रायपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए सिर्फ प्रशासन ही नहीं जनभागीदारी की भी जरूरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आधुनिकतम सुविधाएं बढ़ाने के लिए कदम उठाना होगा। इससे स्वत: ही शहर की अर्थव्यवस्था में और मजबूती आएगी। लोगों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। यह बात शनिवार को 'नईदुनिया कार्यालय में आयोजित माय सिटी माय प्राइड अभियान के तहत राउंड टेबल कांफ्रेंस में सामने आई। कॉन्फ्रेंस में शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर अब तक हुई पांच राउंड की चर्चा का सार निकाला गया। साथ ही कुछ नए बिंदु भी जोड़े गए। विशेष बात यह रही कि इस कांफ्रेंस का संचालन रायपुर नगर निगम के मेयर प्रमोद दुबे ने किया।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

विशेषज्ञों के मुताबिक शिक्षा में बच्चों के लिए आधुनिकतम सिलेबस, अंग्रेजी माध्यम का स्कूल, कॉलेजों में आधुनिकतम लैब, लाइब्रेरी और पर्याप्त शिक्षकों की जरूरत है। इसी तरह स्वास्थ्य के मामले में नगर निगम स्तर पर एक हेल्थ ऑफिसर की जरूरत है जो कि शहर में आए दिन पीलिया, मलेरिया, डेंगू, डायरिया जैसी बीमारियों के लिए एक्शन प्लान के साथ काम करा सके।

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहतर सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, पेयजल और अन्य सुविधाओं के लिए काम करने की जरूरत है। अर्थव्यवस्था को मजबूत कर लोगों को रोजगार दिलाने के लिए काम किया जाना चाहिए। सुरक्षा की कड़ी चुनौती को ध्यान में रखते हुए शहर में इंटेलिजेंस सिस्टम, लड़कियों के लिए कंट्रोल रूम सहित पैनिक बटन सिस्टम लगाने के लिए जोर दिया गया।

पुराने रायपुर का रिनोवेशन करना चुनौतीपूर्ण: प्रमोद दुबे

रायपुर नगर निगम के मेयर प्रमोद दुबे का कहना है कि संसाधन बहुत सीमित हैं और हमें इनका उपयोग करते हुए ही शहर को विकसित करना है। पुराने रायपुर को एकदम स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना चुनौती है। शहर में लगातार आबादी बढ़ रही है। 70 वार्ड के रायपुर में पिछले कुछ साल पहले ही 33 गांव जुड़े, 730 नई कॉलोनियां बनी। सबसे पहली जरूरत पानी की उपलब्धता और सीवरेज है। रायपुर में 50 और 80 एमएलडी का नया फिल्टर प्लांट बनकर तैयार हो गया है। हमें संसाधनों के रीयूज पर भी ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि नया रायपुर का नाम देशभर में रोशन है, वहां की आबादी 14 हजार है और यहां 14 लाख है । ऐसे में नये रायपुर की तुलना में 215 वर्ग किमी में फैले पुराने रायपुर को दोबारा विकसित करना चुनौतीपूर्ण है। पंडरी में 959 करोड़ की सड़क बनाई है, पानी की टंकी बनाई, लेकिन यहां पार्किंग की सुविधा करना प्राथमिकता में है। महापौर दुबे ने कहा कि नईदुनिया ने स्वच्छता अभियान और पौधरोपण अभियान चलाया जो काबिले तारीफ है।

10 हजार लोगों को दिया मकान, किसी को उजाड़ा नहीं
महापौर प्रमोद दुबे ने बताया कि हमने लोगों को शहर से उजाड़ा नहीं। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ 10 हजार लोगों को घर बनाकर दिया गया। मोर जमीन मोर मकान योजना के तहत जिनके पास खुद की जमीन है। उनके लिए 2 लाख 30 हजार रुपये तक की मदद घर बनाने के लिये किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट के पास जहां ऑक्सीजोन बन रहा है, पहले वहां कॉम्पलेक्स बनाने का प्रस्ताव था, हमने सरकार से कहा कि नक्शा पास ही नहीं करेंगे, अब यहां ऑक्सीजोन बन रहा है।

इन बिंदुओं में मिले सार्थक सुझाव
शिक्षा
- बच्चों के लिए सुनियोजित प्लान बनाने की जरूरत है।
- आरटीई शुल्क की प्रतिपूर्ति समय पर दी जाये और स्कूल स्तर पर ही दाखिले के लिए अनुमति दी जाये।
- स्कूलों से भी नगर निगम कचरा उठाने की व्यवस्था करे।
- स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का संचालन करने पर जोर दिया जाये।
- शिक्षण संस्थानों के आसपास से पान, गुटखा और शराब की दुकानें हटाईं जाएं।
- प्री-प्राइमरी और पहली कक्षा के बीच सिलेबस बनाकर तालमेल बिठाया जाये।

इंफ्रास्ट्रक्चर
- शहर के विकास के लिए इंट्रीग्रेटेड प्लान की महती जरूरत है।
- बाजार वाले हिस्सों में मल्टी पार्किंग, ओवरब्रिज, बस स्टैंड के पास स्टॉपेज और टॉयलेट आदि सुविधा दी जाये।
- शहर की सड़कों पर लगने वाले बाजार को हटाया जाए इससे पार्किंग व्यवस्था ठीक होगी।
- गली-मोहल्ले में लगे ब्रेकर को गाइडलाइन के हिसाब से बनाया जाए।

स्वास्थ्य
- स्वास्थ्य के हिसाब आईसोलेशन वार्ड अस्पतालों में होना चाहिए।
- नगर निगम स्तर पर एमबीबीएस हेल्थ ऑफिसर की जरूरत है।

अर्थव्यवस्था
- व्यापार-उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्रीज इलाके में भी सुविधा बढ़ाने की जरूरत है।
- बेहतर रोड कनेक्टिविटी बढ़ाने से थोक व्यापार शहर में बेहतर तरीके से होगा
- ऑटोमोबाइल के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब, जेम्स एंड ज्वैलरी आदि विकसित करने की जरूरत है।

सुरक्षा
- कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा देकर उनके सुझावों पर अमल किया जाये।
- शहर के युवाओं में स्कार्फ बांधकर वाहन चलाने पर प्रतिबंध किया जाये।
- सीसीटीवी कैमरे का जाल बिछाया जाये।
- प्रमुख सड़कों पर मवेशियों के बैठने से आए दिन वाहन सवार टकराकर हादसे का शिकार हो रहे इस पर रोक लगाएं।

ये होंगे बदलाव
सुरक्षा के लिए निगम का भी मिलेगा सहयोग: महापौर प्रमोद दुबे के मुताबिक पुलिस और नगर निगम मिलकर इंटेलिजेंस कैमरा सिस्टम लगाएंगे। बालिकाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन होंगे। इसमें एक कमांड से ही सभी विभागों को जानकारी मिल जाएगी।

चौक-चौराहे होंगे सुदृढ़: तेलीबांधा और कटोरा तालाब जैसे ही दूसरे तालाबों को भी सुदृढ़ किया जाएगा। 40 चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण का काम। पेयजल के लिए 50 और 80 एमएलडी का नया प्लांट बनेगा।

मिलेगा लाखों को रोजगार: तिल्दा में मेगा इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जा रहा है, यहां से 4 से 5 लाख रोजगार सृजित होगा। इस इलाके में कंपनियों से मिलने वाले सीएसआर फंड का इस्तेमाल करके विकसित किया जाएगा।

जल्द ही नया बस स्टैण्ड
महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि रायपुर में गांव के आसपास से करीब तीन लाख लोग रोज कमाने के लिए आते हैं। इससे पुराने शहर का ट्रैफिक अधिक बढ़ जाता है। राज्य सरकार को प्राथमिकता तय करनी चाहिए कि विकास किस तरफ से शुरू हो। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक को कम करने के लिए मेरी प्राथमिकता में रावणभाठा का बस स्टैण्ड है।

