विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'केवल लंबे समय तक अलग रहना विवाह-विच्छेद का आधार नहीं', हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

Published: Sat, 17 Oct 2026 10:36 PM (IST)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति को विवाह-विच्छेद की अनुमति नहीं दी, यह कहते हुए कि केवल लंबे समय तक अलग रहना तलाक का आधार नहीं है।

केवल लंबे समय तक अलग रहना विवाह-विच्छेद का आधार नहीं।

केवल लंबे समय तक अलग रहना विवाह-विच्छेद का आधार नहीं।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पति की विवाह-विच्छेद अपील निरस्त की।

  2. केवल लंबे समय तक अलग रहना तलाक का आधार नहीं।

  3. पति क्रूरता या परित्याग साबित करने में विफल रहा।

डिजिटल डेस्क, बिलासपुर। पत्नी से विवाह-विच्छेद की मांग करने वाले राजनांदगांव निवासी रोहित रजक को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने कहा कि केवल लंबे समय तक अलग रहने से विवाह-विच्छेद का अधिकार नहीं मिल जाता। पति को क्रूरता या परित्याग के निर्धारित कानूनी आधारों को साक्ष्यों से साबित करना होगा।

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की खंडपीठ ने रोहित की अपील निरस्त कर पारिवारिक न्यायालय के विवाह-विच्छेद देने से इनकार करने के फैसले को बरकरार रखा।

बता दें कि रोहित और संतोषी रजक का विवाह 18 जून 1998 को भिलाई में हुआ था। याचिकाकर्ता के अनुसार, पत्नी 25 अक्टूबर 2010 को सरकारी आवास छोड़कर मायके चली गई और नकदी, गहने तथा जमीन के दो भूखंडों के दस्तावेज साथ ले गई। उसने पत्नी पर मानसिक प्रताड़ना और दूसरी शादी के झूठे आरोप लगाने का दावा किया।

पत्नी ने कहा कि पति ने उसे बांझ कहकर प्रताड़ित किया और घर से निकाल दिया। उसके मुताबिक, पति भरण-पोषण से बचने के लिए विवाह विच्छेद चाहता था। हाई कोर्ट ने पाया कि पति ने स्वीकार किया था कि शादी के शुरुआती 10 से 12 वर्षों में दोनों के बीच विवाद नहीं था। वह पत्नी के मायके जाने का कारण नहीं बता सका और उसे वापस लाने के लगातार प्रयासों का भी प्रमाण नहीं दिया।

नकदी-गहने ले जाने तथा मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक अलग रहना या वैवाहिक संबंध टूटना विवाह-विच्छेद का आधार नहीं है। पति क्रूरता और परित्याग साबित करने में विफल रहा।