नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सभी सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPF) की पेशकश करता है। देश में 20 से अधिक कर्मचारियों की संख्या वाले संस्थान में सभी कर्मचारियों की सैलरी से 12 फीसद ईपीएफ में योगदान जाता है और उतना ही योगदान नियोक्ता की ओर से भी जमा किया जाता है। अगर आप एक सैलरी पाने वाले कर्मचारी हैं और पीएफ में पैसा जमा हो रहा है तो आपको यह पता होना चाहिए कि पीएफ के पैसे पर भी टैक्स लगता है अगर पीएफ का पैसा ईपीएफ की सदस्यता के 5 साल पूरा होने से पहले निकाला जाता है।

आयकर अधिनियम के तहत 5 साल की निरंतर सेवा के बाद पीएफ अमाउंट टैक्स फ्री होगा। अगर नौकरी में कोई परिवर्तन होता है और कुल पीएफ बैलेंस नए नियोक्ता द्वारा बनाए गए नए पीएफ अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है तो पीएफ को लगातार सर्विस में माना जाता है, लेकिन पीएफ योगदान में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।

लगातार 5 साल सर्विस के लिए कुछ बातों में छूट दी गई है जैसे कर्मचारी के खराब स्वास्थ्य, नियोक्ता के व्यवसाय के रुकने या कर्मचारी की पहुंच से अलग कारणों की वजह से नौकरी छूट जाना। ऐसी स्थितियों में जो पैसा निकाला जाता है वह टैक्स फ्री होता है।

अगर एक कर्मचारी चाहे तो ईपीएफ में अपना योगदान बढ़ा सकता है, लेकिन नियोक्ता की तरह से सिर्फ 12 फीसद का ही योगदान किया जाएगा। ईपीएफ सैलरी पाने वाले लोगों के रिटायरमेंट और भविष्य के लिए काम आता है। ईपीएफ में जमा अमाउंट पर प्रति वर्ष ब्याज दर में संशोधन किया जाता है। ईपीएफ ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 8.65 फीसद ब्याज दर तय की है। 

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Posted By: Sajan Chauhan

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