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Nifty Target: 26000-26500 तक जाएगा निफ्टी, 4 से 5 महीनों में हासिल होंगे ये लक्ष्य; रिपोर्ट में बड़ा दावा

Published: Tue, 13 Oct 2026 05:09 PM (IST)

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने निफ्टी के लिए अगले 4-5 महीनों में 26,000-26,500 का नया लक्ष्य दिया है। रिपोर्ट में कहा ...और पढ़ें

फाइल फोटो

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HighLights

  1. मोनार्क नेटवर्थ ने निफ्टी के लिए 26,000-26,500 का लक्ष्य दिया।

  2. वैश्विक आर्थिक सुधार और डॉलर की कमजोरी से बाजार को समर्थन।

  3. US बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भारतीय इक्विटी में निवेश बढ़ेगा।

नई दिल्ली। निफ्टी की वीकली एक्सपायरी पर 13 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार जबरदस्त तेजी के साथ बंद हुए। बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी ने 22721 के ऊपर क्लोजिंग दी। मार्केट में आई इस तेजी के बीच मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने निफ्टी पर एक बड़ा टारगेट दिया है। मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निफ्टी अगले 4-5 महीनों में 26,000-26,500 के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच जाएगा।

कंपनी के CEO गौरव भंडारी को उम्मीद है कि ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक हालात में बदलाव से रिकवरी का माहौल बनेगा। उन्हें उम्मीद है कि बॉन्ड यील्ड में कमी, डॉलर की कमजोरी और ग्लोबल कैपिटल फ्लो में बढ़ोतरी से भारतीय इक्विटी को सपोर्ट मिलेगा।

US बॉन्ड यील्ड में आएगी गिरावट?

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि US का 10-साल का ट्रेजरी यील्ड 5.35% पर है, जो 24 साल में सबसे ज़्यादा है; सिर्फ़ CY2026 में ही इसमें 110 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है। इस स्तर पर, US सरकार $35 ट्रिलियन से ज़्यादा के कर्ज़ पर सालाना लगभग $1.8 ट्रिलियन का ब्याज चुका रही है, जो उसके रक्षा बजट से भी ज़्यादा है। इस बीच, 7.03% की 30-साल वाली मॉर्गेज दर ने अमेरिकी हाउसिंग मार्केट को ठप कर दिया है। इतिहास में पिछली दो बार जब 10-साल की यील्ड 5.25% से ऊपर गई थी — 2002 और 2007 में — तो उसके 18 महीनों के भीतर यील्ड में 40-60% की गिरावट आई थी।

इन आंकड़ों को देखते हुए उनका विश्लेषण के बाद गौरव भंडारी का मानना है कि यील्ड का मौजूदा स्तर लंबे समय तक नहीं चल सकता। "5.35% की यील्ड कोई 'न्यू नॉर्मल' नहीं है; यह एक ऐसी चरम स्थिति है जो पहले से ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अंदर से तोड़ रही है।" उन्हें उम्मीद है कि यील्ड में गिरावट से आखिरकार लिक्विडिटी भारतीय बाज़ारों की ओर मुड़ेगी।

डॉलर में भी आएगी गिरावट

अमेरिका में लगातार ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) के साथ-साथ 6-7% का फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) भी चल रहा है। भंडारी के अनुसार, इतिहास में जब भी ये दोनों घाटे एक साथ हुए हैं, तो उसके बाद डॉलर में बड़ी गिरावट आई है। डॉलर इंडेक्स 2026 में पहले ही एक बार 100 के स्तर से नीचे जा चुका है और उन्हें उम्मीद है कि यह फिर से कमजोर होकर 95 के स्तर तक जा सकता है।

कमज़ोर डॉलर ग्लोबल इन्वेस्टर्स को उभरते बाज़ारों में अपना निवेश फिर से संतुलित करने के लिए प्रेरित कर सकता है। भंडारी का मानना है कि इस बदलाव से भारतीय इक्विटी को फ़ायदा हो सकता है, क्योंकि डॉलर के कमज़ोर होने के पिछले दौर में उन्होंने बेहतर रिटर्न दिया है।

भंडारी ने US मनी मार्केट फंड में मौजूद $6.3 ट्रिलियन को लिक्विडिटी का एक अहम संभावित ज़रिया बताया। जैसे-जैसे यील्ड कम होती है, इन इंस्ट्रूमेंट्स से मिलने वाला रिटर्न कम आकर्षक हो सकता है, जिससे निवेशक ज़्यादा जोखिम वाले एसेट्स में मौके तलाशने लगेंगे। ग्लोबल कैरी ट्रेड्स के अनवाइंडिंग से ये फ़्लो और भी बढ़ सकते हैं। उन्हें उम्मीद है कि US यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से दुनिया भर में लिक्विडिटी (नकदी) की एक साथ लहर आएगी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के पास भारतीय इक्विटी फ्यूचर्स में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोजीशन होने के कारण, ग्लोबल सेंटीमेंट में बदलाव से बड़े पैमाने पर शॉर्ट कवरिंग भी हो सकती है।

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भंडारी के अनुसार, US यील्ड में गिरावट, डॉलर का कमजोर होना, मनी मार्केट फंड से कैपिटल का दूसरी जगह जाना, FII की शॉर्ट कवरिंग और घरेलू स्तर पर हर महीने लगभग ₹31,000 करोड़ का लगातार निवेश। ये सभी कारक मिलकर वैल्यूएशन री-रेटिंग को 18 गुना से बढ़ाकर 22-24 गुना तक ले जा सकते हैं। ऐसे में गौरव भंडारी का निफ्टी के लिए लक्ष्य अगले 4-5 महीनों में 26,000-26,500 है। उनका मानना है कि बाजार का माहौल डिफेंसिव रुख अपनाने के बजाय अच्छे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी के पक्ष में है।