विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhattisgarh में आदिवासी आरक्षण पर गर्माइ सियासत, विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का भेजा गया प्रस्‍ताव

By Jagran NewsEdited By: Arijita Sen
Published: Wed, 09 Nov 2022 10:40 AM (IST)

छत्‍तीसगढ़ में आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर सियासत गर्म है। इसे देखते हुए मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. ...और पढ़ें

राज्‍य में आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र
राज्‍य में आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र

रायपुर, जागरण आनलाइन डेस्‍क। छत्‍तीसगढ़ में साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टी अपनी-अपनी तरफ से प्रयासरत हैं। प्रदेश में इस वक्‍त आदिवासी आरक्षण का मुद्दा गर्माया हुआ है। इसे लेकर जहां एक तरफ भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश में है वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस भी आदिवासी समाज के प्रति गंभीर रवैया अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसी क्रम में आदिवासी आरक्षण के विषय को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने का प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत को भेजा गया है। उनसे आगामी एक एवं दो दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने का आग्रह किया गया है।

विवाद सुलझाने के लिए आइएएस अधिकारियों की तीन टीमें गठित

मालूम हो कि इससे पहले राज्‍य में आदिवासियों के आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने तीन आइएएस अधिकारियों के नेतृत्व में पांच सदस्यीय अध्ययन दल का गठन किया है। आइएएस शम्मी आबिदी महाराष्ट्र, पी अन्बलगन तमिलनाडु और भीम सिंह अपने दल के साथ कर्नाटक जाएंगे।

इनका काम इन राज्‍यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के आरक्षण के प्रविधानों के संबंध में सुसंगत जानकारी जुटाना है, जिसकी जानकारी क्वांटिफिएबल डाटा आयोग आदि को सौंपी जाएगी।

छत्तीसगढ़ में साकार हो रही बापू के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

राज्‍य में आदिवासी आरक्षण को किया गया कम

मामला दरअसल यह है कि बिलासपुर हाइकोर्ट ने 19 सितंबर को राज्‍य के शैक्षणिक संस्‍थानों और सरकारी नौकरियों में 58 फीसदी आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द किए जाने का फैसला सुनाया था। इसे लेकर खूब हंगामा हुआ। इस दौरान एसटी आरक्षण को 32 से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया, एससी के लिए 16 से 12 फीसदी हो गया और ओबीसी के लिए 14 फीसदी आरक्षण मान्‍य रखा गया।

कांग्रेस ने किया लोगों को ठगने का काम: भाजपा

इसे लेकर भाजपा नेता रामविचार नेताम ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि पार्टी ने लोगों को ठगने का काम किया है क्‍योंकि भाजपा के शासन में आदिवासियों के लिए 32 फीसदी आरक्षण कर दिया गया था और अब कांग्रेस शासन में इनके लिए कोटा कम किया जा रहा है।

राजनीति के जानकारों का कहना है कि प्रदेश में आदिवासियों के लिए 29 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा, प्रदेश की 11 विधानसभा सीटें ऐसी भी हैं, जहां आदिवासियों की संख्‍या अच्‍छी खासी है। ऐसे में चुनावी दृष्टिकोण से इन्‍हें खुश रखने में दोनों पक्षों की ही भलाई है।

Raipur: मुख्यमंत्री बघेल गुरुनानक जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, कहा- सिख समाज का सेवा भाव सराहनीय