नई दिल्‍ली, बिजनेस डेस्‍क। Petrol के साथ डीजल (Diesel ka rate) भी रुला रहा है। इससे न सिर्फ चलना-फिरना महंगा हो गया है बल्कि सीधे तौर पर घर की रसोई का बजट (Rasoi ka budget) ही बिगड़ गया है। देश के Metros में मुंबई में डीजल की कीमत 94.84 रुपये प्रति लीटर है, जो महानगरों में सबसे ज्यादा है। साल भर के आंकड़ों पर निगाह डालें तो डीजल करीब 25 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है। इसका सीधा असर माल-भाड़े पर पड़ा है। जरूरी सामान की ट्रकों से आवाजाही महंगी हो गई है। इससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी पर महंगाई की मार (Mehngai ki maar) पड़ रही है।

डीजल और टायर हुए महंगे

दिल्‍ली के इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (IFTRT) ने ट्रकों के माल भाड़े (Truck Loading fare in India) पर रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि मालभाड़े की दरें देश में 9-14 फीसदी बढ़ी हैं। इसका कारण डीजल और टायरों की कीमतों में इजाफा है। डीजल की कीमत लगातार बढ़ रही है जबकि टायरों की 8 फीसद तक बढ़ चुकी है। वहीं परिवहन विकास ट्रस्‍ट के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता जगदीश अग्रहरि के मुताबिक पूरे देश में Lockdown खुलने के बाद से चीजों के दाम बढ़े हैं। अकेले लखनऊ में ट्रांसपोर्टरों ने ट्रक भाड़े की बुकिंग प्रति कुंतल 30 रुपए तक बढ़ा दी है। 300 किमी से ज्‍यादा दूरी के सामान पर ट्रांसपोर्टर रेट 30 रुपए तक बढ़ा दे रहे हैं।

सरसों तेल से दाल तक महंगी

लखनऊ दाल-राइस मिल एसोसिएशन के अध्‍यक्ष भारत भूषण गुप्‍ता बताते हैं कि गत्‍ता और प्‍लास्टिक का कच्‍चा माल ज्‍यादातर गुजरात और महाराष्‍ट्र से आता है। माल भाड़ा बढ़ने के कारण इसके रेट भी चढ़ गए हैं। Edible oil के लिए हम ज्‍यादातर आयात पर निर्भर हैं। खाद्य तेल की कीमतें (Edible Oil Prices) बढ़ने के कई और भी कारण हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय कीमतें और घरेलू उत्पादन भी शामिल हैं। चूंकि घरेलू खपत और उत्पादन के बीच का अंतर बड़ा है, इसलिए भारत को बड़ी मात्रा में खाद्य तेल बाहर से मंगाना पड़ता है। अगर बीते साल मार्च 2020 से जून 2021 की तुलना करें तो सिर्फ सरसों तेल में करीब 60 रुपए प्रति लीटर का उछाल है।

1 साल पहले इस भाव मिल रहा था सामान

अगर मार्च 2020 के आंकड़ों पर निगाह डालें तो सिर्फ सरसों का तेल करीब 60 रुपए महंगा हुआ है। हालांकि मई 2021 के मुकाबले दाम कुछ कम हुए हैं। 14 महीने पहले यह 95 से 105 रुपए के बीच बिक रहा था। वहीं रिफाइंड के दाम 70 रुपए तक बढ़े हैं।

दालों का हाल

अरहर दाल करीब 20 रुपए किलो महंगी हुई है। फुटकर दुकानों पर यह बीते साल मार्च में 75 रुपए प्रति किलो बिक रही थी। अब यह 95 रुपए है। उड़द दाल 90 रुपए किलो चल रही थी, जो अब 130 रुपए प्रति किलो है। मूंग 80 से बढ़कर 120 रुपए किलो, चना 55 रुपए से बढ़कर 75 रुपए किलो, मसूर के रेट 55 रुपए थे जो अब बढ़कर 75 रुपए किलो हो गए हैं। व्‍यापारियों की मानें तो Metro में ब्रांडेड दाल और दूसरे सामान के रेट और ज्‍यादा चढ़े हैं।

क्‍या कहते हैं सरकारी आंकड़े

केंद्र सरकार के उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते एक महीने में Edible oil की कीमतों में कमी आई है। पाम ऑयल (Palm Oil) की कीमत 7 मई 2021 को 142 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब 19 फीसदी घटने के साथ 115 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। सनफ्लावर ऑयल (Sunflower Oil) की कीमत 5 मई 2021 को 188 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब 16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 157 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ चुकी है।

तेल की कीमत

Soya Oil की कीमत 20 मई 2021 को 162 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब मुंबई में 15 फीसदी की गिरावट के साथ 138 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। Mustard Oil की 16 मई 2021 को कीमत 175 रुपये प्रति किलोग्राम थी, अब यह लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 157 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। जबकि 14 मई 2021 को मूंगफली के तेल की कीमत (Coconut Oil Price) 190 रुपये प्रति किलोग्राम थी, अब यह 8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 174 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। 2 मई 2021 को वनस्पति की कीमत 154 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब 8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 141 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

तेल के दाम आएंगे नीचे

मंत्रालय का कहना है कि केंद्र सरकार Edible oil rate घटाने के लिए स्थायी आधार पर हल निकाल रही है। सरकार उपायों की एक सीरीज पर काम कर रही है। ये उपाय भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देंगे।

Edited By: Ashish Deep