नई दिल्ली, अनुराग मिश्र/पीयूष अग्रवाल। ऑटो सेक्टर अभी कोरोना की मार से उबरा नहीं है। कोरोना की वजह से इस सेक्टर को और अधिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। हालांकि, 2020 के जुलाई माह में जून, 2020 की तुलना में ऑटो सेक्टर में सुधार दिखाई दिया है, जबकि ट्रैक्टर की सेल में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। यह खुलासा बोस्टन एंड कंसलटिंग की इंडिया इकोनॉमिक मॉनिटर रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो सेक्टर में जुलाई माह में वृद्धि तो हुई है, पर बीते साल के जुलाई माह की तुलना में यह काफी कम है। बीते साल जुलाई माह के मुकाबले इस साल 67 फीसदी कम पैसेंजर वाहनों की बिक्री हुई है। 2019 के मुकाबले 2020 के जुलाई में ट्रेक्टर बिक्री में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अगर आंकड़ों की बात करें तो 2019 के जून माह में 76,000 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई थी, वही 2020 के जून में 93,000 ट्रैक्टरों की सेल हुई। जुलाई 2019 में 46,000 ट्रैक्टर बिके, वहीं जुलाई, 2020 में 63,000 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई।

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फॉर्म इक्विपमेंट सेक्टर के प्रेसीडेंट हेमंत सिक्का का कहना है कि ट्रैक्टर इंडस्ट्री में ग्रोथ खुशी की बात है। यह दर्शा रहा है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मकता का माहौल है। ट्रैक्टर इंडस्ट्री के लिए यह शुभ संकेत है। ट्रैक्टर इंडस्ट्री की ग्रोथ अगस्त में भी मजबूत रही है। खरीफ की फसल की बेहतर बुआई, अच्छी फसल होने की उम्मीद होना, शानदार मानसून, अच्छा कैश फ्लो ने लोगों में पॉजिटिव सेंटीमेंट्स को बरकरार रखा है। हमें पूरी उम्मीद है कि जब हम त्यौहारी सीजन में प्रवेश करेंगे तो ट्रैक्टर की डिमांड बढ़ेगी। सिक्का ने बताया कि 23503 ट्रैक्टर अगस्त माह में बेचे थे। पिछले साल के मुकाबले इसमें 69 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी बाजारों में बढ़ोतरी दिखाई है। 

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट सेक्‍टर के प्रेसिडेंट, हेमंत सिक्‍का ने बताया कि हमने हाल ही में प्लांटिंग मास्टर पोटैटो लांच किया है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आलू उत्‍पादक देश के रूप में, आलू की उच्‍च पैदावार और बेहतर  गुणवत्‍ता के लिए एडवांस्‍ड फार्म मशीनरी आवश्‍यक है। प्लांटिंग मास्‍टर पोटैटो  के जरिए, हम भारतीय किसानों के लिए यह तकनीक ला रहे हैं ताकि आलू की खेती की पैदावार व गुणवत्‍ता बेहतर हो सके। इस प्रोडक्‍ट को लॉन्‍च करने के साथ, कुछ बाजारों में रेंटल आधार पर भी प्रेसिजन प्‍लांटर उपलब्‍ध है, इसकी खरीद के लिए आसान फाइनेंस का विकल्‍प भी मौजूद है, ताकि भारतीय किसानों को यह तकनीक आसानी से उपलब्‍ध हो सके।

सियाम के पूर्व अध्यक्ष सुगातो सेन कहते हैं कि भारत का एग्रीकल्चर सेक्टर काफी मजबूत हुआ है। जहां हर सेक्टर में लॉकडाउन हुआ था, वहीं एग्रीकल्चर सेक्टर में लॉकडाउन नहीं हुआ था। यह सेक्टर लगातार काम कर रहा था। साथ ही इस साल मानसून भी बेहतर रहा। ऐसे में ट्रैक्टरों की बिक्री में इजाफा हुआ। सेन ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर दो साल से लगातार संघर्ष कर रहा है। कोरोना ने इसकी कमर और तोड़ दी। कोरोना से सेक्टर कब उबरेगा, इसके बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है। पर 2024 तक ऑटो सेक्टर का गोल्डन टाइम आना आसान नहीं दिखता।

जहां तक थ्री-व्हीलर की बिक्री की बात है तो बोस्टन एंड कंसलटिंग की रिपोर्ट कहती है कि जून के मुकाबले जुलाई माह में सुधार हुआ है। जुलाई माह में 13,000 थ्री-व्हीलर बिके, जबकि जून माह में दस हजार बिके थे। दोपहिया वाहनों की बिक्री भी जुलाई में जून माह के मुकाबले सुधरी है। जून माह में जहां 10,13000 वाहन बिके थे, वहीं जुलाई माह में 12,81000 वाहनों की बिक्री हुई।

बिक्री बढ़ी, सप्लाई घटी

वाहनों के प्रोडक्शन में आई कमी के दो सबसे बड़े कारण प्रवासी मजदूरों का अपने घरों को वापस जाना और सरकार की तरफ से प्रति व्यक्ति 8 घंटे की शिफ्ट तय करना है। फैक्ट्रियों में 45 से 50 फीसदी का ही प्रोडक्शन हो पा रहा है, जिसके चलते सप्लाई में 35 से 40 फीसदी की कमी आ गई है। अगस्त माह में कार कंपनी मारुति और ह्यूंदै की सेल्स में तो 20-20 फीसदी उछाल हुआ है। दो पहिया वाहन बना रही हीरो मोटरकॉप को भी फायदा हुआ है।

इतनी गिर सकती है बिक्री

इंडिया रेटिंग के अनुसार, दो पहिया वाहनों की बिक्री में 20-22 फीसदी, चार पहिया गाड़ियों की बिक्री में 22-26 फीसदी, हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 26-30 फीसदी और बड़े वाहनों- जैसे कि ट्रक, बस आदि में 35-45 फीसदी तक बिक्री में कमी होने का अनुमान है। इसके साथ ही मासिक बिक्री के आंकड़े को सुधरने में भी कम से एक साल का वक्त लगेगा।

दशकों की भारी गिरावट

सियाम का कहना है कि कोरोना वायरस और बाद में लॉकडाउन के कारण एक पूर्ण तिमाही की बिक्री के करीब नुकसान कुल सालाना संख्या को प्रभावित करेगा। वहीं, 2020-21 की बिक्री 2009-10 में बेची गई 1.95 मिलियन यूनिट से कम हो सकती है। इसी तरह, दोपहिया वाहनों का भी वॉल्यूम 2011-12 में बेचे गए 12 मिलियन से कम होगा। 

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