जनवरी में 4% गिरे Nifty-Sensex, 26 जनवरी के बाद आएगी 'बजट रैली', क्या कहते हैं पिछले 5 साल के आंकड़े?
जनवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी, विदेशी फंड निकासी, कमजोर रुपये और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण 4% ...और पढ़ें

तीन दिन की छुट्टी के बाद 27 जनवरी को खुलेंगे शेयर बाजार

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। शेयर बाजार (Share Market Performance) के लिहाज से कैलेंडर वर्ष 2026 की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। विदेशी फंडों की लगातार निकासी, रुपये में कमजोरी, कारपोरेट आय में सुस्ती, भूराजनीतिक जोखिम और टैरिफ संबंधी नई चिंताओं के कारण पहले महीने में दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी चार प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क चुके हैं। जनवरी में अब तक बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 3,682.9 अंक या 4.32 प्रतिशत और एनएसई का निफ्टी 1,080 अंक या 4.13 प्रतिशत गिर चुके हैं।
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख संतोष मीना का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से जनवरी में बजट से पहले ऐसे रुझानों में तेज गिरावट देखी गई है, जिसमें गणतंत्र दिवस के बाद सुधार होता है। बाजार के प्रतिभागियों को इस बार भी इसी तरह के उलटफेर की उम्मीद है।
2020 से 2025 तक के आंकड़े
जनवरी 2025 में भी बीएसई सेंसेक्स 638.44 अंक या 0.81 प्रतिशत गिर चुका था। इसके पहले जनवरी 2024, 2023, 2022, 2021 और 2020 में भी बीएसई बेंचमार्क में गिरावट आई थी। वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और नए टैरिफ संबंधी चिंताएं घरेलू शेयरों पर प्रभाव डाल रही हैं।
वैश्विक जोखिम-नकारात्मक वातावरण ने इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा आक्रामक बिक्री को प्रेरित किया है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है, जो रिकार्ड निम्न स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के ऊंचे दाम और बढ़ते वैश्विक बांड यील्ड ने जोखिम-नकारात्मकता को और बढ़ा दिया है, जिससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
बाजार में क्यों हावी है गिरावट?
वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, आईटी, बैंकिंग और उपभोक्ता से जुड़े क्षेत्रों में कुछ प्रमुख शेयरों से आय में निराशा ने निवेशक आशावाद को और कम किया है, जिससे वर्ष की शुरुआत निराशाजनक रही है। 23 जनवरी को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92 के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंच गया था। इस महीने अब तक स्थानीय मुद्रा दो प्रतिशत से अधिक गिर चुकी है।एक्सिस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता, घरेलू विकास की मजबूती और वित्तीय अनुशासन के चलते केंद्रीय बजट 2026-27 में विकास समर्थन और व्यापक आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद है।
पिछले सप्ताह दो प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट रही बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान सेंसेक्स में 2,032.65 अंक और निफ्टी में 645.7 अंक की गिरावट रही। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण वैश्विक और घरेलू चुनौतियों का संयोजन है। कई कारपोरेट्स से निराशाजनक और सतर्क टिप्पणियां एक प्रमुख ट्रिगर के रूप में उभरी हैं, जिसने बाजार के विश्वास पर भारी दबाव डाला है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं खासतौर पर यूरोप के बीच व्यापार संबंधों में नवीनीकरण ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
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जियोजिट इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने न केवल 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में अपनी बिक्री जारी रखी, बल्कि अपनी बिक्री की तीव्रता को भी बढ़ा दिया। भावनाएं बहुत कमजोर बनी रहीं, जो निरंतर रुपये के अवमूल्यन, अमेरिका-भारत व्यापार सौदे के संबंध में किसी अंतिमता की कमी और तीसरी तिमाही में अब तक निराशाजनक परिणामों के संयोजन के कारण थीं।
(सेंट्रल डेस्क के इनपुट के साथ)
