नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। चालू वित्त वर्ष 2019 31 मार्च को खत्म होने वाला है, ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वो अहम दस्तावेजों (डॉक्यूमेंट्स) को जुटा लें। इन डॉक्यूमेंट्स में बैंक स्टेटमेंट्स, इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, टीडीएस सर्टिफिकेट, ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट और कैपिटल गेन स्टेटमेंट इत्यादि। निवेशकों के लिए यह भी काफी अहम है वो अपनी विभिन्न स्रोतों से हुई आय की जानकारी जुटा लें, जैसे कि कैपिटल गेन और इंटरेस्ट या डिविडेंट ताकि रिटर्न फाइलिंग के दौरान आपकी कर देयता का निर्धारण आसानी से हो सके।

आप हर हाल में जुटा लें ये दस्तावेज:

  • बैंक स्टेटमेंट्स: निवेशक वर्ष के अंत में अपना बैंक स्टेटमेंट जुटा लें जिसमें प्राप्त हुई आय और निवेश की जानकारी शामिल हो। आप इसे ऑनलाइन भी प्राप्त कर सकते हैं या फिर बैंक जाकर इसकी फिजिकल कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।
  • इंटरेस्ट सर्टिफिकेट: निवेशक की सभी जमाओं पर एक वित्त वर्ष के दौरान ब्याज भुगतान के संबंध में बैंक एक सर्टिफिकेट ऑफ इंटरेस्ट भी उपलब्ध करवाता है। सेविंग अकाउंट के लिए बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट देता है। अगर किसी सूरत में ऐसा नहीं होता है तो इसे बैंक स्टेटमेंट से प्राप्त किया जा सकता है।
  • सिक्योरिटी स्टेटमेंट: म्यूचुअल फंड निवेशक अपने निवेश के लिए एक कंसॉलिडेटेड होल्डिंग स्टेटमेंट प्राप्त करते हैं। शेयर्स की सिक्योरिटी और अन्य डिमेट सिक्योरिटीज के लिए भी निवेशक एनुअल होल्डिंग स्टेटमेंट प्राप्त करते हैं।
  • टीडीएस सर्टिफिकेट: अगर ब्याज 10,000 रुपये की सीमा से ऊपर चला जाता है तो बैंक ब्याज आय पर टीडीएस की कटौती करता है। टीडीएस सर्टिफिकेट को बैंक की ओर से प्राप्त किया जा सकता है।
  • ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट: अगर किसी सूरत में निवेशक सिक्योरिटी की बिक्री करता है या उसकी ट्रेडिंग करता है तो ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट और अकाउंट स्टेटमेंट को जरूर प्राप्त किया जाना चाहिए जो कि एक वित्त वर्ष के लिए होता है।
  • कैपिटल स्टेटमेंट: म्युचुअल फंड और ब्रोकर यूजर्स के आग्रह पर कैपिटल गेन स्टेटमेंट उपलब्ध करवाते हैं, जो कि एक वित्त वर्ष के दौरान हुए टोटल कैपिटल गेन और घाटे का निर्धारण करता है।
  • होम लोन इंटरेस्ट: होम लोन मामले में, बैंक एक सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाता है, जिसमें एक वित्त वर्ष के दौरान हुए कुल रीपेमेंट का ब्यौरा होता है, जिसमें प्रिंसिपल और मिले ब्याज का ब्रेकअप होता है। इसका इस्तेमाल इनकम टैक्स डिडक्शन क्लेम करने के दौरान किया जाता है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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