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क्या अब सिर्फ अमीर लोग ही कर पाएंगे ऑप्शंस ट्रेडिंग? NSE के CEO आशीष चौहान के इस बयान ने दिए बड़े संकेत

Published: Fri, 27 Feb 2026 10:03 AM (IST)

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रमुख आशीष चौहान ने भारत में डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए अमेरिका और सिंगापुर जैसे न्यूनतम ...और पढ़ें

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HighLights

  1. NSE प्रमुख ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग में न्यूनतम पात्रता सुझाई।

  2. अमेरिका, सिंगापुर जैसे देशों के कड़े पूंजीगत नियम लागू हों।

  3. खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान से बचाने का लक्ष्य।

नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशिष चौहान ने कहा है कि भारत को भी अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों की तर्ज पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम पात्रता मानदंड लागू करने चाहिए। उनका मानना है कि इससे समाज के निचले तबके के लोग अत्यधिक जोखिम भरे डेरिवेटिव बाजार में भाग लेकर नुकसान उठाने से बच सकेंगे।

चौहान ने यह बात फ्यूचर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) फोरम के एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के निचले तबके के लोगों के अत्यधिक सट्टेबाजी की धारणा बनी रहेगी, तब तक सरकार और नियामक संस्थाएं सख्त नियम लाती रहेंगी।

वैश्विक मानकों का हवाला

चौहान ने कहा कि अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए कड़े पूंजीगत नियम लागू हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में मार्जिन खाते में कम से कम 25,000 डॉलर की अनिवार्य न्यूनतम शेष राशि की जरूरत होती है, जबकि भारत में इस तरह की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसके अलावा, इन देशों में आधुनिक ट्रेडिंग अनुमतियां और मार्जिन खाते के रखरखाव से जुड़े सख्त नियम भी लागू हैं।

सरकार और सेबी ने क्या दिखाई सख्ती?

एनएसई प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) और केंद्र सरकार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) सेगमेंट में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को सीमित करने के लिए नियम सख्त कर रहे हैं।
हाल ही में 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में डेरिवेटिव लेनदेन पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत इक्विटी फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव है।

बढ़ते नुकसान से क्या है चिंता?

सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में डेरिवेटिव सेगमेंट में कारोबार करने वाले 91% व्यक्तिगत रिटेल निवेशकों को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। यह पिछले वित्त वर्ष के 74,812 करोड़ रुपये के मुकाबले 41% अधिक है। औसतन, प्रत्येक रिटेल ट्रेडर को FY25 में 1.1 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जो सालाना आधार पर 27% की बढ़ोतरी दिखाता है।

हालांकि, कुछ डेरिवेटिव विश्लेषकों का मानना है कि बाजार नियामक प्रवेश स्तर पर कोई उपयुक्तता मानदंड  लागू करने की संभावना कम है। मार्च 2025 में सेबी के तत्कालीन पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने स्पष्ट किया था कि नियामक फिलहाल एफ एंड ओ ट्रेडिंग के लिए किसी परीक्षा या योग्यता परीक्षण पर विचार नहीं कर रहा है।