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छत्तीसगढ़: जिसे मृत मानकर परिवार ने कर दिया अंतिम संस्कार, वह 17 दिन बाद जिंदा लौटा घर

Published: Sun, 01 Nov 2026 04:22 PM (IST)

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में एक परिवार ने अपने 28 वर्षीय बेटे मोतीलाल विश्वकर्मा को मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया ...और पढ़ें

जिस बेटे का किया था अंतिम संस्कार, 17 दिन बाद वह लौटा जिंदा (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)

जिस बेटे का किया था अंतिम संस्कार, 17 दिन बाद वह लौटा जिंदा (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)

HighLights

  1. परिवार ने मृत मानकर बेटे का अंतिम संस्कार किया था।

  2. 17 दिन बाद बेटा मोतीलाल विश्वकर्मा जिंदा घर लौटा।

  3. अब रहस्य है कि परिवार ने किसका अंतिम संस्कार किया।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार जिस 28 वर्षीय बेटे को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार की सभी पारलौकिक रस्में पूरी कर चुका था, वह करीब 17 दिन बाद जिंदा घर लौट आया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने सेमरा नाले के पास मिले एक सड़े-गले शव की पहचान 28 वर्षीय मोतीलाल विश्वकर्मा के रूप में की थी। परिवार ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया और मृत्यु के बाद की सभी रस्में पूरी कर लीं।

फिर किसका किया अंतिम संस्कार?

लेकिन 14 अगस्त 2026 को एक अजीब मोड़ आया, जब मोतीलाल जिंदा घर लौट आया। वह पड़ोसी धमतरी जिले में मिला। जिस घर में मातम छाया होना चाहिए था, वहां अब खुशी और हैरानी का माहौल है। लेकिन पुलिस और प्रशासन के सामने यह गंभीर पहेली खड़ी हो गई है कि आखिर परिवार ने जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार किया था, वह कौन था।

दरअसल, लापटा बेटा बलौदाबाजार जिले के सुकली बरेली गांव का रहने वाला है। वह लंबे समय से लापता था, जिससे उसका परिवार लंबे समय तक परेशान रहा। उसके रिश्तेदार भी उसे ढूंढ रहे थे, तभी उन्हें एक अज्ञात शव मिलने की खबर मिली। 28 जुलाई को 2026 को पुलिस ने सेमरा नाले के पास एक सड़ा-गला शव बरामद किया।

शव की हालत ऐसी थी कि उसकी पहचान करना मुश्किल था। जब मोतीलाल के परिवार को शव मिलने की खबर मिली, तो वे मौके पर पहुंचे और मृतक की पहचान अपने लापता रिश्तेदार के रूप में की। यह मानकर कि उन्हें अपना बेटा मिल गया है, परिवार वाले शव को ले गए और उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

अंतिम संस्कार की पूरी की सभी रस्म

इसके बाद परिवार ने अंतिम संस्कार से जुड़े लोकाचार के सभी पारंपरिक रस्मों को पूरा किया। जिसमें मुंडन संस्कार भी शामिल था। परिवार के लिए यह एक तरह से 'समाप्ति' थी, क्योंकि उनकी तलाश खत्म हो चुकी थी।

कैसे हुई पहचान?

लेकिन 14 अगस्त 2026 को कहानी ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया, जब धमतरी के संबलपुर मोड़ पर एक पेट्रोल पंप के पास एक व्यक्ति बैठा मिला। उसे देखकर लग रहा था कि उसे तुरंत मदद की जरूरत है। ऐसे में वरदान परमार्थ सेवा समिति के सदस्य उसकी मदद के लिए आगे आए। इस संस्था से जुड़े पप्पू साहू ने मदद का हाथ बढ़ाया और 'इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी' के शिव प्रधान से संपर्क किया।

रेड क्रॉस सोसाइटी के शिव प्रधान के अनुसार, धमतरी में मिला युवक मानसिक रूप से परेशान था। अस्पताल में इलाज और पहचान के दौरान मिले दस्तावेजों से पता चला कि वह बलौदाबाजार का मोतीलाल है। स्वयंसेवकों और पुलिस के प्रयासों से जब परिजनों को उसके जीवित होने की सूचना मिली, तो वे दंग रह गए।

जिस बेटे का वे अंतिम संस्कार कर शोक मना चुके थे, उसे दोबारा जीवित पाकर परिवार में भावुक पुनर्मिलन का माहौल बन गया। बेटे की वापसी से घर में खुशी तो लौटी, लेकिन बड़ा रहस्य यह खड़ा हो गया कि सेमरा नाले से मिले जिस सड़े-गले शव का उन्होंने अंतिम संस्कार किया था, वह आखिर किसका था।

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