुआ। अधिकतम दो वर्ष की जेल और अधिकतम 10 हजार रुपये तक जुर्माना तय किया गया।

मध्य प्रदेश : वर्ष 1968 में मतांतरण पर कानून बनाने वाला दूसरा राज्य बना। वर्ष 2020 में शिवराज सरकार ने कानून में संशोधन किया। अधिकतम 10 वर्ष की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान किया।

अरुणाचल प्रदेश : मतांतरण पर रोक लगाने के लिए 1978 में कानून बना। दो वर्ष की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।

गुजरात : 2003 के कानून में अप्रैल 2021 में संशोधन हुआ। इसे गुजरात फ्रीडम आफ रिलीजन (अमेंडमेंट) एक्ट 2021 नाम दिया गया। इसमें अधिकतम सात वर्ष की कैद और अधिकतम तीन लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रविधान है।

हिमाचल प्रदेश : वर्ष 2006 में मतांतरण विरोधी कानून बनने के बाद 2019 में संशोधन हुआ। वर्ष 2022 के अगस्त में 'द फ्रीडम आफ रिलीजन (संशोधित)' बिल पारित। इसमें 10 वर्ष की कैद और दो लाख रुपये के जुर्माना का प्रविधान है।

झारखंड : वर्ष 2017 में कानून बना। अधिकतम एक लाख रुपये जुर्माना व चार वर्ष की सजा का प्रविधान।

उत्तराखंड : वर्ष 2018 में कानून बना। 10 वर्ष की जेल और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा का प्रविधान। साथ ही पीडि़त को अलग से मुआवजा देना होगा।

उत्तर प्रदेश : 27 नवंबर, 2020 को 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून' लागू हुआ। इसमें दोषी व्यक्ति को 10 वर्ष की जेल और 15 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना प्रविधान।

 30 सितंबर, 2022 को कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण अधिनियम-2022 लागू हुआ। कानून का उल्लंघन करने वाले को तीन से 10 साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना का प्रविधान।