शेयर बाजार में बड़ा उलटफेर? SEBI बदलने जा रहा AI और शॉर्ट सेलिंग के नियम; बायबैक-OFS के लिए भी लागू हो सकते हैं नए रूल
सेबी स्टॉक ब्रोकर्स के लिए एक ग्रेडेड कंप्लायंस फ्रेमवर्क लाने पर विचार कर रहा है, जो कारोबार के पैमाने और ...और पढ़ें

शेयर बाजार पर सेबी की नई प्लानिंग (AI फोटो)
HighLights
ब्रोकर्स के लिए ग्रेडेड कंप्लायंस फ्रेमवर्क पर विचार
बाजार दक्षता और निवेशक सुरक्षा बढ़ाना मुख्य लक्ष्य
ट्रेडिंग टर्मिनल दुरुपयोग रोकने के उपाय भी शामिल
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) स्टॉक ब्रोकर्स के लिए एक 'ग्रेडेड कंप्लायंस फ्रेमवर्क' लाने पर विचार कर रहा है। चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को बताया कि इसमें रेगुलेटरी जरूरतें ब्रोकर्स के कारोबार के पैमाने, क्लाइंट एक्सपोजर और तकनीक पर उनकी निर्भरता के आधार पर तय की जाएंगी।
मुंबई में 'एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया' (ANMI) की तरफ से आयोजित 16वें इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन में बोलते हुए, पांडे ने बाजार की एफिशिएंसी बढ़ाने, रेगुलेटरी कॉस्ट कम करने और निवेशकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई उपायों का फ्रेमवर्क पेश किया।
विभिन्न ब्रोकर्स के लिए अलग शर्तें
इस प्रस्तावित फ्रेमवर्क का मकसद यह है कि कम्प्लायंस की शर्तें पूरी इंडस्ट्री के लिए एक जैसी न हों, बल्कि हर ब्रोकर के कारोबार के साइज और उससे जुड़े ऑपरेशनल रिस्क के हिसाब से तय की जाएं। सेबी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रहा है, ताकि कम्प्लायंस प्रोसेस को सरल बनाया जा सके और धोखाधड़ी के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
इन फ्रेमवर्क की भी हो रही समीक्षा
सेबी ट्रेडिंग टर्मिनल्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी डेवलप कर रहा है। साथ ही, बाजार में लिक्विडिटी और सही कीमत तय होने की प्रोसेस (प्राइस डिस्कवरी) को बेहतर बनाने के लिए 'शॉर्ट-सेलिंग' और 'सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग' (SLB) ढांचे की समीक्षा की जा रही है।
सेबी अपने निरीक्षण पोर्टल्स (इंस्पेक्शन पोर्टल्स) को एक इंटीग्रेटेड डिजिटल वर्कफ्लो में लाने पर भी काम कर रहा है। इससे रेगुलेटरी प्रोसेसेज अधिक बेहतर होगी और रेगुलेटरी कामकाज में अधिक एकरूपता आएगी।
'ऑटोमेटेड गिव-अप और टेक-अप' फैसिलिटी का विस्तार
सेबी कैश मार्केट सेगमेंट में 'ऑटोमेटेड गिव-अप और टेक-अप' फैसिलिटी का विस्तार कस्टोडियल क्लाइंट्स तक करने की योजना बना रहा है। इसमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) शामिल हैं। इस सुविधा का मकसद कैपिटल की कार्यक्षमता बढ़ाना है, ताकि कस्टोडियन द्वारा ट्रांजैक्शन कन्फर्म करने के दौरान फंड्स के ब्लॉक रहने का समय कम हो सके।
सेबी टेंडर ऑफर, शेयर बायबैक और 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) से जुड़ी अनुपालन लागत को कम करने के तरीकों पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल, इनमें समानांतर क्लियरिंग व्यवस्था होने के कारण ऑपरेशनल एक्सपेंस बढ़ सकता है।
ये भी पढ़ें - शेयर बाजार में तबाही के बीच इन 5 शेयरों ने दिया बंपर रिटर्न, 4 ही दिन में 45% तक की लगाई छलांग; देखें लिस्ट
(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