पॉलीथीन मुक्त होगा शहर
जिम्मेदारों ने कहा कि सड़क, ओपन जिम आदि को बनाने के साथ इसके मेंटनेंस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। लाइवलीहुड सेंटरों से स्व-सहायता समूह के जरिये अब कपड़े के थैले तैयार करवाए जा रहे हैं। रायपुर को पॉलीथिन मुक्त किया जाएगा। शहर में कुत्तों के आतंक को कम करने का प्रयास करते हैं, लेकिन यहां गाइडलाइन के कारण दिक्कतें हैं। कुछ मामलों में सरकारीकरण की जगह सरलीकरण की जरूरत है।

इस बार होगा विसर्जन कुंड: इस बार तट पर नहीं, बल्कि विसर्जन कुंड में गणेश की प्रतिमा विसर्जित होंगी काम पूरा हो गया है।

पानी के शुद्धिकरण की प्रक्रिया जल्द: शहर में 303 करोड़ का एसटीपी यंत्र लगेगा जो कि गंदे पानी को शुद्ध करेगा।

झुग्गी-मुक्त होगा शहर: शहर में बीएसयूपी मकान के लिए 9 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यहां विस्थापित लोगों के बच्चों को पढ़ाने के लिए नगर निगम सुगम सुविधा देगा।

जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है विकास
छत्तीसगढ़ उद्योग महासंघ के अध्यक्ष महेश कक्कड़ ने कहा कि औद्योगिक विकास समेत रायपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य में चौतरफा विकास तभी संभव है, जब इसमें जनभागीदारी भी हो। इसके लिए बिना विकास की कल्पना करना ठीक नहीं है। मैंने 1994 में ही सरकार को अलर्ट कर दिया था कि उरला-सिलतरा के बाद तिल्दा में मेगा इंडस्ट्रियल बनाने से रायपुर उस भीड़ को नहीं सह पाएगा। उसके हिसाब से यहां सड़कें चौड़ी करने के साथ-साथ ओवरब्रिज और शहर की तरह इलाके को विकसित करना होगा।

विकास की कड़ी यहां जुड़ी है, निश्चित रूप से यहां 4 से 5 लाख रोजगार मिलेगा। लेकिन बिना जनभागीदारी के संभव नहीं होगा। मैं खुद अपने कॉलेज एनआईटी में एल्युमिनी तैयार किया। आज यहां डेटा से 11 हजार लोग जुड़े हैं। कोई भी समस्या का तुरंत हो जाता है। एक-दूसरे का सभी सपोर्ट करते हैं।

हर बच्चे को मिले बेहतर शिक्षा
अशासकीय प्राचार्य मंच के अध्यक्ष अशोक दुबे ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास है, लेकिन उनकी खामियों को दूर करने की आवश्यकता है। आरटीई के तहत बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया को आसान किया जा सकता है। स्कूलों के सिलेबस को आधुनिकता के हिसाब से अपडेट करने की जरूरत है। किताबों की गलतियों को भी दूर किया जाए।

स्कूलों के खेल मैदान में बारिश के दिनों पानी भर जाता है इसकी निकासी के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। आरटीई के तहत जिन बच्चों का दाखिला कराया गया है, उनकी प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों तक दो साल से नहीं मिली है। ऐसी कई समस्याएं हैं जो कि निजी स्कूलों के शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। इस पर रोक लगाकर व्यवस्था सुदृढ़ करने की जरूरत है।

खेल मैदान हो रहे संकरा
फेडरेशन ऑफ एजुकेशनल सोसायटी के सचिव अरविंद शर्मा ने कहा कि स्कूलों में खेल मैदान संकरे हो रहे हैं। सुभाष स्टेडियम, कोटा स्टेडियम है, लेकिन स्कूली बच्चों के लिए उचित रेट पर खेल मैदान नहीं मिल रहा है। स्कूल और कॉलेजों के आसपास शराब दुकान नहीं होना चाहिए। शिक्षण संस्थानों के आसपास व्यवसाय नहीं होना चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की भी गाइडलाइन है, लेकिन इसका पालन नहीं हो पा रहा है। शराब की दुकान स्कूल के पास होना निंदनीय है। तम्बाखू का पाउच फाड़ते लोग स्कूल परिसर के बाहर दिख जाते हैं, इसका बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है।

स्कूलों से भी उठे शहर का कचरा
राजधानी के प्रोफेसर जेएन पाण्डेय स्कूल के प्राचार्य एमआर सावंत ने कहा कि स्कूलों में सफाई की व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को स्कूलों के कचरे को उठाने के लिए भी गाड़ी भेजनी चाहिए। गांधी मैदान के पास जिस तरह गौरवपथ बना हुआ है, उसी तरह घड़ी चौक से महिला थाना चौक मोतीबाग रोड को भी विकसित करना चाहिए। स्कूलों में बच्चों के लिए जो शौचालय बनाया गया है, वे बहुत सीमित हैं। उनके लिए सामूहिक शौचालय बनाने की आवश्यकता है। पहले तो बाथरूम बने हैं वे चीनी मिट्टी के हैं इसे अब सीमेंट का पक्का बनाया जा सकता है।

शाला त्यागियों के लिए आउटर इलाके में पार्ट टाइम
राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला समन्वयक एके सारस्वत ने कहा कि शहरी स्कूलों में शाला त्यागी बच्चों की संख्या बढ़ रही है। रायपुर में सरकारी प्राइमरी स्कूल 200 और निजी स्कूल 1 हजार करीब हैं। सरकारी स्कूल में ज्यादातर मजदूर वर्ग के पालकों के बच्चे हैं। रोजगार के लिए बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। उनके लिए शहर के रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, आउटर इलाके में पार्ट टाइम और शार्ट टाइम के स्कूल चलाये जाने चाहिए।

हालांकि नगर निगम में महापौर ने 400 बच्चों के लिए सुविधा दी है, लेकिन इसके दायरे को बढ़ाने की जरूरत है। दिव्यांग बच्चों के अभी हॉस्टल्स, टॉयलेट, रैम्प की आवश्यकता है। उनके लिए विशेष रैम्प की आवश्यकता है। हाई और हायर सेकंडरी स्तर पर भी पहल की जा सकती है। बच्चों का स्कूल में मन लगे इसके लिए वाल पेंटिंग कर प्रिंटरिच माहौल बना सकते हैं।

प्लास्टिक मुक्त हो शहर
स्वर्गीय मिंटू शर्मा हायर सेकंडरी स्कूल डूमरतराई के प्राचार्य आरएन त्रिवेदी ने कहा कि शहर में प्लास्टिक की एक बड़ी समस्या है। इससे मुक्त शहर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूह द्वारा कपड़े के झोले बनवाये जा सकते हैं। इससे उनका रोजगार भी बढ़ेगा और शहर को पॉलीथीन से मुक्त रखा जा सकेगा। 

उन्होंने कहा कि वे अपने स्कूल में खुद की बर्मी कम्पोस्ट खाद बनवाकर नर्सरी तैयार कर रहे हैं। आर्गनिक सब्जी को बढ़ावा दिया है। लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की महती आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नेशनल हाइवे और सड़कों के किनारे स्कूलों के पास आवश्यकता के अनुसार ब्रेकर लगाने की जरूरत है। तेज रफ्तार के वाहन आए दिन बच्चों को दुर्घटना के शिकार बना रहे हैं।

साइबर ठगों से बचने के लिए जागरूकता जरूरी
रायपुर में बतौर सीएसपी, एएसपी रह चुके और वर्तमान में पुलिस अकादमी चंदखुरी के पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में क्राइम का स्वरूप बदल रहा है। क्रिमिनल्स तेज हो गए हैं। नए-नए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे ऐसे ठगों से बचने लोगों को जागरूक करे। शहर की यातायात व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रायपुर शहर महानगरों की शक्ल में बदल रहा है। यातायात के नियमों का पालन सभी को करना चाहिए।

देखने में यह आता है कि किसी को यातायात नियमों को तोड़ते अगर पुलिस जवान पकड़ लेता है तो वह जुर्माने से बचने का रास्ता ढूंढ़ने लगता है। फोन लगाकर बात करने को कहता है। ऐसे लोगों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए। पालकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। छोटे उम्र के बच्चों को वाहन न दें। बच्चों को अनुशासन, ट्रैफिक का ज्ञान दें। आने वाले दिनों में डॉयल 112 शुरू होने से अब स्वास्थ्य, सुरक्षा और फायर तीनों सुविधा अब एक ही नंबर पर मिलने लगेगा।

विकास की दौड़ में शहर आगे
रायपुर में अपनी सेवाएं दे चुके महासमुंद जिले के एडिशनल एसपी संजय ध्रुव ने कहा कि मेरी शिक्षा रायपुर में ही हुई है, इसलिए शहर को करीब से जानता हूं। पिछले कुछ सालों में रायपुर में काफी विकास कार्य हुए है। एक समय था जब रायपुर को धूल, प्रदूषण का शहर और अपराध के रूप में लोग जानते थे, लेकिन आज हालात बदले हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम हुए हैं। सभी विभागों के योगदान से यह संभव हो सका है। शहर में दो साल पहले बाइकर्स गैंग का आतंक था। रात के समय अभियान चलाकर धरपकड़ की कार्रवाई कर बाइकर्स के परिजनों को बुलाकर समझाइश देते थे। कई पालक तो ऐसे होते थे, जो अपने बच्चों की हरकत पर असहाय नजर आते थे। चौक-चौराहों पर लेन सिस्टम से वाहन चालक चले तो कोई दिक्कत नहीं होगी। अपराध को रोकने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं वरन समाज की भी। अपने आसपास की गंदगी को खुद दूर करें।

सड़क पर न हो वाहन
राडा के पदाधिकारी और ऑटो मोबाइल कारोबारी सुनील धुप्पड़ ने कहा कि तेलीबांधा मरीन ड्राइव के सामने सड़कों पर वाहनों की पार्किंग होने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर पार्किंग की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए।

शहर के चारों तरफ हों फायर स्टेशन
अग्निशमन विभाग के अधीक्षक मोईनुद्दीन अशरफी ने कहा कि 1977 में फायर की समस्या नहीं होती थी। अब राजधानी की बढ़ती सघन आबादी को ध्यान में रखकर चारों दिशाओं में फायर स्टेशन की व्यवस्था नितांत जरूरी है। हाईड्रोलिक मशीन भी चाहिए। बड़े-बड़े भवनों में आग लगने की स्थिति में वैसे ही आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक गाड़ियां हों।

वर्तमान में शहर में एक ही फायर स्टेशन होने से कई दिक्कत सामने आती हैं। सिलतरा, उरला जैसे औद्योगिक क्षेत्र में आगजनी की सूचना पर दमकल की गाड़ियां मौके पर जाने के लिए निकलती है, लेकिन बीच ट्रैफिक में फंस जाने से काफी विलंब से वहां पहुंच पाती है। ऐसे हालात में रिस्पांस टाइम बढ़ जाता है। लोग पूछते है लेट कैसे हुआ। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विभाग बेहतर सेवा दे रहा है।

1 मई 2017 से अग्निशमन विभाग को शासन ने अपने हाथों में ले लिया है। तब से व्यवस्था में काफी सुधार आया है। शहर में फायर बिग्रेड की 15 गाड़ियां जल्द उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने गुढ़ियारी, सिलतरा जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्र में एक-एक फायर स्टेशन होने पर जोर दिया ताकि आसपास के इलाके में आगजनी होने पर फायर की गाड़ियां मौके पर तत्काल पहुंच सके।

नया रायपुर-पुराना रायपुर का परस्पर हो विकास
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ .सुभाष पांडेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद सबसे ज्यादा विकास रायपुर शहर का हुआ है। मुंबई की तर्ज पर शहर को विकसित करने का काम चल रहा है। नया रायपुर के साथ पुराने रायपुर शहर का विकास परस्पर होना चाहिए। पुराने आवासीय क्षेत्र पिछड़ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार विस्तार हो रहा है। डीके सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल, आंबेडकर अस्पताल डेवलप हुआ है। शहर में 100 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।

एक समय कालीबाड़ी में संक्रामक अस्पताल हुआ करता था, जो बंद हो गया। अभी उस अस्पताल की जरूरत है। उसे डेवलप किया जा सकता है। नगर निगम का स्वास्थ्य अमला केवल बॉयोमेडिकल वेस्ट उठाने का काम करता है, जबकि, डेंगू, मलेरिया, पीलिया समेत अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम करना निगम की जिम्मेदारी है। इसे स्वास्थ्य अमला पूरा करे।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

By Nandlal Sharma